आज भी धड़कता है भगवान श्रीकृष्ण का दिल, पुजारी क्यों बांध लेते हैं आंखों पर पट्टी, जानिए बड़ा रहस्य

आज भी धड़कता है भगवान श्रीकृष्ण का दिल, पुजारी क्यों बांध लेते हैं आंखों पर पट्टी, जानिए बड़ा रहस्य

Jagannath Puri Rath Yatra 2022 : देशभर में मानसून दस्तक दे चुका हैं। बारिश को बुलाने के लिए लोग क्या क्या नहीं करते है, बरिश कराने के लिए लोग कई प्रकार के टोटके भी करते है। तो वही भगवान जगन्नाथ जी (Jagannath Puri Rath Yatra 2022) को प्रसन्न करने के लिए उनकी रथ यात्रा निकाली जाती है। कोरोना महामारी के चलते पिछले 2 सालों से रथ यात्रा का आयोजन नहीं हो पाया था लेकिन इस साल से रथ यात्रा शुरू हो गई है। 1 जुलाई से 12 जुलाई तक निकाले जाने वाली रथ यात्रा को लेकर कई इंतजाम किए गए है। भगवान जगन्नाथ यात्रा (Jagannath Puri Rath Yatra 2022) को हिंदू धर्म में काफी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ यात्रा (Jagannath Puri Rath Yatra 2022) की रथ यात्रा करके उन्हें प्रसन्न किया जाता है ताकि मानसून जल्दी आ सके और अच्छी बारिश हो सके। जिसके चलते हर साल पुरी में रथ यात्रा का विशाल आयोजन किया जाता है।

चार धामों में एक पुरी का जगन्नाथ मंदिर

देशभर में चारों धामों की यात्रा में उड़ीसा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर (Jagannath Puri Rath Yatra 2022) अपनी अलग पहचान रखता है। रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भी शामिल होती हैं। कहा जाता है कि एक बार भगवान जगन्नाथ (Jagannath Puri Rath Yatra 2022)  की बहन सुभद्रा ने नगर देखने की इच्छा की थी। बहन की इस इच्छा को पूरा करने के लिए भगवान जगन्नाथ और बलभद्र उन्हें रथ पर बैठाकर नगर दिखाने लेकर गए थे। इस दौरान वे अपनी मौसी के घर भी गए थे। तभी से इस रथ यात्रा की परंपरा शुरू हुई थी।

आज भी धड़कता है भगवान जगन्नाथ का दिल

मान्यता है कि जब भगवान कृष्ण ने अपना देह त्याग किया तो उनका अंतिम संस्कार किया गया था। उनका बाकी शरीर तो पंच तत्वों में मिल गया लेकिन उनका दिल सामान्य और जिंदा रहा। कहा जाता है कि उनका दिल आज भी सुरक्षित है। माना जाता है कि उनका यह दिल भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के अंदर है और वह आज भी धड़कता है। बताया जाता है कि हर 12 साल में मंदिर की मूर्तिया बदली जाती है। जब इन मूर्तियों को बदला जाता है तो पूरे शहर की बिजली बंद कर दी जाती है। पूरे पूरी में अंधेरा होता है। मंदिर को CRPF के हवाले कर दिया जाता है। मंदिर में किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं होती है। सिर्फ एक पूजारी को ही मंदिर (Jagannath Puri Rath Yatra 2022)  में जाने की अनुमति होती है। लेकिन पुजारी को इस दौरान हाथों में दस्ताने पहनने होते है, साथ ही पुजारी की आंखों में पट्टी बांधी जाती है ताकि पुजारी मूर्तियों को ना देख सके.

नही बदला जाता ब्रह्म पदार्थ

जब पुरानी मूर्तियों को बदला जाता है तब ब्रह्म पदार्थ को नहीं बदला जाता है। ब्रह्म पदार्थ को पुरानी मूर्ति से निकालकर नई मूर्ति में डाल दिया जाता है। ब्रह्म पदार्थ को लेकर कहा जाता है कि अगर इसे किसी ने भी देख लिया तो उसकी तुरंत मौत हो जाएगी। मंदिर के पुजारियों का कहना है कि मूर्तियां बदलते समय जब वह ब्रह्म पदार्थ को पुरानी मूर्ति से नई मूर्ति में डालते हैं तो उन्हें कुछ उछलता हुआ सा महसूस होता है। उसे छूने पर वह एक खरगोश जैसा लगता है जो उछल रहा है।

सिंहद्वार का रहस्य

भगवान जगन्नाथ (Jagannath Puri Rath Yatra 2022)  के मंदिर से जुड़ा एक रहस्य और भी है वह है सिंहद्वार, माना जाता है कि जब इस सिंहद्वार से बाहर होते हैं तो समुद्र की लहरों की तेज आवाज आती है लेकिन जैसे ही आप सिंहद्वार के अंदर प्रवेश करते हैं तो यह आवाजें आना बंद हो जाती हैं। इसके अलावा सिंहद्वार के अंदर प्रवेश करने से पहले चिताओं की गंध आती है लेकिन द्वार के अंदर प्रवेश करते ही यह गंध आनी बंद हो जाती है। खबरों के अनुसार बताया जा है कि आज तक किसी ने भी किसी पक्षी को मंदिर के गुंबद पर बैठा हुआ नहीं देखा है। मंदिर से जुड़ा और बड़ा रहस्य यह है कि पूरी में कितनी भी धूप हो, लेकिन मंदिर की परछाई कभी नहीं बनती। एक रहस्य यह भी है कि मंदिर (Jagannath Puri Rath Yatra 2022)  के अंदर बना रसोई घर दुनिया का सबसे बड़ा रसोई घर है यहां 500 रसोइये और उनके 300 सहयोगी काम करते हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि मंदिर में कितने भी लोग आ जाएं लेकिन प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता। लेकिन जैसे ही मंदिर (Jagannath Puri Rath Yatra 2022) के बंद होने का समय आता है तो यह प्रसाद अपने आप खत्म हो जाता है।

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