ओडिशा सरकार ने भ्रष्टाचार व अक्षम होने के कारण सात अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी

भुवनेश्वर, पांच जनवरी (भाषा) भ्रष्ट और अक्षम अधिकारियों के खिलाफ अपने अभियान को आगे बढ़ाते हुए ओडिशा सरकार ने मंगलवार को अपने सात अफसरों को अनिवार्य सेवानिवृत्त दे दी। इसमें उपमहानिरीक्षक (कारगार) स्तर का भी एक अधिकारी शामिल है।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और अक्षमता के खिलाफ राज्य सरकार की कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति के तहत की गई है।

उन्होंने बताया कि जिन सात अधिकारियों को दंडित किया गया है, उनमें एक कमांडेंट, एक उप कमांडेंट, एक डीएसपी, एक सीडीपीओ और दो खनन अधिकारी हैं।

सूत्रों ने बताया कि इसके साथ ही एक साल में 104 अफसरों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा चुकी है।

उन्होंने बताया कि संबंधित डीआईजी (कारागार) स्तर के अधिकारी ने जेल वार्डर चयन समिति के प्रमुख के तौर पर अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया और चयन प्रक्रिया में उन्होंने अनियमितता की। इसके अलावा उनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं है। उनकी ईमानदारी भी सवालों के घेरे में हैं। इसलिए उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई है।

ओडिशा विशेष सशस्त्र पुलिस (ओएसएपी) के कमांडेंट को अपने मातहतों के साथ बदसलूकी करने और हमला करने के आरोप में नौकरी से निलंबित किया गया था। उनपर शराब पीने और अक्षम पुलिस कर्मी होने का भी आरोप है।

डीएसपी को उनके खिलाफ दो दीवानी मामले दर्ज होने के बाद निलंबित कर दिया गया था, जबकि ओएसएपी के उप कमांडेंट पर जंगल से लकड़ी चुराने का आरोप है। उनपर अपने मातहतों की मदद से सरकारी गाड़ियों में लकड़ी ले जाने का भी आरोप है।

निलंबित बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) कोरापुट जिले में काम कर रहे थे। उनके खिलाफ सतर्कता विभाग ने दो मामले दर्ज किए थे।

खनन विभाग के दो कनिष्ठ अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्त दी गई है, क्योंकि उनके खिलाफ सतर्कता विभाग ने मामले दर्ज किए थे।

इससे पहले 30 दिसंबर को राज्य सरकार ने छह अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी थी।

भाषा

नोमान दिलीप

दिलीप

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