Minister Tulsi Silawat: फिर चर्चा में मंत्री तुलसी सिलावट, बोले- मुझे डर नहीं लगता, मैं डरता तो सरकार नहीं गिराता

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर रहे जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा, मुझे डर होता तो सरकार गिराने का काम नहीं करता। इस बयान ने राजनीति में हलचल मचा दी है।

Minister Tulsi Silawat: फिर चर्चा में मंत्री तुलसी सिलावट, बोले- मुझे डर नहीं लगता, मैं डरता तो सरकार नहीं गिराता

हाइलाइट्स

  • उज्जैन में मंत्री तुलसी सिलावट का बड़ा बयान।
  • सिलावट बोले- मैं डरता तो सरकार नहीं गिराता।
  • गहरे कान्ह डक्ट में उतरने के सवाल पर बोले सिलावट।

MP Minister Tulsi Silawat statement Ujjain: मध्य प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट एक बार फिर अपने बयान को लेकर सियासी चर्चाओं में आ गए हैं। उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का निरीक्षण करने पहुंचे सिलावट ने मीडिया से बातचीत के दौरान बड़ा बयान दिया। गहरे कान्ह डक्ट में उतरने के सवाल पर उन्होंने कहा, "एक बात साफ कह दूं तुलसी सिलावट को डर नहीं लगता। अगर डरता, तो क्या सरकार गिरा पाता?" इसके बाद उन्होंने जोरदार ठहाका भी लगाया। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है और चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि मंत्री का इशारा आखिर किसकी ओर था?

गौरतलब है कि तुलसी सिलावट 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। इसके बाद कमलनाथ सरकार गिर गई थी और मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ था।

100 फिट गहरी टनल में उतरे तुलसी सिलावट

दरअसल, उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ को लेकर तैयारियां जोरों पर है। सिंहस्थ को लेकर कई विकास कार्य किए जा रहे हैं। जिनमें ‘कान्हा क्लोज डक्ट’ परियोजना प्रमुख है। इसी परियोजना के निरीक्षण के लिए शुक्रवार को जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल उज्जैन पहुंचे। निरीक्षण के दौरान दोनों मंत्री लगभग 100 फीट गहरी टनल (डक्ट) में नीचे उतरे और निर्माण कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता की समीक्षा की।

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गहरी टनल में उतरने पर बोले मंत्री सिलावट

टनल में उतरने को लेकर जब मीडिया ने मंत्री तुलसी सिलावट से सवाल किया तो उन्होंने मुस्कराते हुए जवाब दिया कि "तुलसी सिलावट को डर नहीं लगता। डर होता तो क्या सरकार गिराता?" इसके साथ ही उन्होंने एक जोरदार ठहाका भी लगाया, जिससे माहौल हल्का हो गया, लेकिन उनका बयान तुरंत ही राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया।

सिलावट बोले- गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा

जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि सिंहस्थ–2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में 2400 करोड़ रुपये की जल परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जो जून 2027 तक पूरी कर ली जाएंगी। उन्होंने कहा—"यह एक अद्भुत परियोजना है, जिससे मां क्षिप्रा स्वच्छ, निर्मल और अविरल बहेगी। हमारे लिए यह केवल विकास का काम नहीं, बल्कि श्रद्धा का विषय है।"

100 फीट गहरी टनल के निरीक्षण के दौरान मंत्री सिलावट ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में कोई कमी न हो। विशेषकर पाइप जोड़ने और टनल की सीलिंग में लीकेज रोकने के लिए एपॉक्सी केमिकल का पूरी जांच के बाद ही इस्तेमाल किया जाए।

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मजदूरों से की मुलाकात, खिलाई मिठाई 

निरीक्षण के दौरान मंत्री सिलावट और प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने मजदूरों से बातचीत की और अपने हाथों से मिठाई खिलाकर उनका हौसला बढ़ाया। मजदूरों ने बताया कि वे सभी सुरक्षा मानकों के तहत कार्य कर रहे हैं और उन्हें वेतन समय पर मिल रहा है। इस पर मंत्री ने संतोष जाहिर किया।

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शिप्रा को स्वच्छ बनाने की दिशा में बड़ा कदम

दरअसल, कान्ह नदी जो उज्जैन शहर के कई नालों का गंदा पानी अपने साथ बहाती है, आगे जाकर शिप्रा नदी में मिलती है। इस कारण शिप्रा का जल दूषित हो रहा था। सिंहस्थ से पहले कान्ह डक्ट प्रोजेक्ट से टनल बनाकर नदी के रूट को डायवर्ट किया जा रहा है ताकि गंदा पानी शिप्रा में मिलने से रोका जा सके।

इसी को लेकर कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना शुरू की गई है, जिसकी लागत करीब 919.94 करोड़ रुपए है। इसके अंतर्गत परियोजना के अंतर्गत कान्ह नदी के दूषित जल को 18.5 किलोमीटर कट/कवर और 12 किलोमीटर टनल निर्माण कर उज्जैन शहर की सीमा के बाहर प्रवाहित किया जाएगा।

क्षिप्रा में बहता रहेगा निर्मल जल

सिंहस्थ 2028 के दौरान क्षिप्रा नदी में पर्याप्त और स्वच्छ जल बना रहे, इसके लिए 614.53 करोड़ रुपये की लागत से सेवरखेड़ी सिंचाई परियोजना पर भी काम हो रहा है। इसके तहत:

  • सेवरखेड़ी गांव में बैराज का निर्माण।
  • जल को पंपिंग कर सिलारखेड़ी जलाशय में एकत्र करना।
  • आवश्यकता अनुसार क्षिप्रा नदी में जल प्रवाह बनाए रखना।
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