National Monetisation Pipeline: छह लाख करोड़ रुपये की लागत से होगा राष्ट्रीय मौद्रिकरण योजना का कार्य, जानिए क्या-क्या रहेगा खास

Nirmala Sitharaman

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को छह लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय मौद्रिकरण योजना National Monetisation Pipeline (एनएमपी) की घोषणा की। इसके तहत यात्री ट्रेन, रेलवे स्टेशन से लेकर हवाई अड्डे, सड़कें और स्टेडियम का मौद्रिकरण शामिल हैं। इन बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में निजी कंपनियों को शामिल करते हुए संसाधन जुटाये जायेंगे और संपत्तियों का विकास किया जायेगा।

निजी निवेश हासिल करने के लिए चेन्नई, भोपाल, वाराणसी एंव वडोदरा सहित भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (एएआई) के करीब 25 हवाई अड्डे, 40 रेलवे स्टेशनों, 15 रेलवे स्टेडियम और कई रेलवे कॉलोनी की पहचान की गयी है। इन्हें निजी क्षेत्र के निवेश से विकसित किया जायेगा। योजना के National Monetisation Pipeline तहत, निजी कंपनियां इन्विट मार्ग का इस्तेमाल करके एक निश्चित मुनाफे के लिए परियोजनाओं में निवेश कर सकती हैं।

इसके अलावा इन परिसंपत्तियों को सरकारी एजेंसी को वापस करने से पहले एक निश्चित अवधि के लिए परिसंपत्तियों का संचालन और विकास कर सकती हैं। इसके तहत गोदाम और स्टेडियम जैसी कुछ संपत्तियां भी संचालन के लिए लंबी अवधि National Monetisation Pipeline के पट्टे पर दी जा सकती हैं।

सीतारमण ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘संपत्ति मौद्रिकरण पाइपलाइन के जरिये एनआईपी (नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन) को अगले चरण में ले जाया गया है, जहां आप सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) पर ध्यान देंगे।’

उन्होंने यह भी कहा कि संपत्तियों के मौद्रिकरण में जमीन को बेचा नहीं जायेगा। ‘एनएमपी ब्राउनफील्ड (मौजूदा) बुनियादी ढांचा संपत्तियों से संबंधित है जहां निवेश पहले हो चुका है, जहां एक पूर्ण संपत्ति है जो या तो बेकार पड़ी है या जिसमें संभावनाओं का पूरा निवेश नहीं पाया है या National Monetisation Pipeline जिसका क्षमता के अनुरूप इस्तेमाल नहीं हुआ है।’

वित्त मंत्री ने कहा, ‘इसलिए इसमें निजी भागीदारी लाकर, हम इसका बेहतर तरीके से मौद्रिकरण करने में सक्षम होंगे, और इसके माध्यम से हासिल होने वाले संसाधनों का बुनियादी ढांचे में और निवेश करने में National Monetisation Pipeline सक्षम होंगे।’ एनएमपी के तहत वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2025 तक चार साल की अवधि में केंद्र सरकार की मुख्य संपत्तियों के माध्यम से छह लाख करोड़ रुपये की निवेश संभावनाओं का अनुमान है।

उन्होंने कहा, ‘बुनियादी ढांचा एनएमपी National Monetisation Pipeline में पहले से मौजूद संपत्तियों की बात की जा रही है जिनका बेहतर मौद्रिकरण करने की जरूरत है। संपत्ति का स्वामित्व सरकार के पास बना रहेगा और एक निश्चित समय के बाद उनका नियंत्रण लौटाना अनिवार्य होगा।’

सीतारमण ने कहा, ‘इसलिए ऐसी कोई अस्पष्टतता नहीं रहनी चाहिए कि सरकार कुछ बेच रही है। ऐसा नहीं है। ये मौजूदा संपत्तियां हैं जिनपर सरकार का स्वामित्व बना रहेगा।’ मौद्रिकरण योजना का आधे से अधिक हिस्सा सड़क और रेलवे क्षेत्र से जुड़ा है। इसके तहत 1.6 लाख करोड़ रुपये का सबसे बड़ा हिस्सा इस समय चालू राष्ट्रीय राजमार्गों और नयी सड़कों के 26,700 किलोमीटर के मौद्रिकरण से आएगा। इनमें से कुछ संपत्तियों के मुद्रीकरण के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इन्विट (इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) National Monetisation Pipeline का रास्ता अपनाएगा। यानी इनविट के जरिये इन राजमार्गों के लिये संसाधन जुटाये जायेंगे।

अनुमानित 1.2 लाख करोड़ रुपये के मौद्रिकरण परियोजना में 400 रेलवे स्टेशनों, 90 यात्री ट्रेनों, 741 किलोमीटर लंबे कोंकण रेलवे और 15 रेलवे स्टेडियमों और कॉलोनियों का मौद्रिकरण करने की योजना है। निजी भागीदारी के जरिये इनका विकास किया जायेगा। बिजली के 28,608 सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइनों के मौद्रिकरण से 45,200 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है और अन्य 39,832 करोड़ रुपये छह गीगावाट की विद्युत उत्पादन संपत्तियों से आएंगे।

दूरसंचार क्षेत्र में भारतनेट फाइबर के 2.86 लाख किलोमीटर और बीएसएनएल एवं एमटीएनएल के 14,917 सिग्नल टावरों के मौद्रिकरण से 35,100 करोड़ रुपये मिलेंगे। इसी प्रकार गोदामों और कोयला खदानों में मौद्रिकरण से 29,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा। वहीं 8,154 किलोमीटर लंबे प्राकृतिक गैस पाइपलाइनों National Monetisation Pipeline के मौद्रिकरण से 24,462 करोड़ रुपये और 3,930 किलोमीटर उत्पाद पाइपलाइनों के मौद्रिकरण से 22,504 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है।

हवाई अड्डों के मौद्रिकरण से 20,782 करोड़ रुपये और बंदरगाहों से 12,828 करोड़ रुपये मिलेंगे। नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम सहित दो राष्ट्रीय स्टेडियम और बेंगलुरू एवं जीरकपुर में स्थित दो क्षेत्रीय केंद्रों के मौद्रिकरण से 11,450 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। दिल्ली में National Monetisation Pipeline सरोजिनी नगर एवं नौरोजी नगर सहित सात आवासीय कॉलोनियों के पुनर्विकास और साथ ही घिटोरनी में 240 एकड़ भूमि पर आवास/वाणिज्यिक इकाइयों के विकास से भी 15,000 करोड़ रुपये जुटाए जाने का आकलन है।

ईवाई इंडिया में ढांचागत क्षेत्र पर नजर रखने वाली भागीदार अभ्या अग्रवाल ने योजना की घोषणा को लेकर कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में मौजूदा ढांचागत संपत्तियों के छह लाख करोड़ रुपये के चार साल की राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन से निश्चित रूप से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा। योजना National Monetisation Pipeline के तहत संख्या, आकार और संपत्ति के प्रकार को लेकर स्पष्टता से निवेशकों को आगे बढ़ने का विश्वास मिलेगा।

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