Panchak: जनवरी में दो बार फिरकी मारेंगे पंचक, जानें कब से कब तक चलेंगे पंचक, दो बार आने से क्या होता है असर

Panchak: जनवरी में दो बार फिरकी मारेंगे पंचक, जानें कब से कब तक चलेंगे पंचक, दो बार आने पर क्या होता है

Panchak-jan 2025

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Panchak Jan 2025 Start End Date: हिन्दू धर्म में पंचकों का अपना महत्व होता है। नया साल 2025 शुरू हो गया है। तो ऐसे में शुभ कामों के लिए व​र्जित माने जाने वाले पंचक भी बहुत जल्द शुरू होने वाले हैं।

सबसे खास बात ये है कि इस बार जनवरी में दो बार पंचक आएंगे। आखिर पंचक होते क्या हैं, जनवरी में पंचक कब से कब तक (Jan me Panchak kab se hai) रहेंगे, जनवरी में कौन से पंचक आएंगे, पंचकों कैसे बनते हैं और उनका असर क्या होता है, जानते हैं ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री से।

आखिर पंचक होते क्या हैं (What is Panchak) 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नक्षत्र कई तरह के होते हैं। जिनमें से कुछ शुभ और कुछ अशुभ होते हैं। जो अशुभ नक्षत्र होते हैं उनमें शुभ काम करना वर्जित होता है। ज्योतिषीय गणना में जब धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद एवं रेवती समेत पांच नक्षत्र (Panchak Nakshatra) एक साथ आते हैं तो इसकी युति यानी इन सभी का एकसाथ होता अशुभ माना जाता है। नक्षत्रों की इस स्थिति को ही पंचक कहते हैं।

क्या होता है पंचक 

ज्योतिष के अनुसार कुंभ (Kumbh Rashi) और मीन राशि (Meen Rashi) में चंद्रमा के गोचर को पंचक कहते हैं।

जनवरी में पंचक कब से हैं (jan panchak date) 

ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार इस महीने 3 जनवरी शुक्रवार को सुबह 11:53 से शुरू हो जाएंगे। जो 7 जनवरी की शाम 5:44 बजे तक रहेंगे।

जनवरी में दोबारा पंचक कब से हैं

जनवरी में पहले पंचक 3 जनवरी से हैं। इसके बाद दूसरी बार पंचक 30 जनवरी की रात 7:46 से शुरू होगी। जो 3 फरवरी की रात 1:47 तक रहेंगे।

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जनवरी में दो बार क्यों आएंगे पंचक

ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार 27 दिन में नक्षत्र में रिपीट होते हैं। जनवरी में 31 दिन होते हैं। ऐसे में इस बार पंचक रिपीट हो रहे हैं। हालांकि एक महीनें में दो बार पंचकों का आना कोई अलग संयोग नहीं है न ही इससे कोई ज्यादा प्रभाव पड़ता है।

कितने दिन में रिपीट होते हैं पंचक

विशेषज्ञों की मानें तो पंचक 23 दिन में रिपीट होते हैं।

पंचक कब शुरू होते हैं

हिन्दू धर्म और ज्योतिष के अनुसार पंचांग में जब धनिष्ठा नक्षत्र आधा निकल जाता यानी धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण से पंचकों की शुरुआत होती है और इसकी समाप्ति रेवती नक्षत्र पर होती है। साढ़े चार नक्षत्र मिलाकर एक पंचक का निर्माण करते हैं। इसमें

पंचक में कितने नक्षत्र होते हैं

विशेषज्ञों के अनुसार पंचकों में आधा नक्षत्र धनिष्ठा, सतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र शामिल होते हैं।

जनवरी में कौन से पंचक आएंगे

इस बार जनवरी में चोर पंचक शुरू होंगे। चूंकि जो पंचक शुक्रवार से शुरू होते हैं इसलिए उन्हें चोर पंचक कहते हैं।

पंचक कितने तरह के होते हैं (Type of Panchak)

पंचकों मुख्य रूप से पांच तरह के होते है। ​इसमें रोग पंचक, राज पंचक, अग्नि पंचक, चोर पंचक, मृत्यु पंचक शामिल हैं।

पंचक कितने तरह के होते हैं (Type of Panchak)

पंचकों मुख्य रूप से पांच तरह के होते है। ​इसमें रोग पंचक, राज पंचक, अग्नि पंचक, चोर पंचक, मृत्यु पंचक शामिल हैं।

क्या होते हैं रोग पंचक (Rog Panchak) 

यदि पंचक रविवार को पड़े तो उसे रोग पंचक कहा जाता है।

क्या होते हैं राज पंचक (Raj Panchak) 

जब पंचक सोमवार को पड़े तो इसे राज पंचक (Raj Panchak) कहते हैं।

क्या होते हैं अग्नि पंचक (Agni Panchak) 

जब पंचक मंगलवार को पड़े तो इसे अग्नि पंचक (Agni Panchak) कहते हैं।

क्या होते हैं चोर पंचक (Chor Panchak) 

जब पंचक शुक्रवार को पड़े तो इसे चोर पंचक (Chor Panchak) कहते हैं।

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क्या होते हैं मृत्यु पंचक

जब पंचक शनिवार के दिन पड़े तो इसे मृत्यु पंचक (Mrityu Panchak) कहते हैं। बुधवार और गुरुवार को पड़ने वाले पंचकों को सोमवार और मंगलवार के पंचक के समान माना जाता है।

पंचक में क्या नहीं करना चाहिए

ऐसा माना जाता है पंचकों में कोई भी शुभ काम नहीं करना (Panchak me Kya nahi Karna Chahiye) चाहिए। पंचक में लकड़ी या लकड़ी का सामान घर नहीं लाना चाहिए। इस दौरान चारपाई बुनवाना भी वर्जित माना गया है। इस दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा करना वर्जित है। साथ ही घर को भी इस दौरान रंगरोगन और पेंट नहीं कराना चाहिए।

पंचकों में लकड़ी क्यों इकट्ठी नहीं करना चाहिए

ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार पंचकों में लकड़ी इकट्ठी नहीं करना चाहिए। ऐसा आपके परिवार के लिए अशुभ असर डाल सकता है।

नोट:  इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य सूचनाओं पर आधारित है। बंसल न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करता। अमल में लाने से पहले से विशेषज्ञ की सलाह ले लें।

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