ओडिशा के पुरी में निकली जगन्नाथ रथयात्रा, गृहमंत्री अमित शाह ने सपरिवार की मंगला आरती

ओडिशा के पुरी में निकली जगन्नाथ रथयात्रा, वहीं गुजरात के अहमदाबाद में गृहमंत्री आमित शाह ने सपरिवार की मंगला आरती। पीएम मोदी ने भी दी बधाई।

Jagannath Puri Rathyatra 2023: विश्व प्रसिद्ध पुरी रथयात्रा आज से शुरू, पीएम मोदी ने दी देशवासियों को बधाई

Jagannath Rathyatra: दुनियाभर में लोकप्रिय ओडिशा के पुरी में आज  भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकलने वाली है। जगन्नाथ यात्रा की लोकप्रियता उसमें शामिल होने वाले लोगों से भी पता लगाया जा सकता है। इसमे असंख्य भक्तों की लंबी कतार देखने को मिलती है। वहीं गुजरात के अहमदाबाद में भी भगवान जगन्नाथ की 146वीं रथयात्रा निकाली गयी। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्रभाई पटेल ने विधि विधान के साथ रथयात्रा की शुरुआत की। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सपरिवार शामिल होकर मंगला आरती की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर रथयात्रा की बधाई दी है।

ओडिशा ही नहीं गुजरात मे भी निकली रथयात्रा 

दुनियाभर मे लोकप्रिय आज ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ यात्रा निकाली जाएगी। गौरतलब है कि जगन्नाथ यात्रा की शुरुआत गुजरात में भी हुई। गुजरात के अहमदाबाद में आज यानि कि मंगलवार को जगन्नाथ यात्रा निकाली गई।  सीएम ने विधि अनुसार यात्रा की शुरुआत की। वहीं केन्द्रीय गृहमंत्री अमितशाह ने अपने पूरे परिवार के साथ मंगला आरती की। भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र रथ पर सवार होकर निकले है। ध्यान देने वाली बात है कि ओडिशा के पुरी के बाद गुजरात के अहमदाबाद में ही सबसे भव्य तरीके से रथयात्रा निकलती है।

रथयात्रा के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती

देश के दूसरे सबसे बड़े जगन्नाथ रथयात्रा को लेकर तैयारियां पिछले एक महीने से चल रही थीं। इस रथयात्रा में लोगों की बड़ी हुजूम देखने को मिलती है। जिसे ध्यान में रखते हुए इस रथयात्रा में सुरक्षा की दृष्टि से पच्चीस हजार पुलिस अधिकारी और जवान तैनात किए गए हैं। सुबह 7:00 बजे गुजरात के सीएम भूपेंद्रभाई पटेल ने पहिंद विधि करके रथ यात्रा की शुरुआत की है।

क्या है जगन्नाथ यात्रा का महत्व

इस रथयात्रा का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है। हिंदुओं की भावनाओं से जुड़ा यह त्यौहार बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा प्राचीन काल से ही निकाला जाता रहा है। इस  रथयात्रा से जुड़ा विवरण हमें ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण और स्कंद पुराण और कपिला संहिता में देखने को मिलता है।

विशेष रूप से किया जाता है रथोंका निर्माण

जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीन रथों का निर्माण प्रत्येक वर्ष विशेष पेड़ों जैसे फस्सी, ढौसा आदि की लकड़ी के साथ किया जाता है। वे पारंपरिक रूप से पूर्व रियासत राज्य दासपल्ला से सुतार की एक विशेषज्ञ टीम द्वारा लाए जाते हैं। गौरतलब है कि इनके पास वंशानुगत और विशेषाधिकार है।

(Story by Akash Upadhyay)

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