Narcissistic Personality Disorder : क्या स्वयं से अत्यधिक प्यार एक मानसिक रोग है?

Narcissistic Personality Disorder : क्या स्वयं से अत्यधिक प्यार एक मानसिक रोग है?

(Dr. Satyakant Trivedi) : पिछले कुछ दिनों से आत्म मुग्धता पर बड़ी तेजी से चर्चा हो रही है। हालांकि स्वयं से प्यार करना लगभग हम सबमें होना सामान्य बात है लेकिन कई बार यह स्नेह इतना ज्यादा हो जाता है कि स्वयं या दूसरे के लिए समस्या का कारण बनता है। हमने इसी मनोविज्ञान को समझने के लिए ख्यातिलब्ध साइकेट्रिस्ट डॉ सत्यकांत त्रिवेदी (Psychiatrist in Bhopal) से बातचीत करते हुए नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Narcissistic Personality Disorder) को समझा। डॉ त्रिवेदी कहते हैं कि यह एक प्रकार का व्यक्तित्व विकार ( personality disorder) है जिसमें व्यक्ति अति आत्म मुग्धता से ग्रसित हो जाता है और उसकी सोच अपने ही इर्द गिर्द घूमती है ।

डिसऑर्डर की पहचान बड़ी सरलता से की जा सकती है। ऐसे व्यक्ति दूसरों की बिलकुल परवाह नहीं करते। स्वयं को सर्वश्रेष्ठ समझते हैं। हालांकि कई शोध इनके इस व्यवहार को अपनी असुरक्षाओं के प्रति अनुकूलन मानते हैं । उनमें आत्मसम्मान की भी कमी होती है। वो हर किसी का ध्यान और प्रशंसा पाना तो चाहते हैं लेकिन, उसके लिए वो किसी से मित्रवत व्यवहार बनाने में अक्सर असफल रहते हैं।  अति आत्ममुग्धता, अभिमान, घमंड को ऐसे लोग क्रमशः आत्मविश्वास, स्वाभिमान और गर्व के रूप में महिमामंडित करते हैं। प्रोफेशनल रूप से ये लोग कई बार बेहद सफ़ल हो सकते हैं। ये आत्मविश्वास से भरपूर दिखते  हैं और लेकिन वो अंदर से बहुत नाजुक होते हैं।

अपनी आत्म मुग्धता को सम्मान न मिलने पर कई बात ये काफी उग्र हो जाते हैं जिसे नार्सिसिस्टिक इंजरी कहा जाता है। इस समस्या  से ग्रस्त व्यक्ति अपने आसपास के लोगों को  को बहुत कष्ट  देते  हैं । इन्हें ऐसा लगता है कि बहुत से लोग इनसे ईर्ष्या करते हैं  लेकिन इसके उलट ईर्ष्या,द्वेष ,तुलना करना इनके व्यवहार का लाक्षणिक गुण होता है। किसी और की भावनाओं को न समझना/अवहेलना करना इनके लिए बेहद सामान्य बात होती है। इनके स्वयं पर अत्यधिक ध्यान देने, प्रशंसा सुनने के लिए आतुरता , सबके जीवन में अत्यधिक नियंत्रित करने की चाहत , दूसरों के रहन-सहन, रिश्ते पर पैनी  नज़र रखना और उनमे कमियां निकालना ताकि उन्हें अपने से कमतर साबित कर सकें, दूसरों का मज़ाक उड़ाना  कुछ सामान्य लक्षण है जो इस डिसऑर्डर की तरफ इंगित करते हैं। ये अपने आसपास ऐसे लोगों की भीड़ चाहते हैं जो की इनकी तारीफ़ करें, इन्हें फॉलो करें।

कारणों के बारे में चर्चा करते हुए डॉ त्रिवेदी (Dr. Satyakant Trivedi) ने बताया कि नार्सिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Narcissistic Personality Disorder) की उत्पत्ति के पीछे मिल जुले कारण बताये गये हैं .पेरेंट्स में इस डिसऑर्डर का होने से इसका खतरा काफी बढ़ जाता है,मतलब आनुवंशिक। माता-पिता द्वारा हमेशा टोका जाना, हमेशा अत्यधिक प्रशंसा/अत्यधिक आलोचना  पाना,अपने कार्य पर दूसरों की प्रतिक्रिया के प्रति उत्सुकता ,अत्यधिक कड़क पैरेंटिंग, गर्मजोशी का अभाव  या बचपन के कटु अनुभव इस  डिसऑर्डर होने के कुछ कारण हो सकते हैं।

विडंबना इस बात की है कि इन्हें अपनी इस समस्या का आत्मबोध नहीं होता .हमारे पास ऐसे केसेस डिप्रेशन,रिश्तों में कड़वाहट के रूप में आते हैं और विश्लेषण के दौरान इस डिसऑर्डर का पता चलता है ।

डॉ सत्यकांत त्रिवेदी (Dr. Satyakant Trivedi) वरिष्ठ मनोचिकित्सक हैं जो बंसल अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

Share This

0 Comments

Leave a Comment

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Lost Password