One District One Product: अब हीरे के साथ सेहत का खजाना भी मिलेगा यहां, सरकार ने लिया फैसला

One District One Product: अब हीरे के साथ सेहत का खजाना भी मिलेगा यहां, सरकार ने लिया फैसला Now you will get a treasure of health along with diamonds here, the government has decided

One District One Product: अब हीरे के साथ सेहत का खजाना भी मिलेगा यहां, सरकार ने लिया फैसला

भोपाल। विश्वभर में हीरों की चमक से अपनी पहचान बनाने वाले पन्ना जिले में अब सेहत का खजाना कहे जाने वाले आंवला के उत्पाद भी महक रहे हैं। अब जिले के आंवला को ODOP ( One District One Product ) में चुना गया है। अब यहां आंवला के कई उत्पाद बन रहे हैं, जिससे किसानों को आर्थिक मजबूती मिलेगी।

इसपर मप्र जनसंपर्क विभाग ने एक ट्वीट कर जानकारी साझा की है। इसका एक वीडियो भी जारी किया है। जिसमें बताया गया है कि सूक्ष्म खाद्य उध्मी योजना के तहत पन्ना जिले में आंवला के उत्पादों के लिए चुना गया है। वहीं सीएम शिवराज सिंह चौहान ने संदेश दिया है कि हमें आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश भी बनाना है। जिसके लिए हम  आंवले के उद्पाद बेचकर अपनी आए बढ़ाएंगे और लोगों की सेहत भी सुधारेंगे।

यहां हम आबको बता दें कि भारत में सबसे ज्यादा आंवला उत्पादन मध्य प्रदेश में ही होता है। वहीं मध्यप्रदेश में पन्ना जिले का नाम आंवला उत्पादन में सबसे ऊपर है। यहां आंवला बहुतायत में पाया जाता है। इसका उपयोग सबसे अधिक मुरब्बा बनाने में किया जाता है, जो स्वाद में मीठा और मसालेदार होता है।

https://twitter.com/JansamparkMP/status/1569136209925836800

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में ओडीओपी पहल का उद्देश्य राज्य के सभी जिलों में संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना है। यह दृष्टिकोण देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया है। ओडीओपी के तहत मध्य प्रदेश के प्रत्येक जिले से एक उत्पाद का चयन, ब्रांड और प्रचार किया जाना है, जिसमें स्थानीय शिल्प/कौशल का संरक्षण और विकास और स्वदेशी ज्ञान को बढ़ावा देना।

कृषि और बागवानी वस्तुओं के स्थानीय प्रसंस्करण को बढ़ावा देना। राज्यों के जिलों को निर्यात हब के रूप में बढ़ावा देना। जिला स्तर पर नवाचार/प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करना शामिल है, ताकि उन्हें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके। इस पहल को अपनाने के लिए मध्य प्रदेश के 52 जिलों से संभावित उत्पादों की पहचान की गई है।

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