सिंधिया के सामने छलका ऊर्जा मंत्री तोमर का दर्द: बोले- ग्वालियर-चंबल को जितने उद्योग मिलने चाहिए वो नहीं मिले

Madhya Pradesh BJP Political News Update: मध्यप्रदेश के ग्वालियर में सोमवार का केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने मोहन सरकार के मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का दर्द छलक गया।

Jyotiraditya Scindia

हाइलाइट्स

  • केंद्रीय मंत्री सिंधिया के सामने ऊर्जा मंत्री का छलका दर्द
  • बोले- ग्वालियर-चंबल अंचल को उम्मीदों के अनुसार उद्याेग नहीं मिले
  • मप्र की स्थापना के समय ग्वालियर नंबर1 उद्योग नगरी थी

Jyotiraditya Scindia: मध्यप्रदेश के ग्वालियर में सोमवार का केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने मोहन सरकार के मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का दर्द छलक गया।
विजयाराजे सिंधिया गर्ल्स कॉलेज में मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान ग्वालियर-चंबल में औद्योगिक विकास की धीमी गति को लेकर मंच से ही ऊर्जा मंत्री ने कहा कि महाराज ग्वालियर-चंबल के विकास के लिए आपके दरवाजे पर बैठना पड़ा तो बैठ जाऊंगा। आपसे निवेदन है ग्वालियर विकास के लिए आपको सीमा भी लांघना पड़े तो लांघ जाइए। आप प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव और केन्द्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलिए और उद्योग लेकर आइए।

[caption id="attachment_783459" align="alignnone" width="877"]publive-image विजयाराजे सिंधिया मुरार गर्ल्स कॉलेज में कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया।[/caption]

मंत्री तोमर ने कहा कि जब मध्यप्रदेश का गठन(1 नवंबर 1956) हुआ था, तब ग्वालियर उद्योगिक नगरी कहलाती थी। इंदौर, भोपाल और जबलपुर जैसे शहरों से ग्वालियर काफी आगे था। आपसे (सिंधिया) अनुरोध है कि ग्वालियर में पुन: उद्योग स्थापित करवा कर इसे उद्योग नगरी बनाने बनवाएं। ग्वालियर को जितने उद्योग मिलना चाहिए वो नहीं मिले।

महाराज ग्वालियर में उद्योग लाने ही होंगे...

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने ग्वालियर को पुराने समय में औद्योगिक नगरी बताते हुए कहा कि आज ग्वालियर-चंबल में उद्योग की लगाने की चाल बेहद धीमी है। ग्वालियर को जितने उद्योग मिलने चाहिए थे उतने नहीं मिल रहे हैं। इसके लिए महाराज आप आगे कदम बढ़ाएगा। यदि जरूरत पड़े तो प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से बात कीजिए और जरूरत पड़े तो देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी से मिलिए और कोई सीमा लांघना पड़े तो लांघ जाएं। ग्वालियर को उद्योग दिलाएं, क्योंकि कोई शहर तभी खुशहाल होता है जब वहां रोजगार होता है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो मैं आपके दरवाजे पर भी बैठ जाऊंगा, लेकिन आपको यहां उद्योग लाना ही होंगे।

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‘ग्वालियर को जितने उद्योग मिलना चाहिए वो नहीं मिले’

ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि 1 नवंबर 1956 को जब मध्य प्रदेश का गठन हुआ था उस समय ग्वालियर मध्य प्रदेश के इंदौर, जबलपुर, भोपाल जैसे शहरों से काफी आगे था, तब ग्वालियर नंबर एक था। उस दौर में सिमको, रेशम मिल, कांच मिल, जेसी मिल सहित अन्य इंडस्ट्री के चलते ग्वालियर औद्योगिक नगरी कहलाती थी। उस समय बहुत अच्छी सीवर लाइन डली हुई थी। मंत्री तोमर ने ज्योतिरादित्य सिंधिया से ग्वालियर में पुनः उद्योग स्थापित करवा कर इसे उद्योग नगरी बनाने का अनुरोध किया। उन्होंने ये भी कहा कि ग्वालियर को जितने उद्योग मिलना चाहिए वो नहीं मिले।

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