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भोपाल के सेल्टर हाउस में दम तोड़ रहीं गाय: 80 की क्षमता वाली जगह में 150 गाय, अव्यवस्था पर नहीं शासन-प्रशासन का ध्यान

MP News: मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव गौवंश को लेकर आए दिन बयान देते रहते हैं. गौवंश को लेकर बयानों में संवेदनशील दिखने वाली एमपी सरकार जमीनी हालात नहीं सुधार पा रही है.

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Rohit Sahu
भोपाल के सेल्टर हाउस में दम तोड़ रहीं गाय: 80 की क्षमता वाली जगह में 150 गाय, अव्यवस्था पर नहीं शासन-प्रशासन का ध्यान

MP News: मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव गौवंश को लेकर आए दिन बयान देते रहते हैं. गौवंश को लेकर बयानों में संवेदनशील दिखने वाली एमपी सरकार जमीनी हालात नहीं सुधार पा रही है. ऐसा ही राजधानी भोपाल में घायल और बीमार आवारा पशुओं के लिए संचालित पशु विभाग के आश्रय स्थल से सामने आया है. जहां लापरवाही के कारण  गायों की दुर्दशा हुई है. यहां पर 80 की क्षमता है, लेकिन 150 बीमार और घायल गौवंश को रखा जा रहा है. खास बात यह है कि घायल गायों के लिए 20 साल से संचालित इस आश्रय में कोई पशु चिकित्सक का पद स्वीकृत नहीं है.

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24 घंटे में एक बार सुबह उठाते हैं मृत गाय का शव

मृत पशुओं के शव 24 घंटे में केवल एक बार सुबह उठाए जाते हैं. उसके बाद बीमार पशु मृत जानवरों के साथ ही दिन और रात गुजारते हैं. यह सब तब है जबकि प्रदेश सरकार गौवंश को लेकर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है और गौवंश के लिए बजट में राशि बढ़ाने की बात करती है.

आश्रय स्थल में कोई डॉक्टर तैनात नहीं

पशुओं के इस आश्रय स्थल में क्षमता से ज्यादा पशु हैं. ऊपर से वहां कोई परमानेंट पशु चिकित्सक नहीं है. एक पशु चिकित्सक के जिम्मे सौ से ढाई सौ बीमार और घायल गौवंश और कुत्ते हैं.  जबकि यहां पर एक नोडल अधिकारी, तीन डॉक्टर, तीन कपाउंडर और आठ सफाई कर्मचारी कि जगह है. डॉक्टरों के तीनों पद खाली पड़े हैं. रात के समय इनकी देखभाल के लिए कोई नहीं रहता है. मतलब रात में पशुओं का इमरजेंसी इलाज कराने के लिए कोई जिम्मेदार यहां नहीं हैं.

शनिवार को 15 गायों की हुई मौत

शनिवार रात को आश्रय स्थल में करीब 15 गौवंश की मौत हुई. जिसका किसी ने वीडियो बनाकर वायरल कर दिया. इसके साथ ही वहां साफ सफाई की भी समस्या है. वहां आए पशु गंदे हॉल में बैठे रहते हैं. पशुओं की संख्या ज्यादा होने और स्टॉफ की कमी के चलते वहां साफ सफाई सही से नहीं होती. वीडियो सामने आया तब जाकर आश्रय स्थल की अव्यवस्था की पोल खुली. पशुपालन और भोपाल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं.

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 2004 से चल रहा आश्रय स्थल

भोपाल में पशु आश्रय स्थल की शुरुआत 2004 में हुई थी. माता मंदिर स्थित इस आश्रय स्थल को 2010 में जहांगीराबाद शिफ्ट किया गया था. इसका उद्देश्य आवारा पशुओं के घायल और बीमार होने पर उनको इलाज उपलब्ध कराना है. जब इस मामले में अधिकारियों से बात की तो उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में रात में भी डॉक्टर आ जाते हैं. आश्रय स्थल की इंचार्ज डॉ. सुनीता शरण ने कहा कि हमारे पास गौशाला, शहर के आवारा और कांजी हाउस के बीमार और घायल पशुओं को इलाज के लिए लाया जाता है. सुबह 8 बजे से रात 11 बजे तक स्टाफ आश्रय स्थल पर उपलब्ध रहता है.

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मामले को बीजेपी विधायक भगवान दास सबनानी ने कहा कि हम गौवंश के लिए  हमारी सरकार गायों के प्रति संवेदनशील है. सरकार ने गायों के लिए बजट भी बढ़ाया है. जब ऐसे मामले आते है तो दु:ख होता है. इसको लेकर कड़े कदम उठाए जाएंगे.

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