Natara Pratha: सुली डील्स और बुल्ली बाई ऐप की तरह यहां भी सदियों से महिलाओं की होती है नीलामी!

Natara Pratha

Natara Pratha: हाल ही मीडिया की सुर्खियों में एक ऐप काफी चर्चाओं में था इस ऐप का नाम है ‘बुल्ली बाई’। जहां वैचारिक मवाद से ग्रसित कुछ लोग महिलाओं की ऑनलाइन बोली लगाते थे। इससे पहले भी सुल्ली डील्स नाम के एक ऐप के जरिए यही काम किया जाता था। इसी कड़ी में आज हम आपको एक ऐसी ही कुप्रथा के बारे में बताने जा रहे हैं जो सदियों से चली आ रही है। इस कुप्रथा का नाम है ‘नातरा’ (Natara Pratha)।

हजारों महिलाएं पीड़ित हैं

ऑनलाइन डील की तरह ही इस कुप्रथा में भी महिलाओं को बेचा जाता है। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में आज भी महिलाएं इस कुप्रथा का शिकार होती हैं। राजस्थान से लगने वाले राजगढ़ जिले में इस कुप्रथा से हजारों महिलाएं पीड़ित हैं। दरअसल, मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में आज भी कई मां-बाप बच्चों की शादी बचपन में ही तय कर देते हैं, जब बच्चे समझदार या बालिग होते हैं, तो उन्हें ये रिश्ता मंजूर नहीं होता है।

शादी के बाद लड़का, लड़की को छोड़ देता है

ज्यादातर मामलों में लड़का लड़की को छोड़ देता है। जब ये रिश्ता टूट जाता है तो उसके बाद लड़की का संबंध दूसरे लड़के के साथ तय कर दिया जाता है। या उसे जबरन भेज दिया जाता है। इसी को नातरा प्रथा की श्रेणी में रखा जाता है। इस प्रथा के अनुसार लड़की का पहला पति, लड़की पक्ष से पैसों की मांग करता है और उसे चुकाना भी पड़ता है। यह राशि 5 लाख से लेकर 25-30 लाख तक तय होती है। इस पूरे प्रकरण में लड़की की क्या मर्जी है इसका कोई ख्याल नहीं रखा जाता है।

मर्जी से शादी तोड़ने पर भी देने पड़ते हैं पैसे

पहले पति के पैसे मांगने के बाद पंचायत पूरे मामले को निपटाने के लिए बैठती है और फिर राशि पंचायत खुद तय करती है कि लड़की पक्ष को कितनी राशि देनी होगी। नतारा प्रथा में वे महिलाएं भी आती हैं, जो अपनी मर्जी से पहली शादी तोड़कर दूसरी शादी करना चाहती है। अगर वो ऐसा करती हैं, तो इस मामले में भी पहले पति द्वारा पैसे की मांग की जाती है।

इस वजह से शुरू की गई थी प्रथा

कहा जाता है नातरा प्रथा को विधवाओं व परित्‍यक्‍ता स्त्रियों को सामाजिक जीवन जीने के लिए मान्‍यता देने के लिए बनाया गया था जिसे आज भी माना जाता है। इस प्रथा में पॉच गांव के पंचों द्वारा पहली शादी के दौरान जन्‍मे बच्‍चे या फिर अन्‍य मुद्दों पर चर्चा कर निपटारा किया जाता है ताकि बाद में दोनों के जीवन में इन बातों से कोई मतभेद न हों। इस प्रथा की वजह से वहां की महिलाओ और पुरूषों को तलाक के कानूनी झंझटों से मुक्ति मिल जाती है और उनको अपनी पसंद का जीवन साथी भी मिल जाता है। हालांकि यह प्रथा जीस मंशा से बनाई गई थी, आज इसके उलट हो रहा है।

लड़की की जिंदगी हो रही है बर्बाद

पति जानबूझकर पत्नी से झगड़ता है और उसे घर छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। जब लड़की अपने मायके जाती है तो कोई भी पिता ब्याही बेटी को घर में नहीं रखना चाहता। ऐसे में वो किसी और से उसकी शादी करना चाहता है। जब रिश्ता तय हो जाता है। तो इसी क्रम में पहला पति जातरा करने के लिए लड़की के घरवालों पर दवाब बनाता है और पैसों की मांग करता है। कुल मिलाकर यह प्रथा जीस सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखने के लिए शुरू की गई थी, आज यह कमाई का जरिया बन गई है और इसमें एक लड़की की जिंदगी बर्बाद हो जाती है।

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