प्याज के दाम ने किसानों को रुलाया: मध्य प्रदेश की मंडियों में 50 रुपये क्विंटल तक गिरा भाव, लागत निकालना भी मुश्किल

Onion Mandi Price: मध्यप्रदेश की मंडियों में प्याज की कीमतें रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। 26 मई को बहुत मंडी में प्याज का रेट 50 रुपये क्विंटल तक गिरा। जानें अन्य मंडियों का हाल, किसानों पर असर और राहत की मांग।

Onion Mandi Price

Onion Mandi Price

Onion Mandi Price: 26 मई को मध्यप्रदेश की मंडियों में प्याज के थोक भाव (Onion Mandi Price) ने किसानों की कमर तोड़ दी। कुछ जगहों पर तो रेट इतने गिर गए कि लागत भी नहीं निकल पा रही। किसान आक्रोशित हैं और सरकार से तत्काल राहत की मांग कर रहे हैं।

26 मई 2025: मध्यप्रदेश की प्रमुख प्याज मंडियों में भाव (रुपये/क्विंटल)

मंडी का नामन्यूनतम कीमतअधिकतम कीमतमॉडल प्राइस
बहुत₹50₹481₹100
अष्ट₹402₹901₹711
बदनावर₹340₹340₹340
भोपाल₹570₹950₹600
इंदौर₹205₹1056₹927

बहुत मंडी में 50 रुपये क्विंटल का रेट अब तक का सबसे निचला स्तर बताया जा रहा है।

गुजरात और हरियाणा की मंडियों की तुलना

गुजरात मंडियां (26 मई 2025)

मंडी का नामन्यूनतम कीमतअधिकतम कीमतमॉडल प्राइस
महुवा₹175₹960₹500
भरूच₹500₹1500₹1000
बिलिमोरा₹1000₹1800₹1400

हरियाणा मंडियां (26 मई 2025)

मंडी का नामन्यूनतम कीमतअधिकतम कीमतमॉडल प्राइस
अंबाला₹525₹1237₹865
बहादुरगढ़₹1100₹1600₹1400
बरवाला₹900₹1000₹950

किसानों पर असर और राहत की मांग

मध्यप्रदेश के प्याज (Onion Mandi Price) किसान भारी नुकसान में हैं। 100 रुपये क्विंटल पर प्याज बेचने वाले किसानों को ट्रांसपोर्ट और मजदूरी निकालना भी मुश्किल हो रहा है। इस गिरावट से हजारों किसानों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।

किसानों का कहना है कि:

  • MSP लागू किया जाए
  • सरकारी खरीद शुरू हो
  • फसल बीमा के तहत मुआवज़ा मिले

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सरकार चुप, किसान परेशान

अभी तक राज्य या केंद्र सरकार की तरफ से कोई ठोस राहत योजना की घोषणा नहीं हुई है। किसानों की मांग है कि प्याज के न्यूनतम मूल्य की गारंटी दी जाए ताकि भविष्य में उन्हें इस तरह के नुकसान से बचाया जा सके।

मध्यप्रदेश जैसे बड़े कृषि राज्य में जब किसान प्याज जैसी आवश्यक फसल के लिए लागत भी नहीं निकाल पा रहे, तो सवाल यह उठता है कि खेती कितनी टिकाऊ है? सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर किसानों की मदद करनी चाहिए, वरना आने वाले समय में और ज्यादा किसान खेती छोड़ने को मजबूर होंगे।

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