मध्यप्रदेश में मनमानी: हाईकोर्ट के आदेश के बिना सरकारी भर्तियों का रिजल्ट रोका, जानें क्यों फंसा ये 13 फीसदी का पेंच

MP Sarkari Bharti 13 percent Result Hold: मध्यप्रदेश में मनमानी हो रही है। हाईकोर्ट के आदेश के बिना सरकारी भर्तियों का रिजल्ट रोका गया। जानें क्यों ये 13 फीसदी का पेंच फंसा है।

MP Sarkari Bharti 13 percent Result Hold High Court

MP Sarkari Bharti 13 percent Result Hold: मध्यप्रदेश में सरकारी भर्तियों में 13 फीसदी रिजल्ट होल्ड किया गया है। चौंकाने वाली बात ये है कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था। फिर किसके कहने पर सरकारी भर्तियों में ओबीसी के 27 फीसदी आरक्षण के नाम पर 13 फीसदी पदों का रिजल्ट होल्ड कर दिया गया।

OBC आरक्षण से जुड़े 82 मामलों की सुनवाई

हाईकोर्ट में ओबीसी वर्ग की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर के विशेष अनुरोध पर चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ में आज ओबीसी आरक्षण से संबंधित 82 मामलों की सुनवाई हुई। इस दौरान महाधिवक्ता महोदय द्वारा दिए गए गलत अभिमत का हवाला दिया गया और हजारों अभ्यर्थियों को वैधानिक रूप से होल्ड किए जाने की बात कोर्ट को बताई गई। महाधिवक्ता के कहने पर मध्यप्रदेश शासन ने भर्तियों के 13 फीसदी पदों के रिजल्ट होल्ड कर दिए हैं।

हाईकोर्ट ने 2 हफ्ते में मांगा जवाब

[caption id="attachment_704421" align="alignnone" width="509"]mp high court मध्यप्रदेश हाईकोर्ट[/caption]

न्यायालय द्वारा महाधिवक्ता कार्यालय की ओर से उपस्थित शासकीय अधिवक्ता कोर्ट ने उठाए गए मुद्दों पर 2 सप्ताह के अंदर जबाब तलब किया है। महाधिवक्ता सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए। अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ने कोर्ट को बताया कि महाधिवक्ता के अवैध अभिमत पर होल्ड अभ्यर्थियों को अनहोल्ड करके उनकी नियुक्ति प्रक्रिया के आदेश दिए जाए।

आदेश का भर्तियों से कोई संबंध नहीं

अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ने कोर्ट को ये भी बताया की ओबीसी के 27 प्रतिशत कानून जो विधानसभा द्वारा पारित किया गया है, उस पर कोई स्टे नहीं है। फिर भी महाधिवक्ता कार्यालय ने एक याचिका के अंतरिम आदेश का हवाला देकर प्रदेश के सभी विभागों की भर्तियों में 13 प्रतिशत होल्ड लगा दिया गया है। जबकि उस आदेश का भर्तियों से कोई संबंध नहीं है।

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9 दिसंबर को अगली सुनवाई

अधिवक्ता के तर्कों को न्यायालय ने काफी गंभीरता से लेते हुए शासन को स्पष्टीकरण देने के लिए 15 दिन की मोहलत दी है। मामले में अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी।

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