भारत में फिर बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, स्वेज नहर में फंसे जहाज के कारण कच्चे तेल की कीमतों में हो सकती है बढ़ोतरी!

Petrol-diesel prices

नई दिल्ली। स्वेज नहर में एक विशालकाय जहाज बीते कई दिनों से फंसा हुआ है। इसे लेकर कहा जा रहा है कि अगर इसे जल्द से जल्द नहीं निकाला गया तो भारत समेत एशिया के कई देशों में क्रूड ऑयल के दाम बढ़ सकते हैं। देश बढ़ते पेट्रोल और डीजल के दाम के बीच यह एक बुरी खबर है। लेकिन ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर इस नहर में ऐसा क्या है कि एक जहाज के फंस जाने से कई मह्तवपूर्ण सामानों की आपूर्ति तक प्रभावित हो सकती है।

Suez Canal crisis

भारत के लिए अहम है ये नहर

दरअसल, ये नहर दुनिया के सबसे ज्यदा व्यस्त शिंपिंग रूट में से एक है। इस नहर से भारत 200 बिलियन डॉलर का आयात-निर्यात करता है। ये आयात-निर्यात अमेरिका, साउथ अमेरिका और यूरोप के देशों के साथ होता है। खासकर इस रास्ते से पेट्रोलियम उत्पाद, ऑर्गेनिक कैमिकल, आयरन एंड स्टील, ऑटोमोबाइल और हैंडिक्राफ्ट संबंधी उत्पाद आयात-निर्यात होता है।

सरकार ने जाम से निपटने के लिए बनाया प्लान

ऐसे में सरकार ने इस जाम से निपटने के लिए चार सूत्रीय प्लान बनाया है। जिसे मिनिष्ट्री ऑफ कॉमर्स की लॉजिस्टिक्स डिविजन की ओर से आयोजित एक बैठक में पेश किया गया। इस प्लान में कार्गो को प्राथमिकता, फ्रेट रेट, पोर्ट्स को सलाह और जहाजों के लिए दूसरा रूट तय करना शामिल है। यानी सरकार पहले प्राथमिकता वाले कार्गो की पहचान कराएगी। इसके बाद इसे निकालने का काम किया जाएगा। स्वेज नहर में लगे इस जाम को लेकर मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स ने चेताया है कि यह संकट जरूर अस्थाई है लेकिन इसका प्रभाव लंबा रह सकता है। जानकार भी मान रहे हैं कि इस जाम से भारत में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

Suez Canal crisis

रोजाना 60 जहाज जाम में फंस रहे हैं

बतादें कि 23 मार्च से फंसे हुए इस जहाज के कारण करीब 200 जहाज स्वेज नहर के दोनों तरफ निकलने को इंतजार कर रहे हैं। जबकि रोजाना दोनों तरफ से करीब 60 जहाज कतार में शामिल हो रहे हैं। वहीं मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि यदि स्वेज नहर को खोलने में दो दिन का समय और लगता है 350 से ज्यादा जहाज जाम में फंस जाएंगे। जबकि एक अनुमान के मुताबिक इस जहाज को निकालने में 1 हफ्ते से ज्यादा का समय लग सकता है।

इस नहर से दुनिया का 12 % कारोबार किया जाता है

गौरतलब है कि इस नहर के इस्तेमाल से एशिया से यूरोप की दूरी कम हो जाती है। यानी अगर स्वेज नहर के रास्ते किसी जहाज को भारत से लंदन जाना हो तो इसकी दूरी 11,482 किलोमीटर होती। जबकि अफ्रीका के रास्ते जाया जाए तो इसके लिए 20,001 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। यही कारण है कि इस नहर के जरिए दुनिया का करीब 12% कारोबार किया जाता है।

Suez Canal crisis

स्वेज नहर की लंबाई 193 किलोमीटर है जबकि इसकी चौड़ाई 200 मीटर। दुनियाभर के करीब 30% मालवाहक जहाज स्वेज नहर से होकर गुजरते हैं। जो जहाज नहर में फंसा है वह करीब 400 मीटर लंबा और 59 मीटर चौड़ा है।

Share This

0 Comments

Leave a Comment

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Lost Password