MP: Civil Judge Exam को लेकर HC के निर्देश, OBC को मिलेंगे ये अंक  

MP News: Civil Judge Exam को लेकर HC के कड़े निर्देश, OBC को SCST के समान मिलेंगे ये अंक, जारी करनी होगी अधिसूचना

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MP Civil Judge Exam: एमपी में सिविल जज परीक्षा के उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर। दरअसल जबलपुर हाईकोर्ट (Jabalpur HC News) ने एमपी में सिविल जज परीक्षा (Civil Judge Exam) को लेकर बड़े निर्देश दिए हैं। जिसके अनुसार अब ओबीसी वर्ग के परीक्षार्थियों को एससीएसटी के समान न्यूनतम पात्रता अंक में छूट दी जाएगी। इसके लिए प्रशासन को 3 दिन के अंदर अधिसूचना जारी करने के निर्देश भी हाई कोर्ट ने दिए हैं।

क्या हैं निर्देश

सिविल जज परीक्षा (Civil Judge Exam) को लेकर हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को 3 दिन में करने के आदेश दिए गए हैं। दरअलस हाई कोर्ट ने शुक्रवार को सिविल जज परीक्षा में ओबीसी वर्ग (OBC) के सभी उम्मीदवारों को एससी-एसटी वर्ग के समान न्यूनतम पात्रता अंक में छूट देने के निर्देश दिए हैं।

दोनों परीक्षाओं में मिलेगी छूट

जारी आदेश के अनुसार प्रारंभिक और मुख्य दोनों परीक्षा में भी ओबीसी को अन्य आरक्षित वर्ग के समान छूट मिलेगी। चीफ जस्टिस रवि मलिमठ (Chief Justice Ravi Malimath) और जस्टिस विशाल मिश्रा (Justice Vishal Mishra) की खंडपीठ ने इस संबंध में हाई कोर्ट प्रशासन को 3 दिन के अंदर अधिसूचना जारी करने के निर्देश दे दिए हैं।

18 दिसंबर है आवेदन की अंतिम तारीख

आपको बता दें सिविल जज जूनियर डिवीजन के प्रवेश स्तर 2022 के लिए आवेदन की लास्ट डेट 18 दिसंबर 2023 है। कोर्ट ने कहा है कि सिविल परीक्षा में ओबीसी वर्ग को आरक्षित वर्ग के सामान रखा जाए रखा गया था। ओबीसी वर्ग को भी एससी एसटी के बाद के समान न्यूनतम पात्रता में छूट मिली चाहिए।

क्या है याचिका में

आपको बात दें इस संबंध में नरसिंहपुर निवासी अधिवक्ता वर्षा पटेल की ओर से एक याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई थी। जिसमें प्रदेश सरकार न्यायिक सेवा भर्ती नियम 1994 में किए गए संशोधन को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया है कि नियमों में कहीं भी यह प्रावधान नहीं किया गया है, कि अनारक्षित पदों को परीक्षा के प्रथम और द्वितीय चरण में कैसे भरा जाएगा।

ओबीसी वर्ग के लिए समस्त योग्यताएं अनारक्षित वर्ग के समान निर्धारित की गई हैं, जो कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 16(4) तथा आरक्षण अधिनियम 1994 का उल्लंघन है। इस याचिका में राहत की मांग करते हुए कहा गया है कि हाईकोर्ट की समस्त भर्तियों को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए लोक सेवा आयोग या राज्य की किसी परीक्षा एजेंसी से परीक्षा कराई जाए।

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