Datia News: दतिया में गिरी 400 साल पुराने किले की दीवार, 7 लोगों की गई जान, 5 एक ही परिवार के, घंटों चला रेस्क्‍यू

Datia Fort Wall Collapse: दतिया में राजगढ़ किले की बाहरी दीवार गिरने से 9 लोग मलबे में दब गए हैं। आसपास के लोगों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 2

Datia fort wall collapse

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Datia Fort Wall Collapse: दतिया में राजगढ़ किले की बाहरी दीवार गिरने से 9 लोग मलबे में दब गए थे। आसपास के लोगों ने तुरंत मद्द करते हुए 2 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। अभी तक घटनास्थल पर पहुंची रेस्क्यू टीम ने 7 शव बरामद किए हैं। आपको बता दें कि इन मरने वाले 7 लोगों में से 5 लोग एक ही परिवार के हैं। यहां हुआ रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन 7 घंंटों तक चला है।

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स्‍थानीय लोगों ने दी जानकारी

स्थानीय निवासी राहुल ने बताया कि सुबह करीब साढ़े 3 बजे एक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। जब वह बाहर निकले, तो देखा कि किले की दीवार गिर चुकी है। उन्होंने तुरंत 2 लोगों को मलबे से बाहर निकाला और उन्हें अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद उन्होंने डायल 100 पर कॉल किया, जिसके बाद एक पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचा और बचाव कार्य में सहयोग करने लगा।

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घटनास्‍थल पर मौजूद हैं अधिकारी

वर्तमान में घटनास्थल पर कलेक्टर संदीप मकीन, एसपी वीरेंद्र कुमार मिश्रा, कोतवाली टीआई धीरेंद्र मिश्रा और एसडीईआरएफ की टीम मौजूद है। पुलिस ने मौके पर महिलाओं और स्थानीय निवासियों को शांत कराने का प्रयास किया है।

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हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों ने सुबह करीब 8 बजे रेस्क्यू ऑपरेशन की धीमी गति को लेकर नाराजगी जताई और हंगामा किया। उनका कहना था कि सुबह 4 बजे से मलबा हटाने का काम चल रहा है, लेकिन अब तक रेस्क्यू टीम एक भी व्यक्ति को बाहर नहीं निकाल पाई है।

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400 साल पुरानी थी दीवार

आपको बता दें कि ये दीवार लगभग 400 साल पुरानी है, जिसका निर्माण सन् 1629 में दतिया के राजा इंद्रजीत ने करवाया था। इसे "शहर पन्हा" के नाम से जाना जाता है। उस समय दतिया एक छोटी रियासत थी, और आस-पास के राज्यों से आक्रमण का खतरा बना रहता था। इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से इस दीवार का निर्माण कराया गया था। इस दीवार में चार मुख्य द्वार और सात खिड़कियां थीं। हालांकि, समय के साथ लोगों ने इस ऐतिहासिक दीवार पर अतिक्रमण कर लिया। वर्तमान में, दीवार को तोड़कर वहां रिंग रोड बनाने का काम चल रहा है, जिससे इसकी संरचना प्रभावित हो रही है।

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हाथ से हटाया जा रहा मलबा

आपको बता दें कि किले की ओर जाने वाला रास्ता काफी संकरा यानी छोटा और कम चौड़ाई वाला है। इसके कारण बड़ा वाहन यानी जेसीबी अंदर नहीं जा पा रहा। जेसीबी मशीन और पोकलेन मशीन को अंदर लाने के लिए किले की दीवार (बॉउंड्री वॉल) को तोड़ा जा रहा है। इस कारण ही लोग अभी गैंती-फावड़ा से मलबा हटा रहे हैं।

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हादसे में प्रभावित परिवारों की सूची इस प्रकार है

इनकी गई जान

निरंजन वंशकार

ममता पत्नी निरंजन

राधा पिता निरंजन

सूरज पिता निरंजन

शिवम पिता निरंजन

प्रभा पत्नी किशन वंशकार

किशन पिता पन्ना लाल

हादसे में ये घायल

मुन्ना पिता खित्ते वंशकार

आकाश पिता मुन्ना वंशकार

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