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बैठे-बैठे पैर हिलाने वाले हो जाएं सावधान! जानें पैर हिलाने के नुकसान!

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Preeti Dwivedi
बैठे-बैठे पैर हिलाने वाले हो जाएं सावधान! जानें पैर हिलाने के नुकसान!

Pair Hilane ke Nuksan: आपने लोगों को अक्सर घर पर बैठे-बैठे पैर हिलाते देखा होगा। पर क्या आपने कभी सोचा है कि वे ऐसा क्यों करते हैं। ये एक बीमारी है या इसका धर्म से कोई संबंध है। यदि नहीं तो चलिए जानते हैं, कि आखिर बैठे-बैठे पैर हिलाने के नुकसान क्या है। इसे छुड़ाने के उपाय क्या हैं।

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Pair Hilane ke Nuksan

बदलती लाइफ स्टाइल (Life Style) में व्यक्ति के जीवन में कई ऐसी गलतियां होती हैं जो उसके जीवन में आर्थिक तंगी, सुख वैभव, धन दौलत की कमी के लिए कारक बनती हैं। इन्हीं में से एक है बैठे-बैठे पैर हिलाना।

अगर आप भी बैठे-बैठै पैर हिलाते हैं तो सावधान हो जाएं, क्योंकि इसके परिणाम (Pair Hilane ke Nuksan) बेहद गंभीर हो सकते हैं। जानते हैं इसके पीछे का कारण।

 Pair Hilane ke Nuksan

   बार-बार पैर हिलाने का मन क्यों करता है?

व्यक्ति के पैर हिलाने के पीछे मेडिकल साइंस भी है। दरअसल हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो जब भी व्यक्ति बार-बार पैर हिलाता है तो उसका ऐसा बार-बार करने का मन करता है। इसके पीछे एक हॉर्मोन काम करता है। पैर हिलाने पर हमारी बॉडी में डोपामाइन हॉर्मोन (Dopamine Hormone) निकलता है। जिसके चलते उसे बार-बार उस काम को करने का मन करता है।

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    पैर हिलाना किस बीमारी का संकेत

पैर हिलाने के ज्योतिषीय कारण तो हैं ही साथ ही साथ इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण भी सामने आए हैं। मेडिकल साइंस (Medicin Science) में पैर हिलाना कई गंभीर बीमारियों का संकेत होता है। ये आपके शरीर में हार्ट (Heart) , किडनी (Kidney) , पार्किंसंस से संबंधित समस्या बढ़ जाती हैं।

    हो सकती हैं ये बीमारियां

पैर हिलाना ज्योतिष में ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण में भी गलत माना गया है। आपको बता दें कि मेडिकल साइंस में पैर हिलाने की आदत को रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (restless legs syndrome) बताया गया है और यह एक गंभीर बीमारी है। जिसकी वजह से हार्ट, किडनी, पार्किंसंस से संबंधित समस्या बढ़ जाती हैं। इसलिए पैर हिलाने की आदत को आपको तुरंत छोड़ देना चाहिए।

      Pair Hilane ke Nuksan

      क्या होता है रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम 

दरअसल रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (RLS) एक नर्वस सिस्टम से जुड़ी समस्या है। इसे पैर हिलाने की बीमारी भी कहा जा सकता है। जिसके कारण व्यक्ति को उठने, चलने या चलने की इच्छा महसूस होती है। ऐसे में जब तक आप अपने पैर नहीं हिलाते हैं तो इस स्थिति में आप असहज महसूस करते हैं।

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इसके बाद जब आप पैर हिलाते हैं तो आपको थोड़ी देर के लिए रिलेक्स फील होता है। रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (Restless Legs Syndrome) एक तरह का विकार है। इसे विलिस-एकबॉम रोग (RLS/DED) के नाम से भी जाना जाता है।

    स्लीप डिसऑर्डर भी हो सकता है पैर हिलाने का कारण

विशेषज्ञों के अनुसार बार-बार पैर हिलाने की समस्या को स्लीप डिसआर्डर (Sleep Disorder) से जोड़कर भी देखा जाता है। चिकित्सकों की मानें तो नींद पूरी न होने पर इंसान को थकावट महसूस होती है और वह बार-बार ऐसा करता है। इसलिए यदि आप भी ऐसा करते हैं तो आपको बिना देरी करे अपना ब्लड टेस्ट (Blood Test) कराना चाहिए।

    रेस्टलेस सिंड्रोम नर्वस सिस्टम

रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 10 फीसदी लोगों में पैर हिलाने की समस्या होती है। ये 35 साल से अधिक ऐज के लोगों ज्यादा होती है। इसे रेस्टलेस सिंड्रोम नर्वस (restless legs syndrome) सिस्टम से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि पैर हिलाते रहने के और भी कारण हो सकते हैं। ऐसे में सलाह दी जाती है कि एक्सपर्ट से मिलकर इस बारे में बात करके निर्णय लिया जाए।

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 किन लोगों में पैर हिलाने की समस्या अधिक होती है

आरएलएस की समस्या कुछ विशेष लोगों में होने की आशंका अधिक होती है इनमें ये लोग शामिल हैं।

‍ क्रोनिक किडनी डिसीज (chronic kidney disease)

‍ आयरन, मैग्नीशियम या फोलिक एसिड की कमी

‍ एनीमिया (अक्सर आयरन की कमी के कारण)

‍ पार्किंसंस रोग (पार्किंसन रोग, दिमाग के खास हिस्सों का धीमा करने और खराबी लाने वाली बीमारी है।)

‍ परिधीय न्यूरोपैथी (Peripheral neuropathy) : परिधीय न्यूरोपैथी तब होती है जब तंत्रिका समस्या मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के बाहर नसों को प्रभावित करती है। ये नसें या तंत्रिका परिधीय तंत्रिका तंत्र का हिस्सा हैं।

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‍ मल्टीपल स्क्लेरोसिस: जब हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली माइलिन (तंत्रिका कोशिकाओं के आसपास की परत) पर अटैक करने लगती है। इस बाहरी आवरण के बिना, आपकी नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं जिससे दिमाग और आपके शरीर के बाकी हिस्सों के बीच संचार की समस्याएं पैदा होने लगती हैं।

    पैर हिलाने के नुकसान

Pair Hilane ke Nuksan

स्वस्थ लाइफ जीने के तरीकों में (healthy way of living) पैर हिलाने की आदत को रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम कहते हैं। पैर हिलाने की आदत के कई नुकसान (Pair Hilane ke Nuksan) होते हैं.  इससे हार्ट, किडनी की समस्या बढ़ जाती है। दिल का दौरा पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए इस आदत को तुरंत छोड़ देना चाहिए।

    रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम का कारण क्या है

रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (Eestless Legs Eyndrome) के मुख्य कारणों को लेकर कुछ कहा नहीं जा सकता है। हालांकि इसके पीछे विशेषज्ञ डोपामाइन का उपयोग करने के तरीके में किसी समस्या के कारण हो सकता है। दरअसल डोपामाइन मस्तिष्क कोशिकाओं से निकलने वाला एक मस्तिष्क रसायन होता है। ये डोपामाइन मांसपेशियों की गति में मदद करता है।

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   क्या होता है डोपामाइन

कोई नहीं जानता कि आरएलएस (RSL) का कारण क्या है। यह मस्तिष्क कोशिकाओं द्वारा डोपामाइन का उपयोग करने के तरीके में किसी समस्या के कारण हो सकता है। डोपामाइन एक मस्तिष्क रसायन है जो मांसपेशियों की गति में मदद करता है।

   पड़ सकता है निगेटिव सोशल इफेक्ट

पैर हिलाने की समस्या आपके कैरियर को भी चौपट कर सकती है। हो सकता है आप जॉब इंटरव्यू के लिए जाएं और आपकी बैठे-बैठे पैर हिलाने की आदत आपके इंटरव्यू लेने वाले को पसंद न आए और वो आपको जॉब देने से इंकार कर दे।

Pair Hilane ke Nuksan

    कैसे छुड़ाएं पैर हिलाने की आदत? 

पैर हिलाने की बीमारी छुड़ाने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि आप पूरी नींद लें। इसके अलावा आपको फिजिकल एक्टिविटीज और स्ट्रेचिंग वाले व्यायाम करना शुरु करना होगा। कैफीन और निकोटीन के सेवन को बंद करें। पैरों की मांसपेशियों को आराम देने के लिए आपको मालिश का सहारा लेना होगा। गर्म पानी से नहाना, हीटिंग पैड या आइस पैक से सिकाई करें।

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   पैर हिलाने का धार्मिक पक्ष

ज्योतिषाचार्य पंडित राम गोविंद शास्त्री के अनुसार बैठे-बैठे पैर हिलाने से जातक की कुंडली में चंद्रमा की स्थिति (Kundli me Chandrama) अशुभ होती है। यानी आपके जीवन में चंद्रमा का प्रभाव प्रतिकूल पड़ने लगता है। चंद्रमा का संबंध मन से होता है। यानी अगर चंद्रमा अशुभ होगा। तो इससे आपकी मानसिक परेशानियां बढ़ने लगती हैं। साथ ही ऐसे जातकों का पैसा बीमारियों में अधिक खर्च होने लगता है।

   पूजा करते समय पैर हिलाने से क्या होता है

अगर आप पूजा करते समय पैर हिलाते हैं तो आपकी पूजा सफल नहीं मानी जाती। ऐसा करने पर वास्तु देव नाराज हो जाते हैं। साथ ही आपको मानसिक और शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

   बैठे-बैठे पैर हिलाना क्यों होता है अशुभ

आपने अक्सर देखा होगा जब भी कोई पैर बैठे-बैठे पैर हिलाते हैं, तो इस दौरान घर के बुजुर्ग टोक दिया करते हैं। उनके अनुसार पैर हिलाना अशुभ माना जाता है। ज्योतिष (Jyotish)  में पैर हिलाने का सीधा संबंध मां लक्ष्मी से जुड़ा है। यदि आप बैठे-बैठे पैर हिलाते हैं तो इससे आपके सुख में कमी आती है और आप आर्थिक परेशानी झेलते हैं।

  पड़ता है चंद्र का अशुभ प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। साथ ही इसका संबंध मन और माता से होता है। चंद्रमा की स्वामी राशि कर्क (Kark Rashi) है। इसलिए पैर हिलाने वाले व्यक्ति को चंद्र का असर (Chandra ka Asar) होता है।

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