Nag Panchami: आज रात खुलेंगे इस मंदिर के कपाट, 1 साल में 24 घंटे होते हैं दर्शन, भक्‍तों को मिलती सर्प दोष से मुक्ति!

Nag Panchami Nagchandreshwar Temple In Ujjain: उज्जैन के नागचन्‍द्रेश्‍वर मंदिर के कपाट खुलने का समय आ गया है।

Nag Panchami: आज रात खुलेंगे इस मंदिर के कपाट, 1 साल में 24 घंटे होते हैं दर्शन, भक्‍तों को मिलती सर्प दोष से मुक्ति!

Nag Panchami Nagchandreshwar Temple In Ujjain: उज्जैन के नागचन्‍द्रेश्‍वर मंदिर के कपाट खुलने का समय आ गया है।

इस मंदिर के कपाट 1 साल में केवल एक बार और मात्र 24 घंटों के लिए खोले जाते हैं। साल भर से जो भी भक्‍त भगवान नागचन्‍द्रेश्‍वर के दर्शन का इंतजार कर रहे हैं।

उनका ये इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है और उनको भगवान नागचन्‍द्रेश्‍वर के दर्शन होने वाले है। आपको बता दें श्रद्धालुओं के लिए 9 अगस्त के दिन का विशेष महत्‍व है।

इस निद नागपंचमी है और इसी दिन पर नागचन्‍द्रेश्‍वर मंदिर मंदिर के कटाप खोले जायेंगे।

आज रात खुलेंगे मंदिर के कपाट

इस बार नागपंचमी के दिन नागचन्‍द्रेश्‍वर महादेव के 9 अगस्त शुक्रवार को लगातार 24 घंटे तक दर्शन होने वाले हैं।

उज्जैन कलेक्टर ने इसकी जानकारी देते हुए बताया है कि 8 अगस्‍त गुरुवार यानी आज रात 12 बजे से नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खोल दिये जायेंगे।

कपाट खुलने के बाद रात 12 बजे नागचन्‍द्रेश्‍वर महादेव की विशेष पूजा-अर्चना मंदिर के पुजारियों के द्वारा की जाएगी। पूजा-अर्चना के बाद से ही भगवान नागचन्‍द्रेश्‍वर के दर्शन भक्‍तों को होना शुरू हो जाएंगे।

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नागचन्‍द्रेश्‍वर मंदिर के कपाट 8 अगस्त गुरुवार की रात 12 बजे खुलकर अगले दिन शुक्रवार 9 अगस्‍त रात 12 बजे बंद कर दिए जाएंगे।

महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी ने बताया है कि हिंदू परंपरा में नागों को भगवान शिव का आभूषण भी माना गया है। हिंदू धर्म में सदियों से नागों की पूजा करने की परंपरा रही है।

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क्यों खास है नागचंद्रेश्वर मंदिर

आपको जानकारी के लिए बता दें कि उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के तीसरी मंजिल में ही नागचंद्रेश्वर मंदिर स्थित है। इस मंदिर में नागचंद्रेश्वर महादेव विराजमान है।

ये विश्‍व का एकलौता मंदिर माना जाता है जहां पर भोलेनाथ दशमुखी सर्प के आसन में शिव जी, मां पार्वती और अपने अपने पूरे परिवार के साथ विराजित (Nag Panchami Nagchandreshwar Temple In Ujjain) है।

यह मूर्ति करीब 11वीं शताब्दी की बताई जाती है। इस मूर्ती के पीछे की कहानी में बताया जाता है कि परमार राजा भोज ने 1050 ईस्वी में इस मंदिर को बनवाया था।

इसके साथ ही इस अद्भुत मूर्ति को नेपाल से लाया गया था। इसके बाद सिंधिया घराने के महाराज राणोजी सिंधिया से 1732 ईं में इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया था।

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दर्शन करने मात्र से मिलती है कालसर्प दोष से मुक्ति

पौराणिक मान्यताओं की मानें तो अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में सर्प दोष, कालसर्प दोष है, तो उसके लिए ऐसा बताया जाता की वह नाग पंचमी के दिन नागचंद्रेश्वर मंदिर में आकर दर्शन कर लें और विधिवत पूजा करे। ऐसा करने से उसकी कुंडली में सर्प दोष और काल सर्प दोष से मुक्ति मिल जाती है।

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सामान्य सूचनाओं पर आधारित है। बंसल न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले विशेषज्ञों की सलाह जरूर लें। ये खबर मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक है। इसे लेकर हम किसी भी प्रकार का दावा या पुष्‍टी नहीं करते हैं।

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