Oscar 2022: भारत की डॉक्यूमेंट्री "राइटिंग विद फायर" ऑस्कर के लिए नामांकित, जानिए किस मुद्दे पर फिल्माई गई है यह फिल्म

Oscar 2022: भारत की डॉक्यूमेंट्री "राइटिंग विद फायर" ऑस्कर के लिए नामांकित, जानिए किस मुद्दे पर फिल्माई गई है यह फिल्म Oscar 2022: India's documentary "Writing with Fire" nominated for Oscar, know about which issue this film has been filmed nkp

Oscar 2022: भारत की डॉक्यूमेंट्री

नई दिल्ली। ऑस्कर अवार्ड 2022 के लिए फाइनल नॉमिनेशन लिस्ट में भारत की 'राइटिंग विद फायर' डॉक्यूमेंटरी को शामिल किया गया है। एकेडमी अवॉर्डस के 94वें एडिशन की फाइनल लिस्ट में इस इंडियन डॉक्यूमेंट्री को बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फीचर कैटेगरी में शामिल किया गया है। बता दें कि नॉमिनेशंस की घोषणा ट्रेसी एलिस रॉस और लेस्ली जॉर्डन ने मंगलवार शाम को एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज के ट्विटर पेज पर की गई।

डॉक्यूमेंट्री में क्या है?

गौरतलब है कि इस डॉक्यूमेंट्री को रिंटू थॉमस और सुष्मित घोष ने निर्देशित किया है। दोनों के करियर की यह पहली डॉक्यूमेंट्री है। इस डॉक्यूमेंट्री की कहानी महिला द्वारा चलाए जा रहे भारत के इकलौते न्यूज पेपर 'खबर लहरिया' से जुड़ी हुई है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे इस अखबार को दलित महिला सामाजिक दायरे से जोड़े रखने के लिए प्रिंट से डिजिटल में तब्दील करती है। इस दौरान उसके सामने जाति औ जेंडर से जुड़ी हुई कौन कौन सी चुनौतियां सामने आती हैं।

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खबर लहरिया में सिर्फ महिलाएं काम करती हैं

'खबर लहरिया' उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों में फैले बुंदेलखंड इलाके में ग्रामीण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित रखने वाला एक मीडिया संगठन है जिसमें सिर्फ महिलाएं काम करती हैं। इसमें पत्रकारों की एक टीम है जिसके सदस्य ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को पत्रकारिता का प्रशिक्षण भी देते हैं। यही महिलाएं फिर अपनी और अपने समाज की कहानियां बयां करती हैं। बता दें कि इस संस्था को साल 2009 में यूनेस्कों ने किंग सेजोंग पुरस्कार से भी नवाजा था।

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2002 में हुई थी खबर लहरिया की शुरूआत

'खबर लहरिया' की शुरूआत साल 2002 में एक अखबार के रूप में हुई थी। 2013 में इसी वेबसाइट शुरू की गई, 2015 में यूट्यूब चैनल और फिर 2019 में सब्सक्रिप्शन आधारित सेवाएं शुरू की जाने लगी। संस्था का दावा है कि इनकी डिजिटल सेवाएं हर महीने करीब एक करोड़ लोगों तक पहुंचती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खबर लहरिया खासतौर पर सरकार की ग्रामीण विकास और सशक्तिकरण के लिए बनाई गई योजनाओं के दानों और उनकी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करता है।

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बता दें कि इस डॉक्यूमेंट्री को बनाने में पांच साल लगे। इसे पहली बार साल 2021 में अमेरिका के प्रतिष्ठित सनडांस फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया था।

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