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सावधान! कहीं ये HOLI आखिरी होली न हो, रायपुर में पानी खरीदकर नहाने को मजबूर हो जाएंगे लोग, इस रिपोर्ट में हुए चौकाने वाले खुलासे

Holi 2024: एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि रायपुर में रहने वाले लोग पानी खरीदकर नहाने को मजबूर हो जाएंगे।

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Bansal news
सावधान! कहीं ये HOLI आखिरी होली न हो, रायपुर में पानी खरीदकर नहाने को मजबूर हो जाएंगे लोग, इस रिपोर्ट में हुए चौकाने वाले खुलासे

Holi 2024: होली एक ऐसा त्योहार है जिसमें रंग खेलने के लिए पानी का भतेरा उपयोग होता है। लेकिन, अब एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि रायपुर में रहने वाले लोग पानी खरीदकर नहाने को मजबूर हो जाएंगे।

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रिपोर्ट में कई और चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। अगर आप भी सावधान नहीं हुए तो, ये होली (Holi 2024) आपकी आखरी होली होगी।

   ये कोई होली की मसखरी नहीं है

Holi 2024

होली (Holi 2024) पर अक्सर लोग मसखरी करते हैं, लेकिन ये कोई मसखरी नहीं है। यदि आप चाहते हैं कि ऊपर लिखी लाइनें आपकी जिंदगी की कहीं हकीकत न बन जाए तो आपको अभी इसी समय जागरूक होने की जरूरत है।

यकीं माने हम इस मामले में पहले से ही बहुत देर कर चुके हैं।

   बेंगलुरु का जल संकट किसी से छुपा नहीं

Holi 2024

यदि हम जल संकट की बात करें तो बेंगलुरु में जारी जल संकट किसी से छुपा नहीं है। शहर के तमाम हिस्सों में लोग पानी की एक-एक बूंद के मोहताज हो गए हैं।

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यहां होली खेलने पर प्रतिबंध लग गया है। आपको लगता है कि ये हालात छत्तीसगढ़ में नहीं हो सकते तो आप बिल्कुल गलत हैं। प्रदेश में 24 शहर-कस्बे ऐसे हैं जो जल संकट के बिल्कुल मुहाने पर ही खड़े हैं।

      खतरे में है छत्तीसगढ़ का अस्तित्व

Government of Chhattisgarh - Wikipedia

छत्तीसगढ़ में दश क्षेत्र ऐसे हैं जहां पानी की किल्लत होने वाली है।  केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2022 की ग्राउंड वाटर रिसोर्स असेसमेंट रिपोर्ट ने कई खुलासे किए हैं।

 इस रिपोर्ट के अनुसार सूबे के 24 ब्लॉक ऐसे हैं जो क्रिटिकल केटेगिरी में है। यानी इन क्षेत्रों में, पानी की किल्लत शुरू हो चुकी है। ये क्षेत्र ऐसे हैं जिनके लिए एक कवाहत कही जाती रही है।

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यहां की माटी धीर गंभीर, पग पग रोटी, डग-डग नीर। जहां कदम कदम पर रोटी और जगह-जगह पर पानी मिल जाता है।

पर स्थिति अब खतरनाक ही नहीं विस्फोटक हो चली है। हालत ये है कि अब भी नहीं चेते तो वो दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ का अस्तित्व ही खतरे में होगा। अब समय आ गया है कि इस पर चिंता करने की आवश्यकता है।

    कौन से हैं दस क्षेत्र

Holi 2024

केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2022 की ग्राउंड वाटर रिसोर्स असेसमेंट रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में, बसना, बरमकेला, पुसौर, तमनार, धरसीवा, डोंगरगढ़, खैरागढ़, राजनांदगांव, सूरजपुर, रायपुर आदि क्षेत्र हैं जो क्रिटिकल कैटेगरी में है।

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      एक-दो मानसून रूठे तो यहां भी बेंगलुरु जैसे हालात

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छत्तीसगढ़ में ये इलाके हैं जो भीषण जल संकट के मुहाने पर खड़े हैं। यदि एक-दो मानसून भी इन इलाकों में रूठा तो बेंगलुरु जैसे हालात यहां भी बन जाएंगे।

      जमीन के अंदर खत्म हो रहा पानी

आवरण कथा: क्यों जहरीला हो रहा है जमीन के नीचे का पानी?

इसका मतलब हुआ कि यहां ग्राउंड वाॅटर जितना रिचार्ज (जमीन के अंदर पानी जाना) नहीं हो रहा है। उससे ज्यादा हर साल पानी निकाला जा रहा है।

इस स्थिति में भविष्य में यहां जमीन के अंदर का पानी खत्म हो जाएगा, जिससे इस क्षेत्र को पानी की भारी किल्लत का सामना करना होगा। इनमें से अधिकतर ब्लाॅक मालवा क्षेत्र के हैं।

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   जगह-जगह बोर होने से भी जलस्तर में गिरावट

Holi 2024

जगह-जगह बोर होना भी जलस्तर में गिरावट का एक बड़ा कारण है। यहां नियमानुसार एक बोर होने के बाद तीन सौ मीटर के दायरे में दूसरा बोर नहीं किया जा सकता है। लेकिन, पूरे प्रदेश में ही इस नियम की धज्जियां उड़ते देखी जा सकती है।

अगर घर आंगन में या सार्वजनिक स्थान पर ट्यूबवेल खनन करवा हो रहा है तो कस्बों में ये अनुमति नगर पंचायत, जिलों में नगर पालिका और बड़े शहरों में नगर निगम से मिलती है, गर्मी के मौसम में बोरिंग पर प्रतिबंध लग जाने के बाद ये अनुमति एसडीएम से लेनी होती है।

बगैर अनुमति के ट्यूबवेल खनन करने से जुर्माना तो लगता ही है साथ ही खुदे हुए बोर को बंद भी किया जा सकता है, पर यह नियम सिर्फ कागजों में सिमटा रहता है और धड़ल्ले से जगह-जगह बोर हो जाते हैं।

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   नियम में ये भी कमी

Compliance of rules and regulations by the Government Employees: Lok Sabha QA

लेकिन, केंद्रीय भूजल बोर्ड के नियम पर नजर डालें तो नियम में दो बोर के बीच निश्चित दूरी का कोई पैमाना ही नहीं है।

24 सितंबर 2020 को इसे लेकर केंद्र ने नई गाइडलाइन जारी की, जिसके अनुसार अब वे सभी इंडस्ट्री, माइनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर यूनिट जो पानी का 10 किलो लीटर पर डे से शायद उपयोग कर रही हैं उन्हें सशुल्क बोर्ड से एनओसी लेना होगी।

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पहले यह फ्री थी पर अब इसके लिए शुल्क देना होगा। पर इस नियम में ऐसा कहीं कोई उल्लेख नहीं है कि एक बोर से दूसरे बोर के लिए कितनी दूरी जरूरी है। बोर्ड सभी को एनओसी देगा, चाहे वह बोर कुछ मीटर की दूरी पर ही क्यों न हो।

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