MP: पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में होगा गीता का पाठ, एडीजी ट्रेनिंग का निर्देश-'गीता से सीखें नेक और अनुशासित जीवन जीना'

Madhya Pradesh Police Training Centers Bhagavad Gita Recitation Details Update मध्य प्रदेश पुलिस के प्रशिक्षण केंद्रों में अब रंगरूटों को भगवद गीता का पाठ कराया जाएगा। एडीजी (ट्रेनिंग) राजा बाबू सिंह ने राज्य के सभी आठ पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों को निर्देश दिया है

MP: पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में होगा गीता का पाठ, एडीजी ट्रेनिंग का निर्देश-'गीता से सीखें नेक और अनुशासित जीवन जीना'

MP Police Training Bhagavad Gita Session: मध्य प्रदेश पुलिस के प्रशिक्षण केंद्रों में अब रंगरूटों को भगवद गीता का पाठ कराया जाएगा। एडीजी (ट्रेनिंग) राजा बाबू सिंह ने राज्य के सभी आठ पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों को निर्देश दिया है कि नए आरक्षकों के लिए नियमित ‘गीता पाठ सत्र’ (Bhagavad Gita Path Session) शुरू किए जाएं। इस पहल का उद्देश्य है प्रशिक्षुओं में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को विकसित करना।

एडीजी सिंह द्वारा यह आदेश 3 नवंबर को जारी किया गया है। वर्तमान में राज्यभर के ट्रेनिंग सेंटर्स में लगभग 4,000 युवक और युवतियां नौ महीने की पुलिस ट्रेनिंग ले रहे हैं। अब इन प्रशिक्षण सत्रों में शारीरिक और व्यावहारिक शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक और नैतिक शिक्षा पर भी जोर दिया जाएगा।

'गीता हमारा शाश्वत ग्रंथ है' एडीजी सिंह

[caption id="" align="alignnone" width="1039"]'गीता हमारा शाश्वत ग्रंथ है' एडीजी सिंह 'गीता हमारा शाश्वत ग्रंथ है' एडीजी सिंह[/caption]

राजा बाबू सिंह ने अपने आदेश में कहा, भगवद गीता हमारा शाश्वत ग्रंथ है। इसका नियमित अध्ययन हमारे ट्रेनी पुलिसकर्मियों को एक नेक, अनुशासित और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देगा।” उन्होंने आगे कहा कि गीता के उपदेश न केवल जीवन में संतुलन लाते हैं, बल्कि ड्यूटी के दौरान आने वाली चुनौतियों का सामना करने में भी मानसिक शक्ति प्रदान करते हैं।

पहले दिया था रामचरितमानस पाठ का निर्देश

इससे पहले, जुलाई 2025 में पुलिस ट्रेनिंग विंग ने नए आरक्षकों के लिए रामचरितमानस पाठ शुरू करने के निर्देश दिए थे। एडीजी सिंह का मानना था कि इससे पुलिस जवानों में **चरित्र निर्माण और अनुशासन की भावना मजबूत होती है।

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एडीजी की पुरानी पहल

जानकारी के अनुसार, राजा बाबू सिंह ने वर्ष 2019 में ग्वालियर रेंज के पुलिस प्रमुख रहते हुए भी ऐसा ही अभियान चलाया था। उस समय उन्होंने जेलों में बंद कैदियों और आम नागरिकों को गीता की प्रतियां वितरित की थीं, ताकि उनमें आत्मचिंतन और सुधार की भावना बढ़ सके।

विपक्ष ने जताई थी आपत्ति

इससे पहले रामायण पाठ के फैसले पर विपक्षी दल कांग्रेस ने सवाल उठाए थे, लेकिन पुलिस विभाग का कहना है कि इन सत्रों का मकसद धार्मिक प्रचार नहीं, बल्कि नैतिक और मानसिक सुदृढ़ता बढ़ाना है।

यह फैसला अब राज्यभर के सभी पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों में लागू किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि गीता पाठ से प्रशिक्षु पुलिसकर्मियों को जीवन के आदर्शों को समझने और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करने की प्रेरणा मिलेगी।

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