यहां के लोग श्मशान घाट में मनाते हैं दिवाली, जानिए क्या है मान्यता

यहां के लोग श्मशान घाट में मनाते हैं दिवाली, जानिए क्या है मान्यता People here celebrate Diwali in the crematorium, know what is the belief nkp

यहां के लोग श्मशान घाट में मनाते हैं दिवाली, जानिए क्या है मान्यता

नई दिल्ली। भारत को विविधता का देश कहा जाता है। यहां कई अलग-अलग बोलियां और परंपराएं हैं। इन परंपराओं के अनुसार लोग अलग-अलग तरीके से त्योहार भी मनाते हैं। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के रतलाम में लोग अनोखी दिवाली मनाते हैं। यहां के लोग त्रिवेणी मुक्तिधाम में दिवाली मनाते हैं। ये सुनने में थोड़ा अजीब लग रहा है लेकिन ये सच है। आइए जानते हैं इस अनोखी दिवाली के बारे में।

ऐसे मनाई जाती है दिवाली

दीपावली के अवसर पर रूप चौदस के दिन रतलाम के त्रिवेणी मुक्तिधाम का नजारा देखते ही बनता है। पुरूषों के साथ महिलाएं और बच्चे भी यहां हर्षोल्लास के साथ दिवाली मनाते हैं। दरअसल, इस अनोखी दिवाली की परंपरा शहर की एक प्रेरणा संस्था द्वारा शरू की गई है, इस संस्था के सदस्य हर साल यहां दीपदान करके अपने पूर्वजों को याद करते हैं। इसी के चलते मुख्य दिवाली से एक दिन पूर्व रूप चौदस की शाम को त्रिवेणी मुक्तिधाम का नजारा देखने लायक होता है। यहां जगह जगह लोग रंगोली सजाते हैं। साथ ही सैकड़ों की संख्या में दीपक जलाकर अपने पूर्वजों को याद करते हैं। इस दौरान ढोल-बाजे और आतिशबाजी करते हुए दीपावली मनाई जाती है।

मान्यता क्या है?

मुक्तिधाम में दिवाली मनाने की परंपरा साल 2006 में शुरू की गई थी। प्रेरणा संस्था के लोग बताते हैं कि उन्हें यहां आकर ऐसा आभास होता है कि, वो अपने पूर्वजों के साथ दिवाली मना रहे हैं। शुरूआत में सिर्फ 5 लोगों ने मिलकर श्मशान में दीपदान किया था, लेकिन धीरे-धीरे यहां आने वाले लोगों की संख्या बढ़ती गई। अब बड़े स्तर पर शहर के लोग यहां आते हैं और अपने पूर्वजों के साथ दिवाली मनाते हैं।

मुक्तिधाम में विशेष दिवाली का आयोजन

इस बार त्रिवेणी मुक्तिधाम में विशेष दिवाली का आयोजन किया जा रहा है। क्योंकि कोरोना की दूसरी लहर में कई लोगों ने अपनों को असमय खोया है। ऐसे में प्रेरणा संस्था ने दिवंगत आत्माओं की शांति और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए विशेष व्यवस्था की है।

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