Paralympics 2024: भारत को मिला 1 और सिल्वर, सचिन सरजेराव ने गोला फेंक में दिलाया मेडल, 21 हुई पदकों की संख्‍या

Paralympics 2024: पेरिस पैरालंपिक में भारत के लिए 7वें दिन की शुरुआत सिल्वर मेडल के साथ हुई है। 4 सितंबर को भारतीय एथलीट सचिन सरजेराव

Paralympics 2024

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Paralympics 2024: पेरिस पैरालंपिक में भारत के लिए 7वें दिन की शुरुआत सिल्वर मेडल के साथ हुई है। 4 सितंबर को भारतीय एथलीट सचिन सरजेराव ने पुरुषों की F46 गोला फेंक इवेंट में सिल्‍वर मेडल पर जीत पाई है। सचिन ने 16.32 मीटर तक गोला फेंक कर रजत पदक हासिल किया है। आपको बता दें कि सरजेराव केवल 0.06 मीटर की दूरी से गोल्ड मेडल जीतने से रह गए।

गोल्ड मेडलिस्ट रह चुकें हैं सचिन

गोला फेंक के फाइनल में सचिन का पहला प्रयास 14.72 मीटर, दूसरा प्रयास 16.32 मीटर, तीसरा प्रयास 16.15 मीटर, चौथा प्रयास 16.31 मीटर, पांचवां प्रयास 16.03 मीटर और छठा (आखिरी) प्रयास 15.95 मीटर का रहा। उन्होंने 16.32 मीटर के थ्रो के साथ एरिया रिकॉर्ड भी बनाया।

यह भारत का पेरिस पैरालंपिक 2024 में 21वां पदक रहा है। सचिन ने 2023 विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पुरुषों की शॉट पुट एफ46 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने 16.21 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ पदक अपने नाम किया था। उन्होंने 2024 विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी भाग लिया था। इसमें उन्होंने गोल्‍ड मेडल जीता था।

यासेर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास 14.21 मीटर का और रोहित का सर्वश्रेष्ठ प्रयास 14.10 मीटर का रहा। पैरा एथलेटिक्स स्पर्धाओं में एफ46 श्रेणी उन लोगों के लिए है जिनकी एक या दोनों हाथों की गतिविधि मामूली रूप से प्रभावित है या जिनके हाथ-पैर नहीं हैं। इन एथलीटों को कूल्हों और पैरों की ताकत से थ्रो करना होता है।

स्‍कूली दिनों में हो गई थी दुर्घटना

आपको बता दें कि सचिन महाराष्ट्र के सांगली जिले के रहने वाले है। सचिन स्कूली दिनों में एक दुर्घटना का शिकार हो गए थे, जिससे इन्‍होंने अपनी कोहनी की मांसपेशियां गंवा दी थी। डॉक्‍टरों को दिखाने और कई सर्जरी के बाद भी वह ठीक नहीं हो पाए।

सचिन बताते हैं कि उनका इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं रहा है। उन्हें काफी संघर्षों का भी सामना करना पड़ा है। सचिन की जिंदगी तब खराब हो गई जब 9 साल की उम्र में साइकिल से फिसलने के कारण उसका बायां हाथ टूट गया।

हाथ में काम करना बंद किया, लेकिन सचिन के हौसले बुलंद रहे। इसे ठीक होने में काफी वक्त लगा था। हालांकि, जब उनका फ्रैक्चर ठीक हुआ तो उन्हें एक अन्य बीमारी गैंगरीन से जूझना पड़ा। इससे उनका बायां हाथ चलना बंद हो गया।

हालांकि, इसके बावजूद सचिन ने हार नहीं मानी और इंजीनियरिंग के लिए पढ़ाई करते समय जैवलिन थ्रो में हिस्सा लेना जारी रखा। किसी प्रतियोगिता के दौरान कंधे में चोट की वजह से उन्हें जैवलिन थ्रो से खुद को हटाकर गोला फेंक में आना पड़ा।

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