दिग्गज एक्टर इरफान खान का जन्मदिन: मुस्लिम परिवार में जन्मे लेकिन शाकाहारी रहे, प्यार के लिए धर्म बदलने को हो गए थे तैयार, दमदार एक्टिंग से जीता दिल

फैंस के दिलों में राज करने वाले इरफान खान ने कई फिल्मों को अपनी एक्टिंग से यादगार बना दिया। साल 2011 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया। 29 अप्रैल 2020 का वो काला दिन जब इरफान दुनिया छोड़ गए।

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Irrfan Khan Birthday: हिंदी मीडियम, इंग्लिश मीडियम, पीकू, लंच बॉक्स, पान सिंह तोमर और हासिल जैसी 120 से ज्यादा फिल्मों में अपनी दमदार एक्टिंग का लोहा मनवाने वाले इरफान खान का आज 7 जनवरी 2026 को जन्मदिन है। इस दिन के साथ याद आता है 29 अप्रैल 2020 जब इस दिग्गज एक्टर ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।

मुस्लिम परिवार में जन्मे, पिता का टायर का व्यापार

इरफान खान का जन्म 7 जनवरी 1967 को जयपुर के एक मुस्लिम पठान परिवार में हुआ था। उनका पूरा नाम साहबजादे इरफान अली खान रखा गया। इरफान के पिता टायर का बिजनेस करते थे।

पठान परिवार में पैदा हुआ ब्राह्मण

इरफान खान भले ही मुस्लिम परिवार में पैदा हुए हों, लेकिन वे बचपन से ही शाकाहारी रहे। उनके पिता उन्हें हमेशा ये कहकर चिढ़ाते थे कि पठान परिवार में ब्राह्मण पैदा हो गया।

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संघर्षभरा रहा इरफान खान का शुरुआती दौर

इरफान खान ने जब NSD में एडमिशन लिया तो उन्हीं दिनों उनके पिता का निधन हो गया। इरफान को घर से पैसे मिलना बंद हो गए। वे आर्थिक तंगी से घिर गए। NSD से मिलने वाली फैलोशिप से उन्होंने जैसे तैसे अपना कोर्स पूरा किया।

प्यार के लिए धर्म बदलने को तैयार हो गए थे इरफान

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पत्नी सुतापा सिकंदर के साथ इरफान खान

इरफान खान ने 23 फरवरी 1995 को अपनी क्लासमेट सुतापा सिकंदर से निकाह किया। इरफान के संघर्ष के दिनों में सुतपा हमेशा उनके साथ खड़ी रहीं थीं। इरफान ने जब सुतपा सिकंदर से शादी का फैसला किया तो वे अपने प्यार के लिए धर्म बदलने को भी तैयार हो गए थे। हालांकि धर्म बदलने की जरूरत नहीं पड़ी, क्योंकि दोनों के घरवाले शादी के लिए आसानी से मान गए थे।

'इरफान की आंखें भी एक्टिंग करती हैं'

इरफान खान का बचपन टोंक और राजस्थान में बीता। इरफान बॉलीवुड के साथ-साथ हॉलीवुड में भी एक्टिव रहे थे। उन्होंने जुरासिक वर्ल्ड, स्पाइडर मैन और इन्फर्नो जैसी फिल्मों में शानदार एक्टिंग की। हॉलीवुड एक्टर टॉम हैंक्स ने तारीफ में कहा था कि इरफान की आंखें भी एक्टिंग करती हैं।

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2005 में बेस्ट विलेन का फिल्मफेयर अवॉर्ड, 2011 में मिला पद्मश्री

इरफान खान ने 2005 में आई फिल्म 'रोग' में पहली बार अहम रोल किया। फिल्म 'हासिल' के लिए इरफान खान को साल 2005 का 'बेस्ट विलेन' का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। इसके बाद इरफान खान ने 'लंचबॉक्स', 'गुंडे', 'हैदर', 'पीकू' और 'हिंदी मीडियम' इंग्लिश मीडियम जैसी बड़ी फिल्मों में काम किया। इरफान खान को फिल्म 'पान सिंह तोमर' के लिए नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया। साल 2011 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।

53 साल की उम्र में दुनिया छोड़ गए इरफान खान

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अंग्रेजी मीडियम इरफान खान की आखिरी फिल्म

2018 में इरफान खान को पता चला था कि उन्हें न्यूरोइंडोक्राइन ट्यूमर है। ये एक तरह का ब्रेन कैंसर था। उन्होंने विदेश में इलाज कराया। इरफान की आखिरी फिल्म अंग्रेजी मीडियम थी। वे शूटिंग के दौरान दर्द से कराह रहे थे। शूटिंग के दौरान ने सिकुड़ते जा रहे थे। वजन लगातार कम हो रहा था। इसके बाद भी उन्होंने शूटिंग पूरी की। 29 अप्रैल 2020 को 53 साल की उम्र में इरफान खान का निधन हो गया।

इरफान खान के यादगार डायलॉग

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साल 2012 में आई फिल्म पान सिंह तोमर में इरफान खान

लोगों को हक जताना आता है, रिश्ते निभाना नहीं आता। (कारवां)

पिस्टल की ठंडी नली जब कनपटी पर लगती है न तब जिंदगी और मौत का फर्क समझ आता है।(द किलर)

आदमी जितना बड़ा होता है, उसके छुपने की जगह उतनी ही कम होती है।(कसूर)

मोहब्बत है इसलिए जाने दिया, जिद होती तो बांहों में होती।(जज्बा)

रिश्तों में भरोसा और मोबाइल पर नेटवर्क न हो तो लोग गेम खेलने लगते हैं।(जज्बा)

डेथ और शिट, ये दो चीजें किसी को कहीं भी, कभी भी आ सकती हैं।(पीकू)

बीहड़ में बागी होते हैं, डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में।(पान सिंह तोमर)

हमारी तो गाली पर भी ताली बजती है।(साहेब, बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स)

गलतियां भी रिश्तों की तरह होती हैं, करनी नहीं पड़तीं, हो जाती हैं।(डी डे)

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