MP Surrogacy Board: क्या है सरोगेसी? एमपी में बना नया बोर्ड, बीमा कवर 2 लाख से बढ़कर 10 लाख रुपये

MP Surrogacy Board: एमपी में सरोगेसी के लिए नया बोर्ड बना है। इससे किराए की कोख की परमिशन एक महीने में मिल जाएगी।

MP Surrogacy Board: क्या है सरोगेसी? एमपी में बना नया बोर्ड, बीमा कवर 2 लाख से बढ़कर 10 लाख रुपये

MP Surrogacy Board: एमपी में सरोगेसी के लिए नया बोर्ड बना है। इससे किराए की कोख की परमिशन एक महीने में मिल जाएगी। पहले इस प्रोसेस में चार महीने का समय लगता था। इसकी वजह थी कि पहले आवेदन प्रदेश सरोगेसी बोर्ड की मीटिंग में जाते थे, जो हर चार-चार महीने में होती थी।

बीमा कवर 10 लाख रुपये

स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव बोर्ड के अध्यक्ष होंगे। अब हर महीने बैठक होगी। इससे आवेदन में निर्णय लेने में देरी नहीं होगी। वहीं, सरोगेट मां के लिए इंश्योरेंस कवर को दो लाख से बढ़ाकर दस लाख रुपये कर दिया गया है।

यह बदलाव उन लोगों को राहत देगा, जो लंबी प्रक्रियाओं के कारण परेशान होते है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा आयुक्त तरुण राठी के अनुसार, 2023-25 के बीच मध्यप्रदेश में 10 आवेदन स्वीकार हुए है। एआरटी क्लिनिक और बैंक स्तर पर सौ से अधिक केस रजिस्टर्ड हुए हैं।

डिप्टी सीएम शुक्ला ने कहा

उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि एमपी एआरटी और सरोगेसी बोर्ड की मीटिंग में समीक्षा के बाद सामने आया कि कई मामले पेडिंग हो रहे थे। इसलिए नए बोर्ड का गठन किया गया है। अब पीएस की अध्यक्षता में हर महीने मीटिंग होगी।

क्या है सरोगेसी?

सरोगेसी तब होती है जब एक महिला किसी दूसरे कपल के लिए बच्चे को जन्म देती है। इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) में प्रयोगशाला में एक महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणु को मिलाया जाता है। फिर महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है।

भारत में सरोगेसी/आईवीएफ के लिए आयु सीमा क्या है?

भारत में सरोगेट मदर (जो महिलाएं सरोगेसी के लिए प्रस्ताव देती हैं) के लिए आयु सीमा 25-35 साल है और इच्छुक दंपत्ति के लिए महिला के लिए आयु सीमा 21-50 वर्ष है। वहीं, पुरुष के लिए 21 से 55 साल है।

सरोगेसी कितने प्रकार की होती है?

अल्ट्रइस्टिक सरोगेसी

सरोगेट मदर को चिकित्सा खर्च और इंश्योरेंस कवर दिया जाता है। कपल को मेडिकल अनफिट का सर्टिफिकेट देना होता है। उनके पास गोद लिया और सरोगेट बच्चा नहीं होना चाहिए।

व्यावसायिक सरोगेसी

भारत में यह बैन है। इस सरोगेसी पर दस साल की सजा और दस लाख रुपये जुर्माना हो सकता है।

इसकी सफलता की दर कितनी है?

सरोगेसी की सफलता की दर 30 से 40 फीसदी है। इसलिए पूरी प्रक्रिया में तीन परीक्षण किए जाते हैं।

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