MP Budget 2021: प्रदेश में 24 लाख से ज्यादा हुई बेरोजगारों की संख्या, प्रति व्यक्ति आय में आई 4.71 रुपए की कमी

भोपाल। शिवराज सरकार (Shivraj Government) के चौथे कार्यकाल का मंगलवार को पहला बजट पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा आज बजट (MP Budget 2021) को विधानसभा में पेश करेंगे। इससे पहले सोमवार को बजट से एक दिन पहले आर्थिक सर्वेक्षण (economic survey) प्रस्तुत किया गया था। कोरोना महामारी (corona pandemic) के दौर में जहां एक ओर मंहगाई लगातार पैर पसार रही है, वहीं प्रदेश को काफी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ा है। सालाना प्रति व्यक्ति आय (per capita income) में 4.71 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं पिछले वर्ष की तुलना में इस साल की जीडीपी (GDP)  में 3.37 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। 2020-21 के बजट के अनुसार राज्य से कुल प्राप्त रकम 1,36,596.36 करोड़ रुपए रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। महामारी के इस दौर में बेरोजगारी भी अपने चरम पर है। प्रदेश में बेरोजगारों की संख्या बढ़कर 24 लाख 72 हजार हो गई है। खनिज से होने वाली सरकारी की आय में करीब 27.4 प्रतिशत की कमी देखने को मिली है। इतना ही नहीं विकास दर में भी काफी कमी देखने को मिली है। साल 2019-20 की तुलना में 2020-21 साल की विकास दर 3.37 प्रतिशत कम हो गई है।

इस बजट में हो सकतीं हैं यह घोषणाएं… 
इस बजट में सरकार चुनावों को ध्यान में रखते हुए हर वर्ग को साधकर रखने की कोशिश कर रही है। नगरीय निकाय चुनावों (Nagriya Nikay Chunav) को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनधारियों का महंगाई भत्ता और राहत बढ़ाने की घोषणा बजट में हो सकती है। वर्तमान में कर्मचारियों और पेंशनर्स को 12% डीए-डीआर मिल रहा है। इस बजट में महिला स्व-सहायता समूह का विस्तार, कृषक उत्पादक समूहों का गठन, सहकारी समितियों से युवाओं को जोड़ने सहित अन्य कार्यक्रमों के लिए प्रावधान लागू किया जा सकता है। प्रदेश में  बढ़ती बेरोजगारी को ध्यान में रखते हुए कस्टम हायरिंग सेंटर की संख्या बढ़ाने की घोषणा भी की जा सकती है। यह घोषणा भी बजट में प्रस्तावित है। वहीं प्रदेश के विकास के लिए विभिन्न कार्यों के लिए योजनाएं प्रस्तावित हैं। महिला सशक्तिकरण को स्वदेशी वस्तुओं की बिक्री को प्रोत्साहन देते हुए बढ़ावा दिए जाने पर भी प्रस्ताव दिया गया है। ये सभी काम स्वसहायता महिला समूहों को सौंपे जाएंगे। घरेलू उद्योग में तकनीकी का भी सहारा लिया जाएगा। खेती में भी आधुनिक ढ़ांचा अपनाकर लाभ का धंधा बनाने को लेकर योजनाएं घोषित की जा सकती हैं।

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