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National Sports Day: बड़े राज्यों के मुकाबले खेलों में आगे क्यों छोटे राज्य, जानें पंजाब-हरियाणा की होड़ क्यों नहीं कर पाता मध्यप्रदेश

National Sports Day: बड़े राज्यों के मुकाबले खेलों में आगे क्यों छोटे राज्य, जानें पंजाब-हरियाणा की होड़ क्यों नहीं कर पाता मध्यप्रदेश

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BP Shrivastava
National Sports Day

National Sports Day: खेलों में लंबे समय से हरियाणा और पंजाब अपना दबदबा बनाए हुए हैं। इसके पीछे वहां की 'खेल संस्कृति' का अहम रोल है यानी खिलाड़ी के घर से ग्राउंड और वहां से समाज और सरकार सभी का समर्पण है। हाल के पेरिस ओलंपिक 2024(Paris Olympics 2024) में भारत ने कुल एक सिल्वर समेत 6 मेडल जीते हैं। जिनमें से 5 व्यक्तिगत मेडल विजेताओं में से चार मेडलिस्ट हरियाणा के हैं।
नीरज चोपड़ा (सिल्वर-जेवलिन थ्रो), मनु भाकर (दो ब्रांच-शूटिंग), सरबजोत सिंह (ब्रोंज- शूटिंग) और अमन सहरावत (ब्रॉन्ज-रेसलिंग ) ये सभी खिलाड़ी हरियाणा के हैं, जबकि महाराष्ट्र के शूटर स्वप्निल कुसाले ने एक ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसके साथ ही पेरिस ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने लगातार दूसरी बार ब्रॉन्ज मेडल जीता है। इस टीम में कप्तान हरमनप्रीत सिंह समेत 8 खिलाड़ी पंजाब के हैं। ओलंपिक हॉकी टीम में 16 खिलाड़ी खेलते हैं। यानी आधी टीम पंजाब की हैं।

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पेरिस ओलंपिक में सबसे ज्यादा 25 खिलाड़ी हरियाणा

बता दें, पेरिस ओलंपिक 2024 (Paris Olympics 2024) में भारत के 117 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। जिसमें सबसे ज्यादा 25 खिलाड़ी हरियाणा के शामिल हुए। इसके बाद सबसे ज्यादा खिलाड़ी पंजाब ( 18) और तमिलनाडु ( 13) के हैं।
पेरिस ओलंपिक में मध्य प्रदेश के दो और उत्तर प्रदेश के 6 खिलाड़ियों ने भागीदारी की। इसके अलावा बड़े राज्यों पश्चिम बंगाल के 3, महाराष्ट्र के 6, राजस्थान के 2, गुजरात के 2, बिहार का 1, आंध्र प्रदेश के 4, कर्नाटक के 7 खिलाड़ी पेरिस तक पहुंचे।

इसमें भी हरियाणा- पंजाब टॉप पर

पेरिस ओलंपिक में मेडलिस्ट सूची और खिलाड़ियों की भागीदारी देखने के बाद हरियाणा और पंजाब टॉप पर है। हरियाणा के 25 खिलाड़ियों ने भागीदारी की और 4 व्यक्तिगत मेडल जीते यानी भागीदार में 21% से ज्यादा और मेडल जीतने में 80% से ज्यादा सफलता हरियाणा को मिली है, जबकि 20% महाराष्ट्र के हिस्से में गई है। पेरिस ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस 16 सदस्यीय टीम में पंजाब के 8 खिलाड़ी शामिल हैं, जबकि हरियाणा के तीन खिलाड़ियों ने भागीदारी की। इस टीम में मध्य प्रदेश की ओर से विवेक सागर प्रसाद ने मान बढ़ाया।

चौहान ने कहा- हरियाणा में खेल संस्कृति कायम है

अक्सर सवाल उठता है कि हरियाणा और पंजाब से ही ज्यादा बड़े खिलाड़ी क्यों निकालते हैं? मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश या अन्य बड़े प्रदेशों से ऐसा क्यों नहीं होता है। इस सवाल के जवाब के लिए हमने रार्ष्टीय खेल दिवस (National Sports Day) पर अंतरराष्ट्रीय कोच वाईएस चौहान से खास बातचीत की । आप हरियाणा में पले, बढे़ और खेलने के बाद मध्य प्रदेश के भोपाल में 30 साल से हॉकी की कोचिंग कर रहे हैं।

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उन्होंने बताया कि हरियाणा में खेल के प्रति पेरेंट्स बच्चों से लेकर समाज और शासन (सरकार) सब का डेडिकेशन (समर्पण) रहता है। वहां यह संस्कृति बन गई है। हरियाणा में खेल स्पर्धाएं गांव स्तर से ही शुरू हो जाती हैं। इसके साथ ही समाज का प्रोत्साहन इतना मिलता है कि गांव की टीम बनते ही कोई पूरी टीम को भोज कराता है, तो कोई घी पिलाता है, तो कोई दूध...। इसके अलावा गोल करने या जीतने पर पैसों की बरसात हो जाती है।

उनसे बातचीत के कुछ पॉइंट्स में इस तरह समझें-

  • हरियाणा में हर गांव और हर ग्राउंड पर परमानेंट कोच अपॉइंट हैं। जो सालभर कड़ी ट्रेनिंग देते हैं।
  •  खिलाड़ियों के मेडल जीतने पर शासन की ओर से प्रोत्साहन (इनामी राशि) और जॉब की गारंटी है। जिसकी वजह से पेरेंट्स भी बच्चों के साथ खड़े होकर पूरे समर्पण भाव से काम करते हैं।
  •  मेडिलिस्ट को समाज भी बहुत सम्मान देता है। पेरिस ओलंपिक के पदक विजेताओं के सम्मान समारोह अभी तक जारी हैं।
  • हरियाणा, 'महाभारत के संग्राम की स्थली है। जैसे कुरुक्षेत्र के आसपास महाभारत का युद्ध हुआ माना जाता है। वहां के खून में जोश और फाइट करने की स्वाभाविक प्रवृत्ति (Natural Tendency) है। जिसकी जरूरत खेलों में सबसे ज्यादा होती है।
  •  हरियाणा और पंजाब में एक ही कल्चर है। राजनीति के कारण पंजाब का युवा अलग लाइन पर चला गया है। हालांकि, पेरिस ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम में 8 खिलाड़ी पंजाब के हैं।
  •  हरियाणा में तकरीबन हर जिले में हॉकी एस्ट्रो टर्फ ग्राउंड है और उनमें परमानेंट कोच अपॉइंट हैं।
  • पंजाब में तो हर जिले में हॉकी ओलंपियन को जिम्मेदारी सौंप दी गई है। जिसके लिए उन्हें एक लाख रुपए महीना सम्मान निधि दी जा रही है।

एमपी में हॉकी, शूटिंग और वॉटर स्पोर्ट्स में बहुत काम हुआ

वाईएस चौहान ने कहा कि एमपी में भी टैलेंट की कमी नहीं है पिछले कुछ वर्षों में हॉकी में बहुत कम हुआ है हॉकी के एस्ट्रो टर्फ कई जिलों में लगाए गए हैं। वॉटर स्पोर्ट्स में एमपी का अच्छा नाम है। भोपाल देश की टीम का ट्रेनिंग सेंटर (National Training Center)बन गया है। एमपी शूटिंग अकादमी से खिलाड़ी निकलने शुरू हो गए हैं। शूटर एश्वर्य प्रताप सिंह तोमर दो बार ओलंपिक खेल चुके हैं।

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एमपी में ग्रासरूट लेवल पर काम की दरकार

उन्होंने बताया कि एमपी में ग्रासरूट लेवल पर काम करने की जरूरत है। यह मानते हैं कि हरियाणा की तुलना में एमपी काफी बड़ा प्रदेश है। हम हरियाणा की बेसिक पॉलिसी (Basic Policy)को अपना सकते हैं। जिसमें ग्राउंड की फैसिलिटी से लेकर अच्छे कोच। उनकी अच्छी सैलरी और ज्यादा से ज्यादा खेल स्पर्धाएं...। जिससे बच्चों को कॉम्पटिशन मिल सके... करना होगा। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी को पता होना चाहिए कि नेशनल या इंटरनेशनल टूर्नामेंट जीतने पर उसे ये इनाम (नगद राशि) और इस स्तर का जॉब मिलेगा... यह स्पष्ट होना चाहिए ।
चौहान ने यहां तक कहा कि विभिन्न खेल मैदानों में पदस्थ कोच की कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट बनानी चाहिए, जिससे उनकी मेहनत का उचित आकलन हो सके।

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