MP Cyber Tehsil: नए साल पर नहीं होगा साइबर तहसील शुभारंभ, एमपी सरकार ने स्थगित किया कार्यक्रम; जल्द घोषित होगी कार्यक्रम की अगली तारीख

MP Cyber Tehsil मध्य प्रदेश में साइबर तहसील प्रणाली का 1 जनवरी को शुभारंभ नहीं होगा, मोहन यादव खरगोन से करने वाले थे नई साइबर तहसील की शुरूआत

MP Cyber Tehsil: नए साल पर नहीं होगा साइबर तहसील शुभारंभ, एमपी सरकार ने स्थगित किया कार्यक्रम; जल्द घोषित होगी कार्यक्रम की अगली तारीख

भोपाल MP Cyber Tehsil एमपी में नए साल के मौके पर होने वाले साइबर तहसील कार्यक्रम का शुभारंभ स्थगित हो गया है। कार्यक्रम स्थगित होने की वजह अभी साफ नहीं है। अब कार्यक्रम की अगली तारीख की घोषणा जल्द ही की जाएगी। इसका आदेश भी सामने आया है।

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सीएम मोहन यादव करने वाले थे शुरूआत
आपको बता दें कि सीएम डॉ. मोहन यादव खरगोन से इसकी शुरूआत करने वाले थे। इसके अलावा पहले इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आने वाले थे, लेकिन उनका दौरा निरस्त हो गया है।

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पहले से अलग कैसे होगी साइबर तहसील
नई तहसील से रजिस्ट्री के बाद नामांतरण, अविवादित नामांतरण के लिए तहसील कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाना होगा। खसरा-नक्शा में भी तत्काल सुधार करने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी, पहले ये व्यवस्था नहीं थी।

अब सिर्फ 15 होगा केसों का निपटारा
इसके बाद मप्र में राजस्व विभाग के अभिलेख एवं आदेशों की हार्डकॉपी आम लोगों मिल सकेगी। इसके साथ ही कई सालों से चले आ रहे प्रकरणों को भी कुछ दिनों में पूरा किया जाएगा। नई व्यवस्था (MP Cyber Tehsil) से लंबित मामलों को निपटारा 15 दिन पूरा होगा। वहीं पहले इनके लिए 60 दिन लग रहे थे।

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बता दें कि प्रदेश में हर साल नामांतरण के लगभग 14 लाख प्रकरण दर्ज किए जाते हैं। जो जमीन के क्रय-विक्रय से जुड़े होते हैं।

लागू की गई सभी प्रोसेस
साइबर तहसील में पंजीयन से नामांतरण तक की सभी प्रोसेस लागू कर दी गई हैं। साइबर तहसील को 4 अलग-अलग प्लेटफार्मों जैसे संपदा पोर्टल, भूलेख पोर्टल, स्मार्ट एप्लीकेशन फार रेवेन्यू एप्लीकेशन (SARA) पोर्टल और रेवेन्यू केस मैनेजमेंट सिस्टम (RCMS) पोर्टल से जोड़ दिया गया है।

खसरा संबंधित केस सुलझेंगे
सायबर तहसील में ऐसे सभी केसेज का निराकरण होगा जो पूरी तरह से खसरा से संबंधित हो। जिसे विभाजित नहीं किया गया एवं ऐसी जमीन, जो किसी प्रकार से गिरवी या बंधक न रखी गई हो। पोर्टल पर पंजीयन करने और रजिस्ट्री के बाद रेवेन्यू पोर्टल पर स्वत: केस दर्ज हो जाएगा। इसके बाद सायबर तहसीलदार द्वारा जांच की जाएगी। सूचना के बाद इश्तेहार एवं पटवारी रिपोर्ट के लिए मेमो जारी किया जाएगा। इसके बाद आदेश पारित कर भू-अभिलेख को अपडेट किया जाएगा।

मिलेगी नई सुविधा
दस दिन बाद दावा-आपत्ति प्राप्त नही होने पर ई-मेल एवं वाट्सअप से आदेश दिए जयेंगे। रजिस्ट्रार कार्यालय में विक्रय-पत्र (रजिस्ट्री) निष्पादन के दौरान आवेदक को आवश्यक प्रकिया शुल्क एवं निर्धारित प्रारूप में सामान्य जानकारी देनी होगी। ऐसे पंजीयन जिसमें संपूर्ण खसरा नंबर या संपूर्ण प्लॉट समाहित है और किसी भी खसरा या प्लॉट का कोई विभाजन नहीं है, तब ऐसे प्रकरण में पंजीकृत विक्रय विलेख (रजिस्ट्री) का स्वचालित प्रक्रिया के माध्यम से RCMS पोर्टल पर साइबर तहसील को भेज दिया जाता है।
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