MPPSC Topper Success Story: टूटी हड्डी के बाद भी इंटरव्यू में पहुंचे और मेरिट में पाया पहला स्थान, कहानी MPPSC टॉपर की

MPPSC 2024 Himanshu Soni Success Story: हड्डी टूटने के बाद भी एंबुलेंस से इंटरव्यू देकर हिमांशु सोनी ने एमपीपीएससी दिव्यांग मैरिट में पहला स्थान पाया।

MPPSC Topper Success Story: टूटी हड्डी के बाद भी इंटरव्यू में पहुंचे और मेरिट में पाया पहला स्थान, कहानी MPPSC टॉपर की

हाइलाइट्स

  • एंबुलेंस से पहुंचे इंटरव्यू देने हिमांशु

  • एमपीपीएससी में दिव्यांग वर्ग में पहला स्थान

  • सामान्य वर्ग में भी मेरिट लिस्ट में 13वां रैंक

MPPSC 2024 Himanshu Soni Success Story: जिंदगी की राह में आने वाली मुश्किलें इंसान को तोड़ भी देती हैं और गढ़ भी देती हैं। जबलपुर के दिव्यांग हिमांशु सोनी ने साबित किया कि जज्बा हो तो हालात भी हार मान लेते हैं। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) 2024 की परीक्षा में उन्होंने न सिर्फ दिव्यांग वर्ग में पहला स्थान पाया बल्कि सामान्य वर्ग की मेरिट लिस्ट में भी 13वां स्थान हासिल किया। खास बात यह है कि इंटरव्यू से कुछ दिन पहले उनकी हड्डी टूट गई थी, फिर भी उन्होंने एंबुलेंस से पहुंचकर साक्षात्कार दिया और जीत की नई इबारत लिखी।

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टूटी हड्डी लेकिन नहीं मानी हार

हिमांशु सोनी का संघर्ष प्रेरणा देने वाला है। प्री और मेन्स परीक्षा पास करने के बाद जैसे ही इंटरव्यू का समय आया, उसी दौरान उनके साथ बड़ा हादसा हुआ। 19 अगस्त को घर में बाथरूम में गिरने से उनकी हड्डी टूट गई। इसके बाद 23 अगस्त को उनका ऑपरेशन हुआ। आमतौर पर ऐसे हालात में उम्मीदवार परीक्षा छोड़ देते हैं, लेकिन हिमांशु ने हार मानना स्वीकार नहीं किया।

एंबुलेंस से पहुंचे इंटरव्यू देने

ऑपरेशन के सिर्फ पांच दिन बाद यानी 28 अगस्त को जब इंटरव्यू का दिन आया, हिमांशु एंबुलेंस से इंटरव्यू देने पहुंचे। चार सदस्यीय पैनल के सामने उन्होंने इंटरव्यू दिया और शानदार प्रदर्शन किया। उनकी यह जिजीविषा ही है जिसने उन्हें न सिर्फ दिव्यांग कैटेगरी में पहला बल्कि सामान्य कैटेगरी में भी 13वां स्थान दिलाया।

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पहले भी मिली थी सफलता

यह पहली बार नहीं है जब हिमांशु ने बड़ी उपलब्धि हासिल की हो। साल 2022 में उन्होंने राज्य सेवा परीक्षा पास कर स्कूल शिक्षा विभाग में सहायक संचालक का पद पाया था और वर्तमान में लोक शिक्षण विभाग, जबलपुर में पदस्थ हैं।

माता-पिता के लिए गर्व का पल

हिमांशु के माता-पिता माधवी सोनी और महेंद्र कुमार सोनी, दोनों ही रिटायर्ड टीचर हैं। बेटे की इस सफलता ने उन्हें गर्व से भर दिया। हिमांशु की कहानी साबित करती है कि दिव्यांगता केवल शारीरिक होती है। असली ताकत मानसिक दृढ़ता और इच्छाशक्ति में होती है, जो किसी भी बाधा को पार कर सकती है।

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