MP Teacher E-Attendance: कोर्ट में शिक्षकों का जवाब पेश, कहा- डेटा की सुरक्षा मेन मुद्दा, बायोमेट्रिक हाजिरी को तैयार

MP Teacher E-Attendance Case: मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों की हमारे शिक्षक ऐप में ई-अटेंडेंस के मुद्दे पर सोमवार, 17 नवंबर 2025 को सुनवाई होगी।

MP Teacher E-Attendance

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MP Teacher E-Attendance Case: मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों की हमारे शिक्षक ऐप में ई-अटेंडेंस के मुद्दे पर सोमवार, 17 नवंबर 2025 को सुनवाई होगी।

मध्यप्रदेश हाइकोर्ट में 26 शिक्षकों ने शनिवार, 15 नवंबर 2025 को हलफनामा पेश किया है। जिसमें उन्होंने 7 नवंबर को हुई सुनवाई में जारी आदेश पर तारीखवार परेशानियों का डेटा दिया है। सतेन्द्र सिंह तिवारी और अन्य 26 शिक्षकों ने ऐप के अनिवार्य उपयोग, खासकर निजी हााथों में डेटा की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। इस पर सोमवार को न्यायाधीश मनजिंदर सिंह भट्टी की कोर्ट में पांचवीं सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता सतेन्द्र सिंह तिवारी एवं अन्य की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुमान सिंह पैरवी कर रहे हैं।

शिक्षकों के प्रमुख तर्क और आपत्तियां

डेटा सुरक्षा (Data Protection): शिक्षकों ने डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 के तहत अपना पक्ष रखा है। उनका तर्क है कि ऐप को निजी मोबाइल पर डाउनलोड करने, लोकेशन और जीपीएस सिस्टम को पूरे दिन ऑन रखने से उनकी डेटा सुरक्षा और गोपनीयता खतरे में है, विशेषकर साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के बीच।

निजी मोबाइल का उपयोग: शिक्षकों का कहना है कि उनके निजी मोबाइल का उपयोग बैंक खातों और अन्य व्यक्तिगत कार्यों के लिए होता है। विभाग ने इस ऐप को अनिवार्य करने से पहले डेटा सुरक्षा की गारंटी का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया है।

तकनीकी और पहुंच की समस्या: याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि सभी क्षेत्रों में नेटवर्क कनेक्टिविटी समान रूप से उपलब्ध नहीं है, और सभी शिक्षकों के पास एंड्रॉइड फोन उपलब्ध नहीं हैं।

अनुमति का अधिकार: न्यू मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन संघ के प्रदेश अध्यक्ष और याचिकाकर्ता सतेन्द्र सिंह तिवारी का कहना है कि डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 के तहत निजी मोबाइल पर कोई भी ऐप डाउनलोड कराने से पहले मोबाइल धारक की अनुमति आवश्यक है।

दंडात्मक कार्रवाई: शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि मामला न्यायालय में लंबित होने के बावजूद, उन्हें हाजिरी न लगाने पर वेतन रोकने, निलंबित करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिससे उनमें भय का माहौल है।

न्यायालय में अब तक की कार्रवाई

प्रदेश के विभिन्न जिलों के याचिकाकर्ता शिक्षकों ने न्यायालय के आदेश पर दो बार हलफनामा (Affidavit) दाखिल कर अपनी समस्याओं और चिंताओं को प्रस्तुत किया है। वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुमान सिंह के माध्यम से शिक्षकों को जारी किए गए सभी दंडात्मक नोटिसों को न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा और न्याय की गुहार लगाई जाएगी।

यह इस मामले की पांचवीं सुनवाई

इस मामले में अक्टूबर और नवंबर महीने में अब तक चार सुनवाई हो चुकी है। सबसे पहले 9 अक्टूबर, 15 अक्टूबर, 30 अक्टूबर और 7 नवंबर को सुनवाईयां हो चुकी हैं। 17 नवंबर को पांचवीं सुनवाई होगी।

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