MP Training Scam: RTI से 48 करोड़ के गबन का खुलासा, स्किल डेवलपमेंट के नाम पर अधिकारियों की निजी एजेंसियों से मिलीभगत

MP Training Scam: मप्र में कौशल प्रशिक्षण योजना में 48 करोड़ का भुगतान हुआ, लेकिन न ट्रेनिंग का प्रमाण, न सर्टिफिकेट मिला।

MP Training Scam: RTI से 48 करोड़ के गबन का खुलासा, स्किल डेवलपमेंट के नाम पर अधिकारियों की निजी एजेंसियों से मिलीभगत

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हाइलाइट्स

  1. मप्र में कौशल प्रशिक्षण में 48 करोड़ का गबन

  2. 4000 से अधिक लोगों को बिना प्रमाण भुगतान

  3. एजेंसियों को बिना टेंडर किए करोड़ों का भुगतान

MP Training Scam: मध्यप्रदेश में कौशल प्रशिक्षण योजना (Skill Development Scheme) के तहत स्किल डेवेलपमेंट ट्रेनिंग के नाम पर करोड़ो का गबन किया गया। हाल ही में श्रम विभाग से सूचना के अधिकार के तहत निकाली गई‌ जानकारी से खुलासा हुआ है कि युवाओं को रोजगार के लिए स्कूल ट्रेनिंग के नाम पर निजी एजेंसियों से मिलीभगत कर 48 करोड़ का भुगतान कर दिया गया। लेकिन न ही ट्रेंनिंग देने वालों के पास इसे लेकर कोई प्रूफ है और न ही इसमें शामिल होने वाले युवाओं के पास कोई सर्टिफिकेट। कमाल की बात यह है कि श्रम विभाग के अधीनस्थ मप्र भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल ने इस ट्रेनिंग का करोड़ों का भुगतान कर भी दिया।

[caption id="" align="alignnone" width="1204"]publive-image Skill Development[/caption]

भुगतान पूरा, ट्रेनिंग का कोई प्रमाण नहीं

जांच में सामने आया है कि जिन लोगों को प्रशिक्षण दिया जाना था, उन्हें याद ही नहीं कि ट्रेनिंग कब मिली। जिस ट्रेड की ट्रेनिंग देने का दावा किया गया, उनमें से कई लोग उस काम में कार्यरत भी नहीं थे। श्रम विभाग (Labour Department) की जांच रिपोर्ट में यह अनियमितता उजागर हुई। रिपोर्ट के अनुसार, मप्र भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल ने 2015 से 2022 तक प्रशिक्षण के नाम पर करोड़ों का भुगतान किया।

आरटीआई में खुलासा, 4 हजार से अधिक लोगों के नाम

हाल ही में 26 अगस्त 2025 को आरटीआई के तहत घोटाले की जांच रिपोर्ट सामने आई। दस्तावेजों में 4 हजार से अधिक लोगों को प्रशिक्षण देने के नाम पर 4 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान दर्ज पाया गया। कई जिलों ने जांच अधिकारी द्वारा बार-बार मांगे जाने के बावजूद भुगतान से जुड़े दस्तावेज नहीं दिए। रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला 2016-17 की ट्रेनिंग से जुड़ा है, जिसकी जांच मार्च 2023 में इंदौर की संयुक्त संचालक (श्रम) सारिका भूरिया द्वारा की गई थी।

[caption id="" align="alignnone" width="1024"]News-style office scene suggesting corruption around a Skill Development Scheme. AI Generated[/caption]

बिना टेंडर के काम, मनमाने भुगतान

जांच में यह भी सामने आया कि कंपनियों को बिना टेंडर ही प्रशिक्षण कार्य दे दिया गया। जिलों की मांग पर बजट जारी किया गया, लेकिन किसको और क्या ट्रेनिंग दी गई, यह पूछे बिना भुगतान कर दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि 2016-17 में जारी वर्क ऑर्डर का उपयोग 2017-18 में भी किया गया। प्रशिक्षण की किश्तों के मापदंडों का पालन किए बिना कंपनियों को भुगतान किया गया।

घोटाले में जिन कंपनियों को भुगतान किया गया, उनमें अमास स्किल वेंचर प्रा.लि. गुरुग्राम, स्किल वेंचर भोपाल, बी-एबल हैदराबाद, ग्राम एजुकेशन एंड ट्रेनिंग सर्विसेज मथुरा, आईसेक्ट, ई-हरेक्स टेक्नोलॉजी, केलेंस सॉफ्टवेयर, ग्रास एकेडेमी एजुकेशन, डाटा प्रो. कंप्यूटर्स और एवटेक प्रशिक्षण जैसी एजेंसियां शामिल हैं।

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जिलों के अधिकारी भुगतान की जानकारी तो देते रहे, लेकिन प्रशिक्षण और छात्रों के दस्तावेज नहीं भेज पाए। असिस्टेंट कमिश्नर मंदसौर ने आईसेक्ट, नालंदा इंस्टीट्यूट और 3-केलेंस सॉफ्टवेयर को 47.73 लाख रुपए का भुगतान किया, लेकिन कोई प्रशिक्षण प्रमाण नहीं मिला। रतलाम, देवास, शाजापुर और नीमच के अधिकारियों ने भी भुगतान की जानकारी दी, लेकिन प्रशिक्षण के दस्तावेज नहीं भेज पाए।

श्रम सचिव ने जांच कराने का किया आदेश

जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद श्रम सचिव रघुराज एमआर ने कहा है कि पूरे मामले का परीक्षण कराया जाएगा। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि जिलों से बार-बार जानकारी मांगने के बावजूद खानापूर्ति की गई। जांच अधिकारी ने सुझाव दिया है कि इस अनियमितता की जांच फाइनेंस विशेषज्ञ द्वारा की जानी चाहिए, ताकि भुगतान और प्रशिक्षण की पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

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