एनडीआरएफ को संयुक्त राष्ट्र से अंतरराष्ट्रीय आपदा मोचन बल के तौर पर जल्द मिलेगी मान्यता

नयी दिल्ली, 10 जनवरी (भाषा) भारत जल्द ही संयुक्त राष्ट्र से मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय आपदा बचाव अभियान का हिस्सा हो सकता है क्योंकि देश की शीर्ष आपदा राहत संस्था एनडीआरएफ को जल्द ही वैश्विक मानकों के अनुरूप होने की मान्यता मिलने की उम्मीद है। यह जानकारी एक शीर्ष अधिकारी ने दी।

अधिकृत करने की प्रक्रिया स्विट्जरलैंड स्थित इनसार्ग (दि इंटरनेशनल सर्च ऐंड रेस्क्यू एडवायजरी ग्रुप) द्वारा पूरी की जाएगी जो संयुक्त राष्ट्र के तहत 90 से अधिक देशों और संगठनों का नेटवर्क है और जो शहरी खोज एवं बचाव के कार्य करता है।

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के महानिदेशक एस. एन. प्रधान ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘जिस तरह देश में भारतीय मानक ब्यूरो है उसी प्रकार संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी इनसार्ग दुनियाभर में आपदा मोचन बलों का मानकीकरण करती है। यह वैश्विक मानक है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम उनके मानकों के अनुरूप हैं और उम्मीद है कि वर्ष 2021 में मान्यता मिल जाएगी।’’

चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के पास मौजूद ऐसी मान्यता के महत्व को भी उन्होंने रेखांकित किया।

प्रधान ने कहा, ‘‘अगर आपको संयुक्त राष्ट्र किसी आपदा में मदद करने के लिए बुलाता है…तो आप अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया बल होते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ इसका मतलब यह नहीं है कि हमने पहले (अतंरराष्ट्रीय बचाव अभियान में हिस्सा) नहीं किया लेकिन जब हम नेपाल या जापान गए तो यह दो देशों का द्विपक्षीय फैसला था लेकिन इस मानकीकरण के बाद वह संयुक्त राष्ट्र द्वारा मंजूरी प्राप्त कार्य होगा।’’

बल के महानिदेशक ने कहा कि यह भारत के लिए गौरव का विषय होगा कि उसके बल को अंतरराष्ट्रीय आपदा मोचन बल के तौर पर जाना जाएगा।

उन्होंने बताया कि सिंगापुर और ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञों सहित इनसार्ग की समिति ने पिछले साल सितंबर में एनडीआरएफ की टीमों की समीक्षा की थी लेकिन कोविड-19 महामारी की वजह से यह प्रक्रिया ठंडे बस्ते में चली गई।

प्रधान ने कहा, ‘‘उम्मीद है कि वर्ष 2021 में आप एनडीआरएफ की दो टीमों को इनसार्ग टीम के तौर पर अधिसूचित देखेंगे।’’

गौरतलब है कि प्राकृतिक और मानवकृत आपदा के दौरान राहत और बचाव के लिए वर्ष 2006 में एनडीआरएफ का गठन किया गया था। इस समय बल में 12 बटालियन है जिनमें 15 हजार से अधिक कर्मी पूरे देश में तैनात हैं और चार बटालियनों के गठन की प्रक्रिया जारी है।

भाषा धीरज नीरज

नीरज

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