MP Tahsildar Protest End: तहसीलदार-नायब तहसीलदारों का आंदोलन खत्म, 19 अगस्त से काम पर लौटेंगे

MP Tahsildar Protest End: मध्यप्रदेश में तहसीलदार-नायब तहसीलदारों का काम बंद आंदोलन खत्म हो गया है। अब वो 19 अगस्त से जनता के काम करेंगे।

MP Tahsildar Protest End

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हाइलाइट्स

  • तहसीलदार-नायब तहसीलदारों का आंदोलन खत्म
  • 19 अगस्त से सभी तहसीलों में होंगे जनता के काम
  • शासन- तहसीलदारों के बीच कई मुद्दों पर सहमति

MP Tahsildar Protest End: मध्यप्रदेश में तहसीलदार-नायब तहसीलदारों का काम बंद आंदोलन सोमवार, 18 अगस्त की शाम को खत्म हो गया है।

प्रमुख सचिव राजस्व और प्रमुख राजस्व आयुक्त के साथ हुई चर्चा के बाद चर्चा के बाद मप्र कनिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (राजस्व अधिकारी) संघ ने काम पर लौटने के संकेत दिए हैं।

उन्होंने कहा, वे सरकार की ओर से पूर्व में जारी निर्देशों में किए जाने वाले संशोधित आदेश का भी इंतजार कर रहे हैं।

[caption id="attachment_879719" align="alignnone" width="910"]publive-image राहत भवन स्थित प्रमुख राजस्व आयुक्त कार्यालय में राजस्व अधिकारी संघ के पदाधिकारियों के साथ चर्चा करते प्रमुख राजस्व आयुक्त एवं अन्य अधिकारी।[/caption]

तहसीलदार 6 अगस्त से कर रहे थे विरोध

तहसीलदार और नायब तहसीलदार 6 अगस्त से न्यायिक और गैर न्यायिक कार्य विभाजन का विरोध कर रहे थे।

जनता के कामों से इन अफसरों ने खुद को अलग कर लिया था। इस पर सरकार ने सभी कमिश्नर्स को काम नहीं करने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

इसे लेकर मप्र कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के पदाधिकारी और संघ के कई जिलों के अध्यक्षों ने राहत भवन में प्रमुख राजस्व आयुक्त के साथ बैठक हुई।

इसमें कई मांगों पर सहमति बनी। इसके बाद देर शाम सभी मप्र कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ से जुड़े पदाधिकारी वल्लभ भवन पहुंचे और प्रमुख सचिव राजस्व विवेक पोरवाल के साथ भी बैठक हुई।

जानें, बैठक में किन प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी

  • संघ के पदाधिकारियों और अफसरों के बीच दो घंटे से अधिक समय तक बैठक चली। इसमें न्यायिक और गैर न्यायिक शब्दावली में बदलाव किया जाएगा।
  • संघ का प्रस्ताव है कि गैर न्यायिक शब्द हटाया जाए जिसके स्थान पर कार्यपालिक दंडाधिकारी शब्द का उपयोग किया जाएगा। इस पर शासन ने सहमति दी है।
  • जिलों में अभी लागू की गई व्यवस्था में जिला मुख्यालय में पदस्थ और फील्ड में पदस्थ तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की संख्या पर की गई आपत्ति को भी शासन ने बदलने की सहमति दी है। अब कलेक्टरों से अभिमत लेकर संख्या तय की जाएगी।
  • राजस्व अधिकारियों को रेवेन्यू कोर्ट का मर्जर नहीं करने का भी आश्वासन मिला है।
  • तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के ग्रेड-पे के मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बनी है। इसके लिए अलग से चर्चा करने की बात शासन के अधिकारियों ने की है।

[caption id="attachment_879743" align="alignnone" width="883"]publive-image राहत भवन स्थित प्रमुख राजस्व आयुक्त कार्यालय में पहले दौर की चर्चा के बाद परिसर में मौजूद तहसीलदार-नायब तहसीलदार।[/caption]

प्रमुख सचिव से कहा- आंदोलन वापस ले रहे

राज्य सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, राजस्व अधिकारी संघ के पदाधिकारियों ने बातचीत के बाद प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल को भरोसा दिलाया है कि वे 6 अगस्त से बंद पड़े काम फिर से शुरू कर देंगे। इस मामले में संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि रेवेन्यू के काम के अलावा बाकी सभी काम करेंगे।

जब सरकार की तरफ से दिए गए आश्वासन के आधार पर संशोधित आदेश जारी होगा, तो वे काम पर लौट आएंगे।

उनके अनुसार, संशोधित आदेश सोमवार देर रात तक जारी हो सकता है।

सीएस को पीएस ने दी बैठक की जानकारी

मुख्य सचिव के साथ राजस्व आयुक्त की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल ने संघ के अधिकारियों से बातचीत के बाद मुख्य सचिव अनुराग जैन से मिलकर संघ की मांगों पर बनी सहमति के बारे में जानकारी दी है।

[caption id="attachment_879752" align="alignnone" width="852"]publive-image राजस्व अधिकारी संघ ने अपनी मांगों को लेकर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा को भी ज्ञापन सौंपा।[/caption]

भू-अभिलेख अधिकारी संघ ने पीएस राजस्व को ज्ञापन सौंपा

बैठक के दौरान भू अभिलेख अधिकारी संघ ने एसएलआर और एएसएलआर के लिए सरकार द्वारा लागू की गई मर्जर व्यवस्था का समर्थन करने वाला ज्ञापन पेश किया।

इसमें बताया गया है कि तहसीलदार और एसएलआर कैडर के मर्ज होने का नोटिफिकेशन राजपत्र में नहीं होने के कारण अभी भी दोनों कैडर के नाम अलग-अलग लिखे जा रहे हैं।

इसलिए यह भ्रम पैदा हो रहा है कि मर्ज व्यवस्था लागू हुई है या नहीं। इस मुद्दे पर संघ ने प्रमुख सचिव राजस्व से राजपत्र में इसका प्रकाशन कराने का अनुरोध किया है।

संघ ने यह भी कहा है कि न्यायिक और गैर न्यायिक शब्द को हटाने पर भी विचार होना चाहिए क्योंकि जो न्यायालय में है वह न्यायालयीन कार्य कर रहा है, लेकिन जो कार्यपालिक मजिस्ट्रेट है वह भी न्यायालयीन कार्य कर रहा है।

यह भी कहा गया है कि तहसीलदार और नायब तहसीलदार को सेटअप मुहैया कराया जाए।

जीएडी के ग्रेडेशन सिस्टम के अनुसार क्रमोन्नति दी जानी चाहिए। साथ ही संघ ने काम पर लौटने की बात कही है।

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