Oxygen stocks: खपत से ज्यादा प्रोडक्शन, जानिए फिर भी अस्पतालों में ऑक्सीजन की क्यों हो रही है किल्लत

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नई दिल्ली। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच देश में ऑक्सीजन की डिमांड तेजी से बढ़ गई है। कई राज्यों ने तो किल्लत की बात स्वीकार भी की है। दिल्ली सरकार ने तो यहां तक कहा कि उसके यहां कुछ ही घंटे की ऑक्सीजन बची है। जबकि दूसरे राज्यों से भी ऑक्सीजन सिलेंडर की किल्लत की खबरें सामने आ रही है। ऐसे में, यह जानना जरूरी है कि क्या वास्तव में देश में ऑक्सीजन की कमी है।

खपत से लगभग दोगुना प्रोडक्शन

ऑक्सीजन को लेकर केंद्र सरकार के आंकड़ों को देखें तो इस वक्त देश में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। सारे प्लांट पूरी क्षमता से ऑक्सीजन का प्रोडक्शन कर रहे हैं। 12 अप्रैल को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक देश में रोजाना 3842 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की खपत है। जबकि प्लांट में रोजाना 7287 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का प्रोडक्शन हो रहा है। यानी जितना प्रोडक्शन हो रहा है उसके मुकाबले 54 फीसदी ऑक्सीजन की ही खपत हो रही है। सरकार की मानें तो 12 अप्रैल तक 50,000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का स्टॉक था। इसमें मेडिकल और इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन दोनों शामिल थे। अब सरकार ने इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन पर रोक भी लगा दी है, तो फिर किल्लत की वजह क्या है?

सप्लाई के कारण हो रही है दिक्कत

दरअसल, देश में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। लेकिन तेजी से बढ़ती मांग के कारण ऑक्सीजन की सप्लाई में भारी दिक्कत हो रही है। पूरे देश में जिस लिक्विड ऑक्सीजन को डिस्ट्रीब्यूट किया जाता है। उसे पहुंचाने के लिए क्राइजोनिक टैंकर कम पड़ रहे हैं। साथ ही रिफिलिंग के लिए भी सिलेंडर की भारी किल्लत है। देश में इस वक्त करीब 2000 क्राइजोनिक टैंकर हैं। जो कोरोना की दूसरी लहर से पहले पर्याप्त थे। लेकिन अब ऑक्सीजन की इतनी मांग बढ़ गई है कि ये टैंकर भी कम पड़ने लगे हैं।

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