Navratri 2023: इस दिन है महा अष्टमी पूजा,यहां जानें तिथि‍‍ और महत्व

हिंदू धर्म में शारदीय नवरा‍त्रि का विशेष महत्‍व है। इस साल 15 अक्टूबर से शुरू हुई नवरात्रि 23 अक्टूबर को समाप्‍त हो रही हैं।

Navratri 2023: इस दिन है महा अष्टमी पूजा,यहां जानें तिथि‍‍ और महत्व

Navratri 2023: हिंदू धर्म में शारदीय नवरा‍त्रि का विशेष महत्‍व है। इस साल 15 अक्टूबर से शुरू हुई नवरात्रि 23 अक्टूबर को समाप्‍त हो रही हैं।

नवरा‍त्रि  के आठवें दिन अष्टमी होती है, जिसके महा अष्‍टमी कहा जाता है, जिसका नवरा‍त्रि  में विशेष महत्‍व है। इस दिन भक्त अपना व्रत समाप्‍त करते हैं और कन्या भोज करातें हैं।

आज हम इस लेख में शारदीय नवरा‍त्रि  में की महा अष्टममी  के महत्‍व और शुभ मुहूर्त के बारे में चर्चा करेंगे।

इस दिन है महा अष्‍टमी पूजा

बता दें कि इस साल शारदीय नवरात्रि की महा अष्‍टमी पूजा 22 अक्टूबर को रविवार के दिन रहेगी। इस भक्‍त मां महागौरी की पूजा करते हैं। देवी मां महागौरी का वाहन बैल है, साथ ही त्रिशूल उनका शस्त्र है।

भगवती मां महागौरी की आराधना करने से भक्‍तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सभी परेशानियों का अंत कर जीवन को सुख-समृद्धि से पूर्ण करती हैं।

सुहागन महिलाएं चढ़ाती हैं लाल चुनरी

मान्यता के अनुसार इस दिन भक्‍त निर्जला व्रत रखते हैं, जिससे उनके बच्चों की दीर्घायु मिले। साथ ही सुहागन महिलाएं अपने अचल सुहाग के लिए मां महागौरी को लाल चुनरी चढ़ाती हैं।

इस दिन नारियल खाना है निषेध

मान्‍यता है कि इस दिन नारियल खाना निषेध होता है, इसके खाने से हमारी बुद्धि का नाश होता है। इसके आवला तिल का तेल, लाल रंग का साग और कांसे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिए।

बता दें कि मां गौरी को नारियल का भोग लगाया जाता है। इसके अलालवा कई स्थानों पर कद्दू और लौकी को खाना निषेध माना गया है, कहा जाता है कि यह माता को बलि के रूप में चढ़ते हैं।

ऐसे पड़ा गौरी नाम

कहा जाता है कि शिव जी को पति रूप में पाने के लिए देवी जी ने कठोर तपस्या की, जिसके चलते उनका पूरा शरीर काला पड़ गया था।

देवी इस तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने इन्हें स्वीकार कर लिया और इनके शरीर को गंगा-जल धोया था। जिससे वह विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान गौर वर्ण की हो गई और जिससे उनका नाम गौरी पड़ा।

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