Navratri 2023: यहां विराजमान देवी मां दुर्गा की अवतार, 1000 सीढ़ियां चढ़ दर्शन करते हैं भक्त

राजधानी भोपाल से 75 किलोमीटर दूर सीहोर जिले के सलकनपुर गांव में विजासन देवी धाम है। यहां विराजामन देवी मां दुर्गा की अवतार हैं।

Navratri 2023: यहां विराजमान देवी मां दुर्गा की अवतार, 1000 सीढ़ियां चढ़ दर्शन करते हैं भक्त

Navratri 2023: राजधानी भोपाल से 75 किलोमीटर दूर सीहोर जिले के सलकनपुर गांव में विजासन देवी धाम है। जो विंध्यवासनी बिजासन देवी के नाम से देश भर में प्रसिद्ध है। यहां विराजामन देवी मां दुर्गा की अवतार हैं।

पवित्र सिद्धपीठ सलकनपुर गांव में 800 फुट ऊँची पहाड़ी पर विराजित है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 1000 से अधिक सीढ़ियां चड़नी पड़ती हैं।

आज हम इस लेख में विजासन देवी धाम से जुड़ी मान्‍यताओं और लोगों की आस्था को लेकर चर्चा करेंगे।

बता दें कि नवरात्र शुरू होते ही यहां देश के अलग-अलग हिस्‍से से लोग दर्शन करने के लिए आते हैं, साथ यहा आप 24 घंटे देवी माता के दर्शन कर  सकते हैं।

मां दुर्गा का अवतार

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पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां विजयासन देवी दुर्गा मां की ही अवतार हैं, जिससे ने देवताओं के कहने पर रक्तबीज नामक राक्षस का वध कर सृष्टि की रक्षा की थी।

सबकी कुलदेवी है मां विजासन

देश में ऐसे कई परिवार हैं, जिसे अपनी कुलदेवी के बारे में कोई जानकारी नहीं हैं। विजासन देवी मां ऐसे सभी लोगों की कुलदेवी हैं। साथ ही यह विंध्याचल पर्वत है, जिससे इन्‍हें विन्ध्यवासिनी के नाम से भी जाना जाता है।

सूनी गोद भरती हैं मां विन्ध्यवासिनी

मां विन्ध्यवासिनी अपने भक्तों की सभी मनोंकामनाएं पूरी करती हैं, साथ ही जिन भक्‍तों की संतान नहीं होती हैं, मामा देवी उसकी गोद भी भर देती हैं।

मां विन्ध्यवासिनी के प्रति भक्‍तों की श्रद्ध ही इतनी है कि यह किसी शक्तिपीठ से कम नहीं हैं। साथ ही यहां के अधिकतर लोग विजयासन देवी को ही कुलदेवी मानते हैं।

बाघ भी करता है परिक्रमा

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बता दें कि मां विन्ध्यवासिनी का मंदिर जिस पहाड़ी पर स्थित है वह रातापानी के जंगल से जुड़ा हुआ है। जिसके चलते यहां बाघ विचरण करते हुए आता है।

लोगों की आस्था है कि मां दुर्गा का यह वाहन माता के दर्शन करने मंदिर के पास आज भी आता है।

साथ ही ऐसा कहा जाता है कि जब यहां मंदिर का निर्माण नहीं हुआ था, तो बाघ इस मंदिर के पास ही एक गुफा में रहता था।

कई साल पुराना है देवी धाम

कहा जाता है यह मंदिर आज से करीब 6,000 साल पुराना है। साथ ही जीर्ण-शीर्ण अवस्‍था में पहुंचने पर इस मंदिर का जीर्णोद्धार कई बार किया गया है।

पहले इस मंदिर की व्‍यवस्‍था भोपाल के नवाब के संरक्षण में की जाती थी, उस समय यहां अखंड धूनी और अखंड ज्योति स्‍थापित कराई गई, जो आज भी प्रज्‍वलित है।

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