Mustard Greens Growing Tips: सर्दियों से पहले घर में उगाएं सरसों का साग, सिर्फ 30 दिन में होगा तैयार, जानें कैसे

Sarson Ka Saag Ugane Ka Tarika: सर्दियों के मौसम की जब भी बात आती है तो सरसों के साग की याद आ ही जाती है। ठंड आते ही खाने की थाली में सरसों का साग का मज़ा ही अलग होता है।

Mustard Greens Growing Tips: सर्दियों से पहले घर में उगाएं सरसों का साग, सिर्फ 30 दिन में होगा तैयार, जानें कैसे

Sarson Ka Saag Ugane Ka Tarika: सर्दियों के मौसम की जब भी बात आती है तो सरसों के साग की याद आ ही जाती है। ठंड आते ही खाने की थाली में सरसों का साग का मज़ा ही अलग होता है। इसकी खासियत यह है कि इसे घर पर गमले में भी बहुत आसानी से उगाया जा सकता है। अक्टूबर से फरवरी तक का समय सरसों का साग लगाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि ठंडी जलवायु में यह तेजी से ग्रो करता है। अगर आप अभी से इसकी बुआई कर देते हैं, तो यह करीब 25 से 30 दिनों के भीतर तैयार होकर खाने के लिए तैयार हो जाएगा।

गर्मी के मौसम में सरसों की पत्तियां अक्सर पीली पड़ जाती हैं, इसलिए गर्मी में इसकी खेती मुश्किल मानी जाती है। लेकिन अगर आप सही मौसम, सही मिट्टी और थोड़ी देखभाल करें, तो घर पर ही गमले में ताज़ा और हरा-भरा सरसों का साग उगा सकते हैं।

गमले में सरसों का साग उगाने की आसान विधि

1. गमले का चुनाव

[caption id="attachment_903421" align="alignnone" width="776"]publive-image गमले का चुनाव[/caption]

सरसों का साग उगाने के लिए कम से कम 8 से 10 इंच गहराई वाला गमला चुनें। चौड़े गमले का उपयोग करना सबसे बेहतर होता है, क्योंकि पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखने से वे अच्छी तरह फैल पाते हैं।

2. मिट्टी की तैयारी

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सरसों का साग लगभग हर तरह की मिट्टी में उग सकता है, लेकिन बलुई दोमट मिट्टी (Loamy Soil) इसके लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। सबसे पहले मिट्टी को अच्छी तरह से छानकर उसमें से पत्थर या कठोर तत्व हटा दें। इसमें वर्मी कम्पोस्ट या गोबर की सड़ी हुई खाद मिलाएँ। इससे मिट्टी उपजाऊ बनेगी और पौधों को शुरुआती पोषण मिलेगा। मिट्टी को गमले में भरने के बाद उसमें हल्की-सी लाइनें (rows) बना लें, ताकि बीज डालना आसान हो।

3. बीज बोने की विधि

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सरसों के बीज बहुत छोटे होते हैं, इसलिए इन्हें गहराई में दबाने की बजाय सतह से लगभग 1 से 1.5 सेंटीमीटर नीचे बोना चाहिए। लाइनों में थोड़ी दूरी रखकर बीज छिड़कें और ऊपर से हल्की मिट्टी डाल दें। इसके बाद हल्का-सा पानी छिड़कें, जिससे बीज नम रहें और जल्दी अंकुरित हो सकें।

4. सिंचाई (Watering)

[caption id="attachment_903424" align="alignnone" width="763"]publive-image सिंचाई[/caption]

सरसों के पौधों को रोजाना हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है। ध्यान रहे कि गमले में पानी जमा न हो, वरना जड़ें सड़ सकती हैं, अगर मिट्टी बहुत सूखी लगे तो ही पानी दें, नमी बनाए रखना सबसे जरूरी है।

5. धूप और तापमान

[caption id="attachment_903410" align="alignnone" width="780"]publive-image धूप और तापमान[/caption]

सरसों का पौधा सही विकास के लिए कम से कम 4–5 घंटे की सीधी धूप चाहता है। सर्दियों में इसे बाहर धूप वाली जगह पर रखें। अगर मौसम बहुत ज्यादा ठंडा हो तो गमले को ऐसी जगह पर रखें, जहाँ हल्की धूप और पर्याप्त हवा मिल सके।

6. पौधों की देखभाल

[caption id="attachment_903416" align="alignnone" width="777"]publive-image पौधों की देखभाल[/caption]

पौधे जैसे-जैसे बड़े हों, वैसे-वैसे उनमें खरपतवार साफ करते रहें। पत्तियाँ काटते समय ध्यान रखें कि जड़ और मुख्य तना सुरक्षित रहे। इससे पौधे से दोबारा नई पत्तियाँ निकलती रहेंगी। जैविक खाद (जैसे गोबर की खाद या घर की किचन वेस्ट से बनी खाद) हर 15 दिन में थोड़ी मात्रा में डालते रहें।

कब करें फसल की कटाई?

बुआई के लगभग 25–30 दिनों बाद सरसों का साग खाने योग्य हो जाता है। पत्तियाँ मुलायम और हरी हों तभी उन्हें तोड़ें। नियमित रूप से पत्तियाँ तोड़ते रहने से पौधा ज्यादा समय तक नई पत्तियाँ देता रहेगा।

क्यों खास है घर में उगाया सरसों का साग?

  • बाजार में मिलने वाली पत्तियों की तुलना में यह ज्यादा ताज़ा और पौष्टिक होता है।
  • इसमें किसी तरह के केमिकल या पेस्टिसाइड का इस्तेमाल नहीं होता।
  • घर की बालकनी, टैरेस या किचन गार्डन में छोटे स्तर पर भी इसे आसानी से उगाया जा सकता है।

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