New Education Policy: MP में 500 से ज्यादा स्टूडेंट्स का नहीं हो रहा नामांकन, नई शिक्षा नीति के इस नियम ने बढ़ाई टेंशन

मध्यप्रदेश के 500 से ज्यादा छात्र-छात्राएं नई शिक्षा नीति की आयु सीमा के नियम के चलते 9वीं कक्षा में दाखिला नहीं ले पा रहे हैं। इन बच्चों ने 13 साल से पहले ही 8वीं कक्षा पास कर ली थी, लेकिन अब उम्र को लेकर विवाद उठा है।

New Education Policy: MP में 500 से ज्यादा स्टूडेंट्स का नहीं हो रहा नामांकन, नई शिक्षा नीति के इस नियम ने बढ़ाई टेंशन

MP Ninth Class Age Issue 2025: मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति के नियमों के चलते 500 से ज्यादा छात्रों की पढ़ाई बीच में अटक गई है। ये छात्र आठवीं कक्षा तो पार कर चुके हैं, लेकिन उनकी उम्र 13 वर्ष से कम होने के कारण अब वे 9वीं (9th class admission) में दाखिला नहीं ले पा रहे।

नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत 9th कक्षा में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 13 वर्ष निर्धारित की गई है। इस बदलाव से उन छात्रों को असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, जिन्होंने कम उम्र में आठवीं कक्षा पूरी कर ली, लेकिन अब उनकी उम्र निर्धारित मानक से कम है।

13 साल की उम्र पर विवाद

नई शिक्षा नीति (New Education Policy) के अनुसार 2024–25 से 9th class में दाखिले के लिए छात्रों की न्यूनतम आयु 13 साल तय की गई है। यह नियम उन स्कूल‑विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई के लिए बाधित कर रहा है जिन्होंने 13 साल से कम उम्र में आठवीं पास कर ली है।

नियम बदलना हमारे अधिकार में नहीं

माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) के सचिव केडी त्रिपाठी ने इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा कि 13 वर्ष की न्यूनतम आयु शासन के निर्देश पर तय की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कक्षा 9 में प्रवेश से जुड़ी यह आयु-सीमा शासन का निर्णय है, मंडल के पास इस नियम में बदलाव करने का अधिकार नहीं है। त्रिपाठी ने बताया कि पिछले वर्ष विशेष परिस्थितियों में आयु सीमा में कुछ राहत दी गई थी, लेकिन इस बार ऐसी कोई छूट संभव नहीं है।

नई नीति में उम्र बनी प्रवेश की बाधा

माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 11 जून को एक नई प्रवेश नीति जारी की थी, जिसमें नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक के लिए आयु सीमा तय कर दी गई। इस नीति के अनुसार, नवमी कक्षा में दाखिले के लिए छात्र की उम्र कम से कम 13 वर्ष होना जरूरी है।

यह समस्या खासतौर पर उत्कृष्ट विद्यालयों में तब सामने आई जब कई होनहार विद्यार्थियों ने प्रवेश परीक्षा तो पास कर ली, लेकिन उनकी उम्र निर्धारित सीमा से कम होने के कारण नामांकन रोका गया। इससे छात्रों और उनके अभिभावकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

इन जिलों के छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित

राज्यभर में 500 से ज्यादा छात्र 9वीं कक्षा में प्रवेश को लेकर असमंजस में हैं, जिनमें सबसे बड़ी संख्या ग्वालियर, झाबुआ, मुरैना, नीमच, राजगढ़, रतलाम, सतना और शहडोल जिलों से है। इन छात्रों ने अपने स्कूल प्राचार्यों के माध्यम से माध्यमिक शिक्षा मंडल तक अपनी बात पहुंचाई है। वे मांग कर रहे हैं कि इस बार आयु सीमा में राहत दी जाए, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो और वे बिना रुकावट अगले शिक्षण स्तर तक पहुंच सकें।

30 सितंबर तक होगा नामांकन

नई शिक्षा नीति के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए 9वीं कक्षा में ऑनलाइन नामांकन की अंतिम तिथि 30 सितंबर तय की गई है। नामांकन के लिए 350 रुपये का सामान्य शुल्क निर्धारित है।

इसी तारीख तक 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षा के आवेदन भी स्वीकार किए जाएंगे। इन परीक्षाओं के लिए 1200 रुपये का शुल्क देना होगा। सभी छात्र-छात्राओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर नामांकन और परीक्षा आवेदन जमा करना अनिवार्य होगा।

नई और पुरानी नीति में क्या है अंतर?

वर्ष 2024-25 से लागू नई प्रवेश नीति के अनुसार, 9वीं कक्षा में दाखिले के लिए न्यूनतम आयु 13 वर्ष होना आवश्यक है। यह नियम पहली बार 2024 में लागू किया गया था।

हालांकि, जिन विद्यार्थियों को अब समस्या आ रही है, उन्होंने 2013 में पहली कक्षा में प्रवेश लिया था, जब यह नियम लागू नहीं था। अब वे लगातार पढ़ाई करते हुए आठवीं कक्षा तक पहुंच चुके हैं, लेकिन उनकी वर्तमान आयु केवल 12 वर्ष है। इस कारण वे 9वीं में दाखिले के योग्य नहीं माने जा रहे हैं।

इस बदलाव ने उन छात्रों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं जिन्होंने समय से पहले पढ़ाई पूरी कर ली, लेकिन आयु सीमा के मानक पूरे नहीं कर पा रहे हैं।

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