Advertisment

रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए हाई कोर्ट में नहीं दाखिल हो सकती याचिका : हाईकोर्ट

author-image
Bhasha
देश में रविवार तक कुल 2,24,301 लाभार्थियों को कोविड-19 का टीका लगाया गया: सरकार

लखनऊ, पांच जनवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय (हाईकोर्ट) की लखनऊ खंडपीठ ने अपने एक फैसले में कहा है कि प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफ़आईआर) दर्ज कराने की मांग को लेकर सीधे उच्च न्यायालय में याचिका नहीं दाखिल की जा सकती है।

Advertisment

अदालत ने कहा कि पुलिस द्वारा संज्ञेय अपराध की शिकायत न दर्ज करने पर भी पीड़ित व्यक्ति के पास मजिस्ट्रेट के समक्ष जाने का विकल्प है।

न्‍यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्‍यायमूर्ति चन्द्रधारी सिंह की बेंच ने वसीम हैदर की याचिका पर यह आदेश पारित किया। याचिका में फर्जी बैनामा के एक मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश पुलिस अधिकारियों को देने की मांग की गई थी।

अदालत ने एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिकाओं की बढ़ती संख्या पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता में इस बात का प्रावधान है कि पुलिस अधिकारी द्वारा संज्ञेय अपराध में एफआईआर दर्ज करने से इंकार करने पर किन उपायों को अपनाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि उक्त प्रावधानों में दिये गए उपायों को न अपना कर सीधा हाई कोर्ट में रिट याचिकाएं दाखिल कर दी जा रही हैं। अदालत ने आगे कहा, “एफआईआर दर्ज करने से इनकार होने पर शिकायतकर्ता को स्वतः रिट याचिका इस बात के लिए दाखिल करने का अधिकार नहीं प्राप्त हो जाता है कि अदालत परमादेश जारी करते हुए पुलिस अधिकारी को उसके वैधानिक दायित्व का निर्वहन करने के लिए बाध्य करे।”

Advertisment

अदालत ने कहा कि एक संज्ञेय अपराध में एफआईआर न दर्ज होने की स्थिति में शिकायतकर्ता मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रार्थना पत्र दाखिल कर सकता है।

भाषा सं आनन्‍द प्रशांत

प्रशांत

Advertisment
चैनल से जुड़ें