New Educatinal Policy : स्थानीय बोली नहीं बनेगी शिक्षा में रुकावट, स्थानीय बोलियों में पढ़ सकेंगे बच्चे

भोपाल। प्रदेश के सरकारी स्कूलों New Educatinal Policy को एक नई सौगात मिलने वाली है। नई शिक्षा नीति के तहत विभाग द्वारा एक पहल की जा रही है। जिसके अंतर्गत बच्चे अपनी स्थानीय भाषा में पढ़ाई कर पाएंगे। अब बोली उनकी शिक्षा में आड़े नहीं आएगी। इसके तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। इन विभिन्न बोलियों के लिए वीडियों आदि तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा राज्य शिक्षा केंद्र स्कूली बच्चों के लिए कहानी उत्सव और स्थानीय बोली प्रतियोगिता भी आयोजित कराएगा। प्रयोग का उद्देश्य बच्चों का स्थानीय बोली से जुड़ाव बनाए रखना है।

इन बोलियों में होगी पढ़ाई —
पहली से आठवीं तक के बच्चों के लिए की शुरूआत की जाएगी। विभिन्‍न अंचलों में बोली जाने वाली मालवी, निमाड़ी, बुंदेलखंडी, बघेली और आदिवासी क्षेत्रों की कोरकू, भीली, सहरिया, बैगा, भिलाला, बारेली, गोंडी आदि बोलियों को शामिल किया जाएगा। प्रयोग का उद्देश्य बच्चों का स्थानीय बोली से जुड़ाव बनाए रखना।

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