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MP में SI अभी नहीं बनेंगे इंस्पेक्टर: इंदौर हाईकोर्ट ने PHQ के आदेश पर लगाई रोक, कहा- ये 50-50 प्रतिशत कोटा का उल्लंघन

MP SI Promotion High Court Order: मध्यप्रदेश में सब इंस्पेक्टर को इंस्पेक्टर का प्रभार देने पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने रोक लगा दी है। याचिका के अंतिम निराकरण तक PHQ के आदेश पर रोक रहेगी।

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Rahul Garhwal
MP में SI अभी नहीं बनेंगे इंस्पेक्टर: इंदौर हाईकोर्ट ने PHQ के आदेश पर लगाई रोक, कहा- ये 50-50 प्रतिशत कोटा का उल्लंघन

हाइलाइट्स

  • MP में SI को अभी नहीं मिलेगा प्रमोशन
  • इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोट नहीं होंगे SI
  • PHQ के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
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MP SI Promotion Order Hold High Court: मध्यप्रदेश में सीधी भर्ती 2015 के सब इंस्पेक्टर (SI) को इंस्पेक्टर का प्रभार अभी नहीं मिलेगा। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने PHQ के SI प्रमोशन के आदेश पर रोक लगा दी है। याचिका के अंतिम निराकरण तक SI इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोट नहीं होंगे।

6 मई 2025 को PHQ ने जारी किया था ये आदेश

mp police order

मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय ‌ने 2021 में उच्च पद का कार्य भार दिए जाने को लेकर प्रोसेस शुरू की थी। इसके बाद SI को इंस्पेक्टर पद पर कार्यभार दिया गया था। इस आदेश और वरिष्ठता सूची 2020 मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम, 1961 के नियम 8,10,12 और मध्य प्रदेश पुलिस नियम, 1997 के खिलाफ होने से कोर्ट में पुलिस मुख्यालय के आदेश के खिलाफ प्रमोशन के लिए एक SI ने याचिका लगाई थी।

वरिष्ठता सूची को लेकर HC ने दिया था आदेश

29 फरवरी 2024 को हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद आदेश पारित किया था कि PHQ से जारी आदेश कानून की नजर में मान्य नहीं किया जा सकता है। 2021 का आदेश रद्द कर दिया था। वरिष्ठता सूची को नियम के अनुसार 3 महीने में दोबारा जारी करने का आदेश दिया गया था।

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प्रमोशन का 50 प्रतिशत कोटा

प्रमोशन से बने SI जो अपनी लंबी सेवा के बाद पद पर प्रमोट होकर आते हैं उनका 50 प्रतिशत कोटा फिक्स रहता है। इसी को लेकर इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति के उप निरीक्षकों को पदोन्नति देने का प्रावधान है। इसके अलावा ये भी उल्लेख है कि पदोन्नति से आए SI को इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन की पात्रता 4 साल में आती है। वहीं सीधी भर्ती के SI की पात्रता 6 साल में आती है।

अभी 75 प्रतिशत और 25 प्रतिशत का आंकड़ा

MP में इंस्पेक्टर के पद पर अभी 75 प्रतिशत सीधी भर्ती के SI हैं और 25 प्रतिशत प्रमोशन के SI प्रतिनिधित्व बाकी रह गया है। जबकि दोनों ग्रुप का प्रतिनिधित्व 50-50 प्रतिशत होना चाहिए। यही संवैधानिक रूप से सही है।

[caption id="attachment_819828" align="alignnone" width="640"]mp phq मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय, भोपाल[/caption]

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PHQ ने ऐसे किया नियम का उल्लंघन

अगर कोई व्यक्ति व्यापमं से सीधे भर्ती होकर एसआई (सब इंस्पेक्टर) बनता है, तो उसे सबसे पहले पुलिस ट्रेनिंग के लिए जाना होता है। ट्रेनिंग के बाद उसे 2 साल की परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन पीरियड) पूरी करनी होती है। जब ये दो साल सफलतापूर्वक पूरे हो जाते हैं, तभी उसकी नियुक्ति पक्की मानी जाती है। तब तक वह पुलिस विभाग में अस्थायी (टेम्पररी) कर्मचारी के रूप में काम करता है।

नियमों के अनुसार, वरिष्ठता (Seniority) की गिनती उस दिन से की जाती है जब उसकी परिवीक्षा अवधि खत्म होती है। लेकिन पुलिस मुख्यालय ने परिवीक्षा अवधि के दो साल को भी वरिष्ठता में जोड़ दिया। इससे ये हुआ कि जो एसआई प्रमोशन पाकर बने थे, उनकी वरिष्ठता सीधी भर्ती वालों से ज्यादा हो गई, जबकि नियम के अनुसार ऐसा नहीं होना चाहिए था।

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