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Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर तिल का दान किया जाता है और तिल के लड्डू भी बनाए जाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मकर संक्रांति पर आखिर तिल का इतना उपयोग क्यों किया जाता है. कहते है कि अगर संक्रांति के दिन तिल मिले जल में स्नान किया जाता है तो इससे सभी तीर्थों में किए गए स्नान के बराबर का फल मिलता है.
आयुर्वेद में भी तेल को औषधि माना जाता है. मकर संक्रांति के दिन तिल मिले जल से स्नान करने, तिल के तेल से मालिश करने, यज्ञ में तिल की आहुति देने, तिल के लड्डू बनाने का बहुत महत्व होता है. आइए जानते हैं कि मकर संक्रांति पर तिल का इतना महत्व क्यों है. /bansal-news/media/post_attachments/wp-content/uploads/2026/01/makar-sankranti-2026-10-499149.jpg?w=1280)
कैसे हुई तिल की उत्पत्ति
पौराणिक कथा के अनुसार, जब दैत्य हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रहलाद पर लगातार अत्याचार कर रहा था तो यह देखकर भगवान विष्णु क्रोधित हो गए थे. गुस्से में भगवान विष्णु का पूरा शरीर पसीने से भींग गया और जब ये पसीना जमीन पर गिरा तब तिल की उत्पत्ति हुई थी.
इसलिए तिल को बेहद पवित्र माना जाता है. मान्यता है कि जिस तरह गंगा जल का स्पर्श मृत आत्माओं को वैकुंठ के द्वार तक पहुंचा देता है ठीक उसी तरह तिल भी पूर्वजों, भटकती आत्माओं और अतृप्त जीवों को मोक्ष का मार्ग दिखाता है. इसलिए मकर संक्रांति पर तिल का इतना महत्व होता है.
वहीं, ज्योतिष शास्त्र में तिल को शनि का प्रतीक माना जाता है और गुड़ को सूर्य का प्रतीक माना जाता है. अगर आप मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का साथ में सेवन करते हैं तो इससे शनि और सू्र्य देव दोनों की कृपा प्राप्त होती है.
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