वर्ग 1 शिक्षक भर्ती विवाद: नियम में अलाइड सब्जेक्ट्स को मान्यता, DPI ने नकारा; अब दो सप्ताह में हाईकोर्ट को देना है जवाब

Madhya Pradesh (MP) Shikshak Bharti Varg 1 Controversy उच्च माध्यमिक यानी वर्ग 1 शिक्षक भर्ती 2023 का विवाद खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है।

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Varg 1 Shikshak Bharti Case: उच्च माध्यमिक यानी वर्ग 1 शिक्षक भर्ती 2023 का विवाद खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। नया विवाद डिग्री मान्यता से जुड़ा हुआ है।

भर्ती नियम में अलाइड सब्जेक्ट्स को मान्यता दी है, उसे लोक शिक्षण संचालनालय यानी DPI ने नकार दिया है। जिसके कारण योग्य उम्मीदवार भर्ती से बाहर हो गए हैं। इस मामले में एमपी हाईकोर्ट ने विभाग को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है।

ये है पूरा मामला

याचिकाकर्ता दमोह निवासी जगमोहन चौधरी कॉमर्स विषय में ग्रेजुएट और एमबीए (फाइनेंस) में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती 2023 के तहत जगमोहन चौधरी मेरिट में आए और ज्वाइनिंग से पहले हुई दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया में भाग लिया।

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लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने उनके पोस्ट ग्रेजुएशन (एमबीए फाइनेंस) की डिग्री को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि यह निर्धारित विषय की स्नातकोत्तर उपाधि के अंतर्गत नहीं आता। इसके चलते उनका चयन रद्द कर दिया गया। जगमोहन ने इस मामले को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।

याचिकाकर्ता ने ये दिया तर्क

याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में पैरवी कर रहे अधिवक्ता धीरज तिवारी ने दलील दी कि भर्ती नियम पुस्तिका के कंडिका 7 के अध्याय 1 में “अलाइड सब्जेक्ट्स” की सूची दी गई है। इस सूची में कॉमर्स विषय के अंतर्गत पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर एमबीए (अकाउंट/फाइनेंस) को मान्यता दी गई है।

साथ ही, विज्ञप्ति में स्पष्ट उल्लेख है कि उम्मीदवार को ग्रेजुएट स्तर पर कॉमर्स विषय में उपाधि धारित करना अनिवार्य है। जगमोहन चौधरी इन सभी मानकों को पूरा करते हैं और उन्होंने अपने कॉलेज तथा डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय से मान्यता का स्पष्टीकरण पत्र भी प्रस्तुत किया है। बावजूद इसके उन्हें ज्वाइनिंग नहीं दी गई।

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15 जनवरी को केस की अगली सुनवाई

इस मामले की सुनवाई मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस विनय सराफ की एकलपीठ में हुई। अधिवक्ता धीरज तिवारी ने कोर्ट में जोर देकर कहा कि एमबीए (फाइनेंस) जैसी डिग्री को "अलाइड सब्जेक्ट्स" के तहत मान्यता दी गई और इसे अस्वीकार करना भर्ती प्रक्रिया के नियमों का उल्लंघन है।

बेंच ने याचिका को प्राथमिकता देते हुए DPI Bhopal को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई 15 जनवरी को है।

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