Narmada Living Unit Status: नर्मदा नदी को 7 साल में भी नहीं मिल सका जीवित इकाई का दर्जा, जानें कितना कम हुआ जलस्तर

Narmada Living Unit Status: 3 मई 2017 को नर्मदा नदी को जीवित इकाई का दर्जा देने के लिए विधानसभा में संकल्प पारित किया गया।

Narmada Living Unit Status: नर्मदा नदी को 7 साल में भी नहीं मिल सका जीवित इकाई का दर्जा, जानें कितना कम हुआ जलस्तर

   हाइलाइट्स

  • 3 मई 2017 को विधानसभा का किया था संकल्प पारित
  • वर्ष 2015-16 में नर्मदा को बचाने हुई तीन दिन की वर्कशॉप
  • नदी के जलस्तर और प्रवाह में हो रही है लगातार कमी

Narmada Living Unit Status: मां नर्मदा के संरक्षण के लिए मध्य प्रदेश में जिम्मेदारों ने कई बड़े-बड़े वादे किये, पर ये कोरे वादे ही रहे। सात साल में भी नर्मदा नदी को जीवित इकाई का दर्जा (Narmada Living Unit Status) नहीं मिल सका। उल्टा इसके जलस्तर में में गिरावट और हो गई है। यानी नर्मदा में लगातार पानी कम हो रहा है।

   जीवित इकाई का दर्जा दिलाने विधानसभा में संकल्प पारित

3 मई 2017 को नर्मदा नदी को जीवित इकाई का (Narmada Living Unit Status) दर्जा देने के लिए विधानसभा में संकल्प पारित किया गया।

इस दौरान तत्कालीन पर्यावरण मंत्री अंतर सिंह आर्य ने विधानसभा में नर्मदा नदी को जीवित इकाई का दर्जा देने का संकल्प रखा था।

   भारत सरकार को जानकारी भेजने के बाद सब भूले

नर्मदा नदी को जीवित इकाई का कानूनी दर्जा देने का अधिकार भारत सरकार के पास है। इसलिए मध्य प्रदेश विधानसभा ने संकल्प पारित होने के बाद वर्ष 2017 में ही इसे कानूनी अमलीजामा पहनाने के लिये भारत सरकार को भेज दिया।

Narmada Living Unit Status anter singh aarya

उसके बाद इसे सब भूल गए। नतीजा 7 साल के बाद भी नदी को जीवित इकाई (Narmada Living Unit Status) का दर्जा नहीं मिला।

   जीवित इकाई का दर्जा मिलता तो ये होता फायदा

कानून बनने के बाद नदी को जीवित व्यक्ति (Narmada Living Unit Status) के सभी अधिकार मिलते। इसका मतलब नदी में प्रदूषण फैलाने या नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ नदी के नाम से ही FIR दर्ज होती।

इसके लिए प्राधिकृत अधिकारी तैनात किया जाते या फिर किसी संस्था को अधिकार दिए जाते। सतत मॉनिटरिंग होने से नदी में हो रहे अवैध खनन पर लगाम लगती, इसे प्रदूषण से भी बचाया जा सकता था।

   तीन दिनों तक हुए मंथन का नतीजा जीरो

वर्ष 2015-16 में नर्मदा के संरक्षण के लिये भोपाल की प्रशासन अकादमी में वर्कशॉप का आयोजन हुआ। जिसमें देशभर के पर्यावरणविद् और साइंटिस्ट ने नर्मदा को बचाने के लिये तीन दिनों तक मंथन किया, लेकिन इसमें दी गई अनुशंसाएं कभी लागू ही नहीं हुई।

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   सांडिया में 3 साल में 1.39 मीटर तक कम हुआ जलस्तर

नर्मदा का जलस्तर कितना कम हो रहा है, यह जानने के लिए 2019 से 2021 तक के आंकड़े जुटाये गए। सांडिया में नर्मदा का जलस्तर 3 साल में 1.29 मीटर तक कम हो गया। 31 अक्टूबर 2019 में यह 300.74 मीटर था, 2020 में यह 299.93 मीटर हुआ, जो 2021 में गिरकर 299.35 मीटर तक पहुंच गया।

Narmada Living Unit Status 01

नर्मदापुरम में इन्हीं तीन सालों में 0.65 मीटर की कमी आई। 2019 में यहां नर्मदा का जलस्तर 285.15 मीटर था, 2020 में 284.8 और 2021 में 284.5 मीटर पर पहुंच गया। मंडला में इन्हीं 3 सालों में 0.33 मीटर और बरमान घाट में 0.25 मीटर की गिरावट देखी गई।

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   तीन साल में ही 31% तक प्रवाह में आई कमी

नर्मदा नदी के प्रवाह में लगातार कमी आ रही है। मात्र तीन साल में यह कमी 20 से 31% तक आई है। सच्चाई का पता लगाने नर्मदा नदी के तीन प्रमुख स्थान बरमान घाट, सांडिया और होशंगाबाद में नदी के प्रवाह का पता लगाया।

सभी आंकड़े मानसून के जाने के बाद के हैं। 31 अक्टूबर 2019, 2020 और 2021 के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि नर्मदा नदी का जल प्रवाह तेजी से कम हुआ है।

बरमान घाट पर यह क्रमशः 284 घनमीटर/सेकंड, 118 घनमीटर/सेकंड और 87.3 घनमीटर/सेकंड रहा। इसी तरह सांडिया में नर्मदा नदी का जल प्रवाह 679.2, 290.7, 112.6 घनमीटर/सेकंड रहा।

नर्मदापुरम में 2019 में 640.1 घनमीटर/सेकंड, 2020 में 210 घनमीटर/सेकंड और 2021 में यह घटकर 129 घनमीटर/सेकंड हो गया।

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