Parliament Winter Session 2021: 12 सांसदों के निलंबन रद्द होने तक प्रतिदिन जारी रहेगा विरोध प्रदर्शन- विपक्षी दल

Parliament Winter Session 2021: 12 सांसदों के निलंबन रद्द होने तक प्रतिदिन जारी रहेगा विरोध प्रदर्शन- विपक्षी दल Parliament Winter Session 2021: Protests will continue daily till suspension of 12 MPs is revoked - Opposition parties

Parliament Winter Session 2021: 12 सांसदों के निलंबन रद्द होने तक प्रतिदिन जारी रहेगा विरोध प्रदर्शन- विपक्षी दल

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में ‘अशोभनीय आचरण’ के लिए निलंबित किए गए 12 सांसदों ने इस कार्रवाई के विरोध में बुधवार को संसद परिसर में धरना दिया और कहा कि वे निलंबन रद्द होने तक प्रतिदिन विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।

संसद के सोमवार को आरंभ हुए शीतकालीन सत्र के पहले दिन राज्यसभा में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के 12 सदस्यों को इस सत्र की शेष अवधि तक के लिए उच्च सदन से निलंबित कर दिया गया था। जिन सदस्यों को निलंबित किया गया है उनमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के इलामारम करीम, कांग्रेस की फूलों देवी नेताम, छाया वर्मा, रिपुन बोरा, राजमणि पटेल, सैयद नासिर हुसैन, अखिलेश प्रताप सिंह, तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन और शांता छेत्री, शिव सेना की प्रियंका चतुर्वेदी और अनिल देसाई तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विनय विस्वम शामिल हैं।

ये सांसद बुधवार को संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठे। उनका कहना है कि जब तक निलंबन रद्द नहीं होगा, तब तक वे संसद की कार्यवाही के दौरान सुबह से शाम तक महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठे रहेंगे।निलंबित सांसदों का समर्थन करते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘‘तानशाही के खिलाफ हम गांधीवादी खड़े हैं। हम झुके नहीं।’’

निलंबित सांसदों में शामिल कांग्रेस नेता सैयद नासिर हुसैन ने कहा, ‘‘हम लोगों को जनता की आवाज उठाने की सजा दी गई है। सरकार की ओर से असंवैधानिक तरीके से निलंबन का प्रस्ताव लाया गया । इसको वापस लिया जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सरकार की ओर से माफी के लिए कहा गया है। माफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता। सदन में जनता की आवाज उठाने के लिए माफी क्यों मांगी जाएगी?’’ निलंबित सांसद और कांग्रेस नेता रिपुन बोरा ने कहा, ‘‘निलंबन का फैसला अलोकतांत्रिक है। सरकार मनमाने ढंग से निलंबन का प्रस्ताव लेकर आई। इस निलंबन को रद्द किया जाना चाहिए। हम निलंबन रद्द होने तक अपना धरना जारी रखेंगे।’’

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