Parliament Attack: पता नहीं क्या होता उस दिन अगर आतंकियों की कार उपराष्ट्रपति की गाड़ी से नहीं टकराती! जानिए संसद भवन हमले की पूरी कहानी

Parliament attack

Parliament attack: 13 दिसंबर 2001 यानी आज से ठीक 20 साल पहले पाकिस्तान से आए पांच आतंकियों ने लोकतंत्र के मंदिर यानी संसद भवन पर हमला किया था। इस हमले में देश के 9 वीर सपूत शहीद हो गए थे। देश आज संसद भवन हमले Parliament attack के 20वीं बरसी पर उन्हें याद कर रहा है। अगर ये सपूत उस वक्त इन दहशतगर्दों से डटकर मुकाबला नहीं करते तो पता नहीं क्या होता? क्योंकि आतंकी संसद भवन के अंदर घुसना चाहते थे। लेकिन ये जवान उनके मसूबों को बाहर ही नाकाम कर दिया था।

मेन गेट पर चकमा देने में कामयाब हो गए थे

बता दें कि उस वक्त देश में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी और संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा था। तभी सफेद रंग की एक एम्बेसडर कार संसद भवन में घुसने की कोशिश करता है। मेन गेट पर सुरक्षाकर्मियों को लगता कि ये कोई सांसद की ही कार है। क्योंकि एम्बेसडर पर एक VVIP पास भी लगा हुआ था। मेन गेट से अंदर घुसने में पांचो दहशतगर्द कामयाब हो जाते हैं।

अंदर की जानकारी नहीं थी

लेकिन संसद भवन के अंदर की जानकारी नहीं होने की वजह से ये सही गेट तक नहीं पहुंच पाते हैं। बंद गेट को देखकर उन्हें समझ में आ जाता है कि वो गलत दिशा में आ गए हैं। इसके बाद वे तेजी से अपनी एम्बेसडर कार को मोड़ते हैं। हड़बड़ी में उनकी कार उपराष्ट्रपति के काफिले से टकरा जाती है। यहीं से सुरक्षाकर्मियों को आतंकियों पर शक हो जाता है।

हमले के वक्त कई सांसद और मंदी मौजूद थे

सरक्षाकर्मी ज्यादा कुछ समझ पाते उससे पहले ही कार से कूद कर आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमले के तुरंत बाद संसद भवन की सुरक्षा में तैनात CRPF के जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू की। जिस वक्त आतंकियों ने संसद भवन पर हमला किया था, उस वक्त सदन में कई सांसद और मंत्री मौजूद थे। तत्कालीन गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी भी संसद परिसर में ही मौजूद थे। हमले के बाद संसद भवन के सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें एक सुरक्षित कमरे में भेजकर मोर्चा संभाल लिया। संसद भवन के सभी गेट को अंदर से बंद कर दिया गया और नेताओं को सेंट्रल हॉल में ले जाकर बंद कर दिया गया। बाहर सुरक्षाकर्मी आंतकियों से निपट रहे थे।

निशाने पर थे नेता और मंत्री

आतंकी अपने प्लान के तहत संसद भवन में घुसकर नेताओं और मंत्रियों को निशाना बनाना चाहते थे। लेकिन सुरक्षाबलों की मुस्तैदी की वजह से वो नाकाम हो गए और कुछ देर में वहीं मार गिराए गए। हालांकि, इस हमले में देश ने 9 वीर जवानों को खो दिया था। ये जवान थे जे पी यादव, मतबर सिंह, कमलेश कुमारी, नानक चंद, रामपाल, ओमप्रकाश, घनश्याम, बिजेन्दर सिंह और देशराज । इस हमले में न्यूज एजेंसी ANI के कैमरामैन विक्रम सिंह बिष्ट की भी मौत हो गई थी।

हमले का मास्टराइंड अफजल गुरू था

बाद में जांच में पता चला कि इस आंतकी हमले का मास्टरमाइंड अफजल गुरू (Afzal Guru) था जो पाक अधिकृत कश्मीर (POK) के मुजफ्फराबाद में आईएसआई के कैंप में ट्रेनिंग भी ले चुका था। उसे ये काम जैश-ए-मोहम्मद के गाजी बाबा ने सौंपा था। मारे गए पांचों आतंकी पाकिस्तानी थे। हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरू को सुप्रीम कोर्ट ने दोषी माना था और उसे फांसी की सजा सुनाई गई थी। अफजल गुरु को 9 फरवरी 2013 को दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई।

 

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