Apple प्रोडक्ट खरीदने के लिए लोग किडनी बेचने की बात करते हैं , लेकिन क्या किसी ने ऐसा किया है या नहीं?

Apple प्रोडक्ट खरीदने के लिए लोग किडनी बेचने की बात करते हैं , लेकिन क्या किसी ने ऐसा किया है या नहीं?People talk about selling kidney to buy Apple products, but has anyone done this or not? nkp

Apple प्रोडक्ट खरीदने के लिए लोग किडनी बेचने की बात करते हैं , लेकिन क्या किसी ने ऐसा किया है या नहीं?

नई दिल्ली। आपने अक्सर किसी को यह कहते सुना होगा कि अगर मैं Apple का प्रोडक्ट खरीदूंगा तो मुझे अपनी किडनी बेचनी पड़ेगी। आपने कभी सोचा है कि शरीर में इतने सारे अंग होते हैं, लोग किडनी को ही बेचने की बात क्यों नहीं करते? ज्यादातर लोग कहेंगे कि शरीर में दो किडनी होती है, एक किडनी पर इंसान जिंदा रह सकता है। इसलिए लोग किडनी बेचने की बात करते हैं। हां, यह सच है। लेकिन क्या आप जानते हैं किसी ने अभी तक ऐसा किया है या नहीं, यानी किसी ने Apple प्रोडक्ट को खरीदने के लिए अपनी किडनी बेची है या नहीं?

चीन के एक शख्स ने बेच दी थी किडनी

बतादें कि एक शख्स ने ऐसा किया है। चीन के एक टीनएजर ने सालों पहले आइफोन खरीदने के लिए अपनी किडनी बेच दी थी। 'वांग शांगकुन' नामक एक शख्स ने साल 2011 में पहले iPhone 4 और आइपैड 2 खरीदने के लिए अपनी किडनी बेच दी थी, उस वक्त वांग की उम्र 17 साल थी। उसने अवैध सर्जरी करवाकर अपने शरीर की दाहिनी किडनी बेच दी थी। वांग अब जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं और डायलिसिस पर जिंदा हैं। इस घटना के बाद ही लोग Apple प्रोडक्ट को खरीदने की बात पर इसे किडनी से जोड़ देते हैं और सोशल मीडिया पर तरह-तरह के जोक्स और मीम बनाते हैं।

Apple के डिवाइस को हैक करना आसान नहीं है

अब सवाल यह उठता है कि एप्पल के इस उत्पाद में ऐसा क्या है जो इसे इतना महंगा बना देता है? आपको बता दें कि Android के मुकाबले Apple के डिवाइस को हैक करना इतना आसान नहीं है। हर कोई अपनी प्राइवेसी को छुपा के रखना चाहता है। ऐसे लोगों के लिए एप्पल एक महत्वपूर्ण साधन है क्योंकि एप्पल को हैक करना इतना आसान नहीं है जितना आप एंड्रॉयड में कर सकते हैं।

आईफोन का अपना ऑपरेटिंग सिस्टम है

आईफोन में IOS नाम की उनकी अलग ऑपरेटिंग सिस्टम है। जो आईफोन को सुरक्षित और तेज बनाती है और आईफोन एंड्राइड की मात्रा में बहुत ज्यादा तेज होते हैं। दरअसल एंड्राइड सिस्टम गूगल के द्वारा बनाई गई है और यह एक ओपन सोर्स होने के कारण उसे अन्य कंपनियां इस्तेमाल कर सकती है जैसे कि एमआई, विवो, ओप्पो एंड्राइड का उपयोग करती है। परंतु एप्पल में उसका खुद का है ऑपरेटिंग सिस्टम है जो सिर्फ आईफोन में और एप्पल के लैपटॉप में प्रयोग में लिया जाता है।

इसके अलावा और भी कई कारण है जिसके चलते Apple प्रोडक्ट इतने महंगे होते हैं।

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