Sagar News: फूल-माला और नारियल लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचा किसान, बोला- 'ऐसे तो भगवान भी मान जाते हैं, शायद अधिकारी भी..'

MP Sagar News: सागर की जनसुनवाई में एक किसान न्याय की उम्मीद लिए मिठाई, नारियल और फूलमाला लेकर पहुंचा, लेकिन पुलिस ने उसे बाहर निकाल दिया। तीन साल से जमीन विवाद में परेशान किसान की अनसुनी गुहार ने प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए।

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MP Sagar News: मध्य प्रदेश के सागर जिले में मंगलवार को आयोजित कलेक्ट्रेट जनसुनवाई एक बार फिर चर्चा में आ गई, जब एक किसान अपने साथ मिठाई, नारियल और फूलों की माला लेकर अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाने पहुंचा। यह जनसुनवाई हर हफ्ते आयोजित होती है, जिसमें नागरिक अपनी समस्याएं लेकर आते हैं। लेकिन जब फरियादी की आवाज़ लगातार अनसुनी रह जाती है, तब वह कुछ अलग करने पर मजबूर हो जाता है- और यही इस किसान ने किया।

'भगवान मान जाते हैं, शायद...'- किसान की भावुक अपील

किसान ने कहा कि “जिस तरह भगवान नारियल, प्रसाद और फूलों से खुश होकर भक्तों की सुनते हैं, वैसे ही शायद ये अधिकारी भी मेरी बात सुन लें।” लेकिन उसकी उम्मीद उस वक्त टूट गई जब वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उसे धक्का देकर बाहर निकाल दिया। यह दृश्य वहां मौजूद अन्य फरियादियों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

तीन साल से दर-दर की ठोकरें खा रहा है किसान

जानकारी के अनुसार, यह किसान बीते तीन वर्षों से अपनी जमीन से जुड़ी समस्या को लेकर अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। वह हर जनसुनवाई में पहुंचता है, लेकिन हर बार उसे निराशा ही हाथ लगती है। अब उसकी स्थिति ऐसी हो गई है कि उसे न्याय की आशा में पूजा की थाली लेकर आना पड़ा।

उसने बार-बार आवेदन देने, निवेदन करने और लाइन में लगने के बावजूद कोई समाधान नहीं पाया। उसकी यह पीड़ा न सिर्फ प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है, बल्कि सिस्टम के प्रति गहरी नाराजगी और अविश्वास को भी दर्शाती है।

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प्रशासन की चुप्पी और सिस्टम पर सवाल

इस घटना (Sagar News) ने प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ किसान पूजा की थाली लेकर न्याय की उम्मीद में आया, वहीं दूसरी तरफ उसे जनसुनवाई से बाहर कर दिया गया। यह सवाल उठाता है कि अगर जनसुनवाई में भी फरियादी की बात नहीं सुनी जाएगी, तो फिर वो न्याय के लिए कहां जाए?

यह मामला सिर्फ एक किसान की निराशा नहीं, बल्कि उस पूरे तंत्र की पोल खोलता है जो आम आदमी की समस्याओं के प्रति असंवेदनशील होता जा रहा है। प्रशासनिक व्यवस्था और जनसुनवाई की उपयोगिता पर सवाल उठाती यह घटना सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर तेजी से चर्चा में है।

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