Narendra Singh Tomar: MP के मुन्ना भैया की कहानी, जिनके बारे में कहा जाता है कि ‘तोलकर जो बोलो सो तोमर’

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भोपाल। (Birthday Special Narendra Singh Tomar) मध्य प्रदेश और केंद्र की राजनीति में तेजी से उभरे केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का आज 64वां जन्मदिन है। उन्हें लोग प्यार से मुन्ना भैया भी कहते हैं। तोमर जिस चंबल और ग्वालियर क्षेत्र से आते हैं। उसे लेकर कहा जाता है कि वहां के पानी की तासीर ही कुछ ऐसी है कि हर व्यक्ति के नाक पर गुस्सा चढ़कर बोलता है। लेकिन नरेंद्र सिंह तोमर इसके उल्ट हैं। उन्हें गुस्सा होते किसी ने नहीं देखा। हर कठिन से कठिन घड़ी में भी वह शांत रहते हैं। ऐसे में आज आईए जानते हैं उनके राजनीतिक करियर के बारे में साथ ही छात्र राजनीति से लेकर केंद्रीय मंत्री बनने तक का उनका सफर कैसा रहा?

‘तोलकर जो बोले सो तोमर’

मुन्ना भईया को लेकर एक कहावत काफी मशहूर है, ‘तोलकर जो बोले सो तोमर’। यानी बिना मतलब के वो कुछ नहीं बोलते। गैर राजनीतिक परिवार से आने वाले तोमर के जीवन का टर्निंग प्वाइंट आपातकाल का समय था, जब वे जयप्रकाश नारायण से प्रभावित होकर देशव्यापी आंदोलन में शामिल हो गए। उनकी पढ़ाई तक छूट गई। जेल भी जाना पड़ा। लेकिन जेपी से वे इतने प्रभावित थे कि पीछे नहीं हटे। जेल में तोमर साथी कैदियों के हाथ पढ़ा करते थे और भविष्य बताते थे। उनके इस कला ने जेल में भी उन्हें लोकप्रिय बना दिया था। कैदी उनके पास आया करते थे और उनसे अपना भविष्य पूछा करते थे।

छात्र जीवन से राजनीति की शरूआत

वैसे तो नरेंद्र सिंह तोमर ने छात्र जीवन से ही राजनीति की शुरूआत कर दी थी। और सबसे पहले एसएलपी कॉलेज के अध्यक्ष बने थे। लेकिन जब ग्वालियर राजघराने की राजमाता विजयाराजे सिंधिया से उनकी मुलाकात हुई, उसके बाद मानों उनकी चांदी हो गई। राजमाता ने ही तोमर को सबसे पहले ग्वालियर विधानसभा से उम्मीदवार बनाया था, हालांकि तोमर तब बाबू रघुवीर सिंह से 600 वोटों से हार गए थे। लेकिन उन्होंने जिस तरह से इस चुनाव में प्रचार किया था वो बीजेपी आलाकमान की नजरों में वहीं से आ गए थे।

रात 12 बजे तक लोग उन्हें सुनते रह गए थे

कहा जाता है कि उन दिनों पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी गिर्द में चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे थे। उन्हें पहुंचते-पहुंचते रात हो गई। ऐसे में आयोजकों को लगने लगा कि सभा में आए लोग भाग जाएंगे। लेकिन तभी नरेंद्र सिंह तोमर मंच की कमान संभाल ली और डेढ़ घंटे तक धाराप्रवाह भाषण दिया। लोग रात 12 बजे तक उन्हें सुनते रहे। ये वहीं समय था जब उनकी भाजपा की राजनीति में चर्चा होने लगी थी।

तोमर ने अपने करियर में पीछे मुड़कर नहीं देखा

इस चुनाव के बाद नरेंद्र सिंह तोमर ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे 1986 से 1990 तक युवा मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष रहे। इसके बाद उन्हें प्रदेश में संगठन मंत्री का दायित्व दिया गया और 1998 में वे पहली बार ग्वालियर से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। 2003 में फिर से एक बार उन्होंने ग्वालियर के किले को फतह किया और उमा भारती की सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला। इसके बाद वे बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान की सरकार में मंत्री रहे। इतना ही नहीं कुशल रणनीतिकार होने के कारण उन्हें पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया। साल 2007-09 तक वे राज्यसभा सदस्य भी रहे। 2009 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें मुरैना लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया और वे जीतकर संसद पहुंच गए।

इसके बाद साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें पार्टी ने ग्वालियर संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया। यहां से भी उन्होंने जीत दर्ज की। मोदी मंत्रिमंडल में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया। अपने सरल स्वभाव और कुशल रणनीति के कारण वे मोदी के सबसे भरोसेमंद मंत्री बन गए। वर्तमान में तोमर केंद्रीय कृषि मंत्री हैं।

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