पैकेट वाला दूध हो सकता है नुकसानदायक: बाजार में बिकने वाले पैकेज्ड दूध को उबालने से पहले जरूर जान लें ये बात

What is Pasteurization: उबला हुआ दूध हो सकता है नुकसानदायक: दूध के पैकेट पर लगा लेबल देता है ये संकेत, जानें कैसे करें पता

पैकेट वाला दूध हो सकता है नुकसानदायक: बाजार में बिकने वाले पैकेज्ड दूध को उबालने से पहले जरूर जान लें ये बात

What is Pasteurization

What is Pasteurization: पास्चराइजेशन दूध को एक खास तापमान पर गर्म करने की प्रक्रिया है, जिससे दूध में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और माइक्रो ओर्गनिस्म को ख़त्म करना है।

इस प्रक्रिया के दौरान, दूध को लगभग 60°C से 72°C तापमान पर 15-30 सेकंड तक गर्म किया जाता है और फिर तुरंत ठंडा किया जाता है।

इस प्रक्रिया से दूध का स्वाद, पोषण और उसकी शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है। लेकिन 90 प्रतिशत लोगों को नहीं पता होता है कि ये दूध सेहत के लिए नुकसानदायक होता है।

दूध पर लिखी होती है लाइन

अगर आप बाज़ार से दूध का पैकेट खरीद कर इस्तेमाल करते हैं तो पहचान सकते हैं कि आपको दूध को ज्यादा उबालना है या नहीं। जब भी आप दूध का पैकेट खरीदते है तो आपको पैकेट के पीछे लिखा हुआ दिखेगा "Pasteurised Toned Milk"।

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इसका मतलब है कि दूध एक टेम्प्रेचर पर उबला हुआ है. अब सिर्फ इसे गुनगुना करके इस्तेमाल करना है। लेकिन क्या आप जानतें हैं कि पास्चराइजेशन दूध को सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया है, इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं।

पास्चराइजेशन दूध के नुकसान

पोषक तत्वों कम करते हैं: दूध को गर्म करने से इसमें मौजूद कुछ जरूरी पोषक तत्व, जैसे विटामिन C, B12 और फोलिक एसिड की मात्रा कम हो जाती है। ये पोषक तत्व स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, जो पास्चराइजेशन के दौरान कम हो सकते हैं।

एंजाइम का नष्ट होना: पास्चराइजेशन के दौरान दूध में प्राकृतिक तरीके  से पाए जाने वाले कुछ एंजाइम नष्ट हो जाते हैं, जो पाचन प्रक्रिया में सहायक होते हैं। इससे दूध का पाचन कुछ लोगों के लिए कठिन हो सकता है।

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प्रोबायोटिक बैक्टीरिया का नुकसान: कच्चे दूध में कुछ अच्छे (What is Pasteurization) बैक्टीरिया होते हैं जो आंतों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। पास्चराइजेशन के दौरान ये बैक्टीरिया भी मर जाते हैं, जिससे दूध में प्रोबायोटिक गुण कम हो जाते हैं।

एलर्जी और पाचन संबंधी समस्याएँ: कुछ लोगों को पास्चराइजेशन दूध से एलर्जी हो सकती है, क्योंकि इसमें मौजूद कुछ प्रोटीन गर्मी के कारण बदल जाते हैं। यह समस्या विशेष रूप से उन लोगों में देखी जा सकती है, जिन्हें दूध से एलर्जी होती है।

दूध को उबालना ज़रूरी है? 

दूध जल्दी खराब होने वाला उत्पाद है और अगर इसे 8 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर न रखा जाए तो यह खराब हो जाता है। इसलिए माइक्रोबायोलॉजिकल कंटैमिनेशन को रोकने के लिए इसे (What is Pasteurization) पीने से पहले उबालना चाहिए।

दूध को दो मिनट तक उबालने से उपभोक्ता को ज़रूरी सुरक्षा मिलती है। हालाँकि, दूध को लगातार हिलाना ज़रूरी है, खास तौर पर उबलते तापमान पर, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बनने वाला झाग उबलते तापमान के संपर्क में आए।

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बहुत से लोग एक ही दूध को बार-बार गर्म करते हैं और वह भी लंबे समय तक उच्च तापमान पर, जिससे पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कम गर्म करने पर दूध अपने पोषक तत्वों को बरकरार रखता है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि दूध को दो बार से ज़्यादा नहीं उबालना चाहिए और 2 से 3 मिनट से ज़्यादा नहीं उबालना चाहिए।

दूध उबालने के टिप्स

दूध को बहुत देर तक न उबालें।

उबालने के बाद दूध को खुले में न छोड़ें; इसे तुरंत फ्रिज में रख दें।

दूध को बार-बार गर्म न करें।

उबालते समय दूध को हिलाते रहें।

दूध को गर्म करने और फिर से गर्म करने के लिए माइक्रोवेव ओवन का इस्तेमाल न करें।

टेट्रा पैक में आने वाले अल्ट्रा-हाई-टेम्परेचर दूध का इस्तेमाल करें। यह पोषण और सुविधा दोनों की गारंटी देता है।

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